‘माँ धरा नमन प्रोग्राम’ के अंतर्गत जल संरक्षण, जल गुणवत्ता परीक्षण एवं स्किल डेवलपमेंट पर मिलेगा हैंड्स-ऑन प्रशिक्षण

देहरादून, 24 जून। उत्तराखण्ड सरकार के यूकॉस्ट (उत्तराखण्ड काउंसिल फॉर साइंस एंड टेक्नोलॉजी) एवं रास बिहारी बोस सुभारती यूनिवर्सिटी, देहरादून के संयुक्त सहयोग से “वाटर क्वालिटी एनालिसिस ट्रेनिंग एंड इट्स एप्लिकेशन्स फॉर विकसित भारत” विषय पर वन-डे नेशनल हैंड्स-ऑन ट्रेनिंग वर्कशॉप एंड अवेयरनेस प्रोग्राम का आयोजन 25 जून, 2026 को किया जाएगा।

“माँ धरा नमन प्रोग्राम” के अंतर्गत आयोजित होने वाली यह कार्यशाला यूकॉस्ट लैब, झाझरा, देहरादून में प्रातः 9:30 ए.एम. से 2:00 पी.एम. तक आयोजित होगी। कार्यक्रम का उद्देश्य युवाओं, विद्यार्थियों, शोधार्थियों एवं विज्ञान और पर्यावरण के क्षेत्र से जुड़े प्रतिभागियों को जल संरक्षण एवं जल गुणवत्ता विश्लेषण की आधुनिक तकनीकों से परिचित कराना है।

कार्यशाला में प्रतिभागियों को वाटर कंजर्वेशन मेथड्स, इंडियन ट्रेडिशनल वाटर कंजर्वेशन प्रैक्टिसेज, वाटर सैम्पलिंग मेथड्स, तथा वाटर क्वालिटी पैरामीटर्स (फिजिकल, केमिकल एंड बायोलॉजिकल पैरामीटर्स) के संबंध में व्यावहारिक प्रशिक्षण दिया जाएगा। इसके अतिरिक्त फील्ड एवं लेबोरेटरी स्तर पर वाटर क्वालिटी पैरामीटर्स के एनालिसिस, तथा वाटर क्वालिटी एनालिसिस के स्किल डेवलपमेंट एवं करियर ऑपर्च्युनिटीज में अनुप्रयोग विषयों पर विशेषज्ञों द्वारा मार्गदर्शन प्रदान किया जाएगा।

सुभारती यूनिवर्सिटी में वाटर क्वालिटी

कार्यक्रम में जल गुणवत्ता परीक्षण से संबंधित आधुनिक उपकरणों एवं वैज्ञानिक प्रक्रियाओं का प्रत्यक्ष प्रदर्शन भी किया जाएगा, जिससे प्रतिभागियों को व्यवहारिक अनुभव प्राप्त हो सके। कार्यशाला के समापन अवसर पर प्रतिभागियों को सर्टिफिकेट भी प्रदान किए जाएंगे।

इस राष्ट्रीय कार्यशाला के आयोजन में सीआरआईएस डीएनए लैब्स (सेंटर फॉर रिसर्च एंड इनोवेटिव साइंटिफिक स्टडीज़), देहरादून का भी सहयोग प्राप्त है। कार्यक्रम का मूल संदेश “एम्पावरिंग यूथ, प्रोटेक्टिंग वाटर, बिल्डिंग अ विकसित भारत” है, जो युवाओं को जल संरक्षण एवं पर्यावरणीय उत्तरदायित्व के प्रति जागरूक करने का प्रयास करता है।

आयोजकों ने विद्यार्थियों, शोधार्थियों, शिक्षकों तथा विज्ञान एवं पर्यावरण के क्षेत्र में रुचि रखने वाले सभी प्रतिभागियों से इस महत्वपूर्ण प्रशिक्षण कार्यक्रम में सहभागिता करने का आह्वान किया है, ताकि “सेव वाटर, सेव अर्थ, सिक्योर फ्यूचर” के संकल्प को सशक्त बनाया जा सके।

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