माधव टांडा / पीलीभीत यूपी
गोमती नदी संरक्षण को लेकर पर्यावरण प्रेमियों के द्वारा गोमती दर्शन पदयात्रा का कार्यक्रम शनिवार को गोमती नदी के उद्गम स्थल माधव टांडा से शुरू किया गया
गोमती दर्शन यात्रा के अंतर्गत माँ गोमती के संरक्षण एवं पुनर्जीवन को लेकर विभिन्न कार्यक्रमों का आयोजन किया गया। इन कार्यक्रमों में जनसहभागिता के साथ-साथ प्रशासनिक सहयोग भी प्रमुख रूप से देखने को मिला, जो इस अभियान की सफलता का आधार बनेगा
इस अवसर पर आयोजित कार्यक्रम में वन मंत्री अरुण सक्सेना जिलाधिकारी पीलीभीत ज्ञानेंद्र कुमार सिंह, विधायक बाबूलाल पासवान, ब्लॉक प्रमुख अजय गंगवार एवं महामंडलेश्वर स्वामी शिवानंद महाराज की गरिमामयी उपस्थिति रही। सभी अतिथियों ने माँ गोमती के संरक्षण, स्वच्छता एवं पुनर्जीवन के प्रति अपनी प्रतिबद्धता व्यक्त की।
वृक्षारोपण से दिया पर्यावरण संरक्षण का संदेश

माधव टांडा में गोमती नदी के उदगम स्थल पर आयोजित कार्यक्रम के दौरान वन मंत्री डॉ. अरुण कुमार सक्सेना द्वारा एक नीम का वृक्ष लगाकर वृक्षारोपण अभियान का शुभारंभ किया गया। साथ ही हरिशंकरी वृक्ष (पीपल, बरगद एवं पाकड़) का भी रोपण किया गया। इस अवसर पर उन्होंने समाज को संदेश दिया कि नदियों के किनारे अधिक से अधिक वृक्षारोपण किया जाना चाहिए, जिससे नदियों का संरक्षण, जलधारा की निरंतरता एवं पर्यावरण संतुलन सुनिश्चित किया जा सके।
वन मंत्री का वक्तव्य माधव टांडा से गाजीपुर तक नदी के तटों पर लगाए जाएंगे हरे भरे छायादार पेड़
वन मंत्री डॉ. अरुण कुमार सक्सेना ने अपने संबोधन में कहा कि सरकार माँ गोमती के संरक्षण एवं पुनर्जीवन के लिए पूरी तरह गंभीर है। उन्होंने कहा कि जहाँ-जहाँ से संभव हो, माँ गोमती में जल की उपलब्धता सुनिश्चित की जाए तथा उसे पुनर्जीवित करने के लिए हर संभव प्रयास किए जाएं। उन्होंने वेटलैंड्स के पुनर्जीवन को प्राथमिकता देने पर जोर देते हुए कहा कि माँ गोमती उत्तर प्रदेश की जीवनदायिनी नदी है और इसके संरक्षण में जन सहभागिता अत्यंत आवश्यक है। उन्होंने लोगों से अपील की कि गोमती तटों पर प्लास्टिक का उपयोग न करें तथा पर्यावरण अनुकूल सामग्री का प्रयोग करें।
माधव टांडा में वन सफारी की घोषणा
वन मंत्री ने पीलीभीत के माधव टांडा वन क्षेत्र को वन्य सफारी के रूप में विकसित करने की घोषणा की तथा संबंधित डीएफओ को शीघ्र प्रस्ताव प्रस्तुत करने के निर्देश दिए।
ज्ञापन सौंपा गया
कार्यक्रम के दौरान गोमती दर्शन संस्था द्वारा उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को संबोधित एक ज्ञापन प्रशासन के माध्यम से सौंपा गया। ज्ञापन में माँ गोमती से जुड़े झील, तालाब एवं वेटलैंड्स के पुनर्जीवन हेतु मनरेगा के माध्यम से सफाई कर उन्हें पुनः जल से भरने, सहायक नदियों के संरक्षण, नालों के वैज्ञानिक ट्रीटमेंट तथा गोमती को राज्य नदी का दर्जा देने जैसी महत्वपूर्ण मांगें प्रमुख रूप से शामिल रहीं।
गोमती दर्शन संस्था एव समाजसेवियों की सक्रिय भूमिका
गोमती नदी संरक्षण को लेकर किए जा रहे कार्यक्रम में गोमती दर्शन संस्था के संयोजक एडवोकेट अनुराग पांडे एवं अध्यक्ष श्वेता सिंह समाज सेवी दीपक शुक्ला तिरंगा महाराज अंतरराष्ट्रीय युवा हिंदू वाहिनी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अनिल सिंह मुख्य यजमान के रूप में उपस्थित रहे। संस्था के अन्य पदाधिकारियों में श्रीमती सोनी सिंह उपाध्यक्ष पंकज शुक्ला महामंत्री संजीव श्रीवास्तव महामंत्री ललित मिश्रा (अधिवक्ता) अरविंद पांडे (संगठन मंत्री), पवन मिश्रा हिमांशु मिश्रा अंकुर पांडे, शनि साहू, ग्राम प्रधान योगेश्वर सिंह एवं निर्वय सिंह सहित अनेक गणमान्य लोग उपस्थित रहे।इसके अतिरिक्त महामना मालवीय मिशन द्वारा भी एक ज्ञापन प्रस्तुत किया गया, जिसमें सड़कों एवं नदियों के किनारे “पंचवटी” के रूप में वृक्षारोपण का प्रस्ताव रखा गया। इस पर वन मंत्री ने आवश्यक कार्रवाई के निर्देश दिए।
गोमती दर्शन संस्था के संयोजक एडवोकेट अनुराग पांडे ने माँ गोमती के ऐतिहासिक एवं सांस्कृतिक महत्व को रेखांकित किया, वहीं संस्था की अध्यक्ष श्वेता सिंह ने नदियों में गिरने वाले नालों को तत्काल बंद कर उनके जल का वैज्ञानिक ट्रीटमेंट सुनिश्चित करने की मांग की।
गोमती नदी संरक्षण को लेकर लंबे समय से संघर्ष कर रहे हैं समाजसेवी दीपक शुक्ला तिरंगा महाराज ने कहा
यह कार्यक्रम माँ गोमती के संरक्षण, स्वच्छता एवं पुनर्जीवन के लिए किया जा रहा है इसमें सरकार एवं जनसहयोग के संयुक्त प्रयास ही गोमती नदी बचाने का एक मात्र विकल्प है और हम सभी का सामूहिक प्रयास एक महत्वपूर्ण उदाहरण बन रहा है
गोमती नदी के तटों पर किसी भी प्रकार का कब्जा बर्दाश्त नहीं
तिरंगा महाराज ने कहा सभी सामाजिक लोगों को सभी सामाजिक संगठनों को गोमती नदी संरक्षण के लिए आगे आना होगा और मिलकर कदम उठाने होंगे तभी हम अपने प्राकृतिक संसाधनों जीवन दायिनी गोमती माता को बचा पाएंगे जो हमारी आने वाली पीढ़ियों के लिए बहुत ही महत्वपूर्ण है उन्होंने कहा गोमती नदी के तट पर हम किसी भी प्रकार का कब्जा बर्दाश्त नहीं करेंगे और इसके लिए हर स्तर से कदम उठाए जाएंगे जिसके लिए हम लोग तैयार हैं सरकार को आगे आकर गोमती नदी को राज्य नदी घोषित कर उसके संरक्षण के लिए उचित कदम उठाने चाहिए
