मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने गुरुवार रात पीएसी व उप्र विशेष सुरक्षा बल (यूपी एसएसएफ) की समीक्षा की। उन्होंने कहा कि किसी भी सुरक्षा बल की वास्तविक शक्ति उसके प्रशिक्षित, अनुशासित और तकनीकी रूप से दक्ष कर्मियों से होते हैं। लिहाजा सुरक्षा बलों के प्रशिक्षण व्यवस्था को अधिक व्यवहारिक और तकनीक आधारित बनाया जाए। ताकि सुरक्षा बलों के जवान हर परिस्थिति में प्रभावी और त्वरित प्रतिक्रिया देने में सक्षम हो।

बैठक में बताया गया कि सभी पीएसी वाहनों में जीपीएस एवं डैशकैम स्थापित करने तथा त्वरित प्रतिक्रिया वाहनों की व्यवस्था विकसित करने का काम किया जा रहा है। पीएसी एकीकृत कमांड व नियंत्रण केंद्र (आईसीसीसी) परियोजना की विस्तृत रूपरेखा प्रस्तुत की गई। इसके माध्यम से प्रदेश की सभी पीएसी वाहिनियों को डिजिटल नेटवर्क से जोड़ा जाएगा। जीपीएस आधारित वाहन ट्रैकिंग, ड्रोन एवं एआई आधारित निगरानी, लाइव कमांड एवं कंट्रोल सेंटर तथा सुरक्षित संचार प्रणाली विकसित की जाएगी। मुख्यमंत्री ने इस व्यवस्था को जल्द लागू कराये जाने का निर्देश दिया।

मुख्यमंत्री ने पीएसी व यूपीएसएसएफ के आधुनिकीकरण, क्षमता विस्तार, प्रशिक्षण, अवसंरचना विकास व भावी कार्ययोजनाओं की विस्तृत समीक्षा की। उन्होंने कहा कि पीएसी, एसडीआरएफ और यूपीएसएसएफ प्रदेश की सुरक्षा प्रणाली के महत्वपूर्ण स्तंभ हैं और इन्हें भविष्य की चुनौतियों के अनुरूप तैयार किया जाना चाहिए। उन्होंने पीएसी की वर्दी सिविल पुलिस से अलग करने की आवश्यकता भी जताई। मुख्यमंत्री ने पीएसी के डिजिटलीकरण व तकनीकी विकास की समीक्षा करते हुए कहा कि आधुनिक सुरक्षा व्यवस्था में सूचना प्रौद्योगिकी का अधिकतम उपयोग किया जाना आवश्यक है।

मुख्यमंत्री ने महिला सुरक्षा के दृष्टिकोण से महिला बटालियनों के निर्माण कार्यों को प्राथमिकता से पूरा करने के निर्देश दिए। बैठक में बताया गया कि बदायूं, लखनऊ और गोरखपुर में महिला बटालियनों का निर्माण कार्य तेजी से प्रगति पर हैं। मुख्यमंत्री ने तीनों बटालियन परिसर में क्रमशः वीरांगना अवंतीबाई, वीरांगना उदा देवी और वीरांगना झलकारी बाई की अश्वारोही प्रतिमा स्थापित करने के निर्देश दिए। यह भी बताया गया कि बलरामपुर, मीरजापुर और जालौन में नई महिला वाहिनियों से संबंधित कार्यवाही भी आगे बढ़ाई जा रही है।

मुख्यमंत्री ने आगामी मानसून को देखते हुए बाढ़ व आपदा प्रबंधन की तैयारियों को सर्वोच्च प्राथमिकता देने के निर्देश दिए। बैठक में बताया गया कि 16 मई से 30 जून तक विभिन्न नदी तटों पर 17 पीएसी कंपनियों का विशेष बाढ़ राहत प्रशिक्षण संचालित किया जा रहा है। मुख्यमंत्री ने सभी उपकरणों की नियमित जांच और उनकी कार्यशीलता सुनिश्चित करने के निर्देश भी दिए।

प्रदेश में 12 जिलों में एसडीआरएफ तैनात है तथा संभावित बाढ़ परिस्थितियों को देखते हुए 15 जिलों में अतिरिक्त तैनाती का प्रस्ताव तैयार किया गया है। एसडीआरएफ जवानों को एनडीआरएफ अकादमी नागपुर, नादिया, पश्चिम बंगाल तथा नंदा देवी इंस्टीट्यूट ऑफ एयरो रेस्क्यू सहित विभिन्न राष्ट्रीय संस्थानों में विशेष प्रशिक्षण प्रदान किया जा रहा है।

मुख्यमंत्री ने पीएसी बैंड के कर्मियों की समयबद्ध पदोन्नति की नियमावली तैयार करने के निर्देश दिए। साथ ही एसडीआरएफ को और प्रभावी बनाने के उद्देश्य से खोज एवं बचाव कार्यों के लिए ह्यूमन लिफ्टिंग ड्रोन की उपयोगिता पर विचार करने का निर्देश भी दिया। यूपीएसएसएफ की समीक्षा करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि एयरपोर्ट, मेट्रो नेटवर्क, आरआरटीएस, न्यायालय परिसरों, महत्वपूर्ण सरकारी संस्थानों तथा प्रमुख धार्मिक स्थलों की सुरक्षा के क्षेत्र में इसकी जिम्मेदारी निरंतर बढ़ रही है। उन्होंने एसएसएफ में तैनाती के लिए मानकीकरण के निर्देश दिए। यूपीएसएसएफ की विभिन्न वाहिनियों के निर्माण कार्यों की समीक्षा भी की।

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