एलन मस्क की इलेक्ट्रिक कार कंपनी टेस्ला (Tesla) के भारत से वापस लौटने की खबरें इन दिनों चर्चा में हैं। मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, टेस्ला ने भारत में अपना मैन्युफैक्चरिंग प्लांट लगाने का बहुचर्चित प्लान हमेशा के लिए रद्द कर दिया है। कहा जा रहा है कि भारत के भारी उद्योग मंत्री ने खुद टेस्ला के जाने की पुष्टि की है। अगर आप भी सोच रहे हैं कि टेस्ला ने सच में भारत से पूरी तरह बोरिया-बिस्तर समेट लिया है, तो सच्चाई थोड़ी अलग है।
19 मई को ‘Eletric-Vehicles.com’ और ‘Futunn.com’ जैसी विदेशी वेबसाइटों ने ‘स्थानीय भारतीय मीडिया’ का हवाला देते हुए यह अफवाह उड़ाई कि टेस्ला ने भारत से पीछे हटने का आधिकारिक फैसला कर लिया है। इन रिपोर्ट्स में दावा किया गया कि भारत के भारी उद्योग मंत्री एचडी कुमारस्वामी ने इसकी पुष्टि की है। वहीं, सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर ‘Teslarati’ नाम के एक हैंडल ने तो केरल के वित्त मंत्री केएन बालगोपाल को ही भारत का भारी उद्योग मंत्री बताकर गलत सूचना फैला दी।
भारी उद्योग मंत्रालय के सूत्रों ने इन सभी रिपोर्ट्स को सिरे से खारिज कर दिया है। सूत्रों ने साफ किया कि मंत्री ने हाल ही में टेस्ला के प्लांट को लेकर ऐसा कोई भी बयान नहीं दिया है। विदेशी मीडिया दरअसल उनके पिछले साल के एक पुराने बयान को गलत संदर्भ में पेश कर रहा है।
विदेशी मीडिया जिस बयान का हवाला दे रहा है, वह पिछले साल का है, जब अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की टैरिफ नीतियों की काफी चर्चा थी। उस समय कुमारस्वामी ने कहा था कि मर्सिडीज-बेंज, स्कोडा-फॉक्सवैगन, हुंडई और किआ जैसी कंपनियों ने भारत में इलेक्ट्रिक कारें बनाने में दिलचस्पी दिखाई है। टेस्ला के बारे में उन्होंने कहा था, “हमें असल में टेस्ला से ऐसी कोई उम्मीद नहीं है। उन्होंने सिर्फ दो शोरूम शुरू करने में ही दिलचस्पी दिखाई है।” हालांकि, मौजूदा समय में टेस्ला ने भारत में 4 स्टोर लॉन्च कर दिए हैं- गुरुग्राम, नई दिल्ली, मुंबई और बेंगलुरु।
भारत सरकार और एलन मस्क या टेस्ला की ओर से भारत में फैक्ट्री लगाने या ना लगाने के मुद्दे पर कोई नया आधिकारिक बयान जारी नहीं किया गया है। हालांकि, भारत में कंपनी का रिटेल ऑपरेशन जारी है। अभी हाल ही में 14 मई 2026 को टेस्ला ने बेंगलुरु के व्हाइटफील्ड में अपना नया एक्सपीरियंस सेंटर खोला है और भारत के लिए अपनी नई 6-सीटर इलेक्ट्रिक SUV Model Y L पेश की है।
चूंकि मस्क अक्सर भारत की ऊंची इंपोर्ट ड्यूटी की शिकायत करते रहे हैं, इसलिए सरकार ने विदेशी ऑटो कंपनियों को घरेलू ईवी प्रोडक्शन में निवेश करने के लिए टैक्स में भारी छूट का ऑफर दिया था। नियम के मुताबिक, अगर कोई कंपनी भारत में ईवी प्लांट लगाने के लिए लगभग 500 मिलियन डॉलर का निवेश करती है, तो उसे इंपोर्ट ड्यूटी में बड़ी राहत मिलेगी। कंपनियां 70% के बजाय सिर्फ 15% की घटी हुई ड्यूटी पर सीमित संख्या में इलेक्ट्रिक कारें भारत में इंपोर्ट कर सकती हैं।
जुलाई 2025 में भारत में एंट्री करने के बाद से टेस्ला के लिए राह बहुत मुश्किल रही है। भारी टैक्स के कारण कारों की कीमत बहुत ज्यादा है, जिससे बिक्री के आंकड़े कंपनी की उम्मीदों से काफी नीचे रहे हैं। उदाहरण के लिए, कंपनी द्वारा भारत के लिए विशेष रूप से पेश की गई 6-सीटर इलेक्ट्रिक SUV Model Y L की शुरुआती कीमत ही 61.99 लाख रुपये है।
इस ऊंची कीमत का सीधा असर बिक्री पर देखा गया है, जहां पूरे साल 2025 में कंपनी महज 225 गाड़ियां ही बेच सकी। हालांकि, अप्रैल 2026 तक इसकी कुल बिक्री का आंकड़ा कुछ बढ़कर लगभग 383 गाड़ियों तक पहुंचा है। बाजार में अपनी स्थिति मजबूत करने और बिना बिकी गाड़ियों का स्टॉक निकालने के लिए कंपनी को फिलहाल भारतीय ग्राहकों को 2 लाख रुपये तक का बड़ा डिस्काउंट ऑफर भी देना पड़ रहा है।
रॉयटर्स की रिपोर्ट के मुताबिक, साल 2024 में एलन मस्क भारत आकर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मिलने वाले थे। इस दौरान 3 अरब डॉलर के निवेश का ऐलान होने की उम्मीद थी, लेकिन ‘टेस्ला के अन्य जरूरी कामों’ का हवाला देकर मस्क का यह दौरा टल गया था।
मस्क की दिलचस्पी फिलहाल होल्ड पर है। फरवरी 2025 में अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा था कि अगर टेस्ला भारत में फैक्ट्री लगाती है, तो यह अमेरिका के लिए “अनुचित” होगा, जिसके बाद इस योजना को टाल दिया गया। साल 2022 में भारत सरकार ने साफ कहा था कि टेस्ला पहले स्थानीय स्तर पर कारों का निर्माण करे, जबकि मस्क चाहते थे कि वे पहले कारों को एक्सपोर्ट करके भारत में डिमांड चेक करें।
भारत में आयातित इलेक्ट्रिक कारों पर लगने वाले टैक्स और भारत सरकार की नई EV (इलेक्ट्रिक व्हीकल) पॉलिसी के नियम एक-दूसरे से सीधे तौर पर जुड़े हुए हैं। इसी पॉलिसी की सख्त शर्तों को लेकर ही भारत सरकार और टेस्ला के बीच अभी तक सहमति नहीं बन पाई।
मार्च 2024 में, भारत सरकार के भारी उद्योग मंत्रालय ने विदेशी ऑटोमोबाइल कंपनियों को देश में लाने और ‘मेक इन इंडिया’ को बढ़ावा देने के लिए एक नई पॉलिसी लागू की थी। इस नई पॉलिसी में विदेशी कंपनियों को आयात शुल्क में भारी छूट का प्रस्ताव दिया गया, लेकिन इसके लिए कुछ पक्की शर्तें तय की गईं:
अगर कोई विदेशी कंपनी सरकार की योजना में शामिल होती है, तो उसे 35,000 डॉलर (लगभग 29 लाख रुपये) या उससे अधिक कीमत वाली प्रीमियम इलेक्ट्रिक कारों के आयात पर 70-100% की बजाय सिर्फ 15% टैक्स (कस्टम ड्यूटी) देना होगा।
यह 15% की रियायती दर 5 सालों के लिए लागू होगी। इसके तहत कंपनी हर साल अधिकतम 8,000 गाड़ियां ही 15% आयात शुल्क पर भारत ला सकती है।
भारत सरकार ने यह स्पष्ट कर दिया कि आयात शुल्क में यह छूट सिर्फ उन्हीं कंपनियों को मिलेगी जो भारत के विकास में हिस्सेदार बनेंगी। इसकी प्रमुख शर्तें हैं कंपनी को भारत में फैक्ट्री लगाने के लिए कम से कम 500 मिलियन डॉलर (लगभग 4,150 करोड़ रुपये) का पक्का निवेश करना होगा। यह निवेश करने के बाद, कंपनी को अधिकतम 3 साल के भीतर भारत में कार का कमर्शियल निर्माण शुरू करना होगा।
कंपनी को यह सुनिश्चित करना होगा कि 3 साल के भीतर उसकी कार के कम से कम 25% कलपुर्जे भारत के ही बने हों। 5 साल पूरा होने तक इस ‘मेड इन इंडिया’ पुर्जों के इस्तेमाल को बढ़ाकर 50% करना अनिवार्य होगा।टेस्ला की मांग थी कि भारत सरकार बिना किसी शर्त के शुरुआत में उन्हें आयात शुल्क घटाकर 15% कर दे, ताकि वह अमेरिका या चीन से कारें मंगाकर भारत के बाजार में ‘डिमांड’ चेक कर सकें। इसके बाद वे तय करेंगे कि भारत में फैक्ट्री लगानी है या नहीं। वहीं, भारत सरकार अपनी नई पॉलिसी पर अडिग रही। सरकार का रुख बिल्कुल साफ था कि जब तक कंपनी भारत में 4,150 करोड़ रुपये का निवेश करने और देश में ही प्लांट लगाने का लिखित कमिटमेंट नहीं देगी, तब तक कोई टैक्स छूट नहीं दी जाएगी।
