
नई दिल्ली में आयोजित राष्ट्रीय सम्मेलन में विशिष्ट अतिथि, पैनलिस्ट और चेयरपर्सन के रूप में सहभागिता; डिजिटलाइजेशन को बताया दंत चिकित्सा का भविष्य
नई दिल्ली। रास बिहारी बोस सुभारती विश्वविद्यालय, देहरादून के कुलपति डॉ. हिमांशु ऐरन ने राष्ट्रीय स्तर के प्रतिष्ठित डिजी स्माइल नेक्स्ट – डिजिटल डेंटिस्ट्री नेशनल कॉन्फ्रेंस 2026 में अपनी प्रभावशाली उपस्थिति दर्ज कराते हुए विश्वविद्यालय का गौरव बढ़ाया। यह दो दिवसीय सम्मेलन 28-29 मार्च 2026 को डॉ. अंबेडकर इंटरनेशनल सेंटर, नई दिल्ली में इंडियन डेंटल एसोसिएशन एवं यूनिकॉर्न डेनमार्ट के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित किया गया।
डॉ. ऐरन ने इस सम्मेलन में विशिष्ट अतिथि के रूप में उद्घाटन समारोह में सहभागिता की, जहां उन्हें भारतीय डेंटल एसोसिएशन के राष्ट्रीय अध्यक्ष डॉ. मनोज श्रीवास्तव एवं महासचिव डॉ. अशोक धोबले द्वारा सम्मानित किया गया।

सम्मेलन के दौरान डॉ. हिमांशु ऐरन ने स्पीकर पैनलिस्ट के रूप में “डिजिटलाइजेशन इन ओरल हेल्थ – पॉलिसीज़ तो प्रैक्टिस” (मुख एवं दंत स्वास्थ्य में डिजिटलीकरण – नीतियों से व्यवहार तक ) विषय पर अपने विचार रखे। उन्होंने कहा कि डिजिटल तकनीकों ने दंत चिकित्सा को तेज, सटीक और अधिक विश्वसनीय बना दिया है। उन्होंने ओरल स्कैनर, कैड -कैम तकनीक, 3D प्रिंटिंग एवं डिजिटल नेविगेशन इन इंप्लांटॉलॉजी जैसी आधुनिक तकनीकों को दंत चिकित्सा में क्रांतिकारी परिवर्तन का आधार बताया।
डॉ. ऐरन ने अपने संबोधन में यह भी उल्लेख किया कि शैक्षणिक क्षेत्र में डिजिटलीकरण, विशेषकर भारत सरकार की डिजी लॉकर पहल, छात्रों के लिए अत्यंत लाभकारी सिद्ध हो रही है, और सुभारती विश्वविद्यालय इसे व्यवस्थित रूप से अपनाकर छात्रों को आधुनिक सुविधाएं प्रदान कर रहा है।

उल्लेखनीय है कि डॉ. हिमांशु ऐरन को इस सम्मेलन के लिए साइंटिफिक प्रेजेंटेशन पेपर चेयरपर्सन (वैज्ञानिक प्रस्तुति शोध-पत्र अध्यक्ष – डिजी स्माइल नेक्स्ट कमेटी) के रूप में भी नियुक्त किया गया, जो उनकी विशेषज्ञता और नेतृत्व क्षमता का राष्ट्रीय स्तर पर प्रमाण है।
सम्मेलन में देशभर से लगभग 1500 से अधिक दंत चिकित्सक, शिक्षाविद, शोधकर्ता एवं छात्र शामिल हुए, जिससे यह आयोजन डिजिटल डेंटिस्ट्री के क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण राष्ट्रीय मंच बन गया।
डॉ. ऐरन की इस बहुआयामी भूमिका—विशिष्ट अतिथि, पैनलिस्ट और चेयरपर्सन—ने न केवल सुभारती विश्वविद्यालय की प्रतिष्ठा को राष्ट्रीय स्तर पर सुदृढ़ किया, बल्कि डिजिटल दंत चिकित्सा के भविष्य को नई दिशा देने का कार्य भी किया।
