23 मार्च – शहीद दिवस पर आर. डी. एम. कॉलेज चौधरपुर मुरादाबाद में शहीदों को याद करते हुए कॉलेज के अध्यापक हिमांशु जी ने सभा को संबोधित करते हुए कहा कि,
आज हम सब यहाँ एक अत्यंत महत्वपूर्ण दिन—23 मार्च, शहीद दिवस—के अवसर पर एकत्र हुए हैं। यह दिन उन महान वीरों की याद दिलाता है जिन्होंने देश की आज़ादी के लिए अपने प्राणों की आहुति दे दी।
23 मार्च 1931 को हमारे देश के तीन महान क्रांतिकारी—भगत सिंह, सुखदेव और राजगुरु—हँसते-हँसते फाँसी के फंदे पर झूल गए। उनका बलिदान हमें यह सिखाता है कि देश के लिए समर्पण, साहस और त्याग सबसे बड़ी ताकत होती है।
प्रिय विद्यार्थियों, आज हमें यह सोचने की ज़रूरत है कि हम उनके सपनों का भारत बनाने के लिए क्या कर रहे हैं। शहीदों ने जिस आज़ाद भारत का सपना देखा था, वह केवल सीमाओं की सुरक्षा से नहीं, बल्कि एक जिम्मेदार, शिक्षित और ईमानदार नागरिक बनने से पूरा होगा।
हमें उनके आदर्शों को अपने जीवन में अपनाना चाहिए—

सच्चाई और ईमानदारी का मार्ग चुनना,
अपने कर्तव्यों का पालन करना,
और देश के प्रति अपने दायित्व को समझना।
आज के समय में देशभक्ति केवल युद्ध लड़ना नहीं है, बल्कि अपने काम को पूरी निष्ठा से करना, समाज में अच्छा योगदान देना और दूसरों की मदद करना भी सच्ची देशभक्ति है।
आइए, इस शहीद दिवस पर हम यह संकल्प लें कि हम अपने देश को बेहतर बनाने में अपना पूरा योगदान देंगे और शहीदों के सपनों को साकार करेंगे।
अंत में, मैं अपने शब्दों को इन पंक्तियों के साथ समाप्त करना चाहूँगा,
“शहीदों की चिताओं पर लगेंगे हर बरस मेले,
वतन पर मरने वालों का यही बाकी निशाँ होगा।”
धन्यवाद!
जय हिन्द! 🇮🇳
