कांग्रेस के अध्यक्ष पद चुनाव के नामांकन के लिए केवल तीन दिन शेष है लेकिन अब तक यही कन्फर्म नहीं हो पाया है कि आखिर कौन-कौन उम्मीदवार होगा। अशोक गहलोत को गांधी परिवार का सबसे पसंदीदा उम्मीदवार बताया जा रहा था लेकिन राजस्थान की कुर्सी की मोह में वह भी फंस गए। राजस्थान के विधायकों को विद्रोह के बाद गहलोत को आलाकमान से माफी भी मांगनी पड़ गई। वहीं रिपोर्ट्स ये भी हैं कि राजस्थान में यथास्थिति बनी रह सकती है और अध्यक्ष पद के चुनाव का प्रत्याशी कोई और बनाया जाएगा। कांग्रेस चुनाव से ठीक पहले जिस असमंजस में है वह कोई नया नहीं है। राष्ट्रपति चुनाव के वक्त भी विपक्षी दलों को अपना प्रत्याशी नहीं मिल रहा था। कांग्रेस ने जिनका नाम आगे किया उन्होंने खुद ही चुनाव लड़ने से इनकार कर दिया।
राजस्थान संकट में शामिल एक नेता ने कहा, कुछ सप्ताह से गहलोत की अध्यक्ष पद के लिए पहली पसंद थे। हमें उम्मीद नहीं थी कि ऐसा संकट खड़ा हो जाएगा इसलिए हमारे पास कोई प्लान बी नहीं था। गहलोत गांधी परिवार के वफादार माने जाते हैं। अब लास्ट मिनट पर कांग्रेस में गहलोत का विकल्फ ढूंढने की कवायद शुरू हो गई है। कमलनाथ भी सोनिया गांधी से मिलने उनके आवास पर पहुंचे थे। हालांकि उन्होंने बाद में कहा कि वह नवरात्रि की शुभकामनाएं देने गए थे।
वहीं अध्यक्ष चुनाव के निर्वचान अधिकारी मधुसूदन मिस्त्री ने कहा है कि शशि थरूर और कोषाध्यक्ष पवन कुमार बंसल ने नामांकन पत्र लिया है। शशि थरूर की तरफ से कहा गया है कि वह 30 सितंबर को सुबह 11 बजे अपना नामांकन भरेंगे।
राष्ट्रपति चुनाव से पहले क्या हुआ था
राष्ट्रपति चुनाव से पहले विपक्ष ने संयुक्त उम्मीदवार उतारने की कवायद शुरू की थी। पहले शरद पवार और फारूक अब्दुल्ला का नाम प्रस्तावित किया गया लेकिन उन्होंने खुद इनकार कर दिया। महात्मा गांधी के पोते गोपालकृष्ण गांधी को उम्मीदवार बनाने की कोशिश की गई लेकिन वह भी नहीं माने। इसके बाद एनडीए सरकार में मंत्री रहे और टीएमसी नेता यशवंत सिन्हा का नाम फाइनल किया गया। गोपालकृष्ण गांधी के नाम पर सभी पार्टियां सहमत थीं लेकिन उन्होंने यह कहते हुए उम्मीदवारी से इनकार कर दिया था कि उनसे अच्छे भी कोई उम्मीदवार हो सकता है।
