डॉ. अतुल कृष्ण एवं प्रो. डॉ. हिमांशु ऐरन के मार्गदर्शन में उच्च मानदंड स्थापित करने की ओर अग्रसर सुभारती पत्रकारिता संस्थान
उत्तराखंड के राज्यपाल लेफ्टिनेंट जनरल गुरमीत सिंह (सेवानिवृत्त) की अध्यक्षता में लोक भवन में प्रदेश के विभिन्न विश्वविद्यालयों के मीडिया एवं जनसंचार विभागों के विभागाध्यक्षों, डीन एवं प्रमुख मीडिया विशेषज्ञों की एक महत्वपूर्ण बैठक आयोजित हुई। बैठक में “एआई युग और डिजिटल सूचना पारिस्थितिकी तंत्र में मीडिया शिक्षा: चुनौतियाँ, नैतिकता और अवसर” विषय पर व्यापक मंथन किया गया।

बैठक में रास बिहारी बोस सुभारती विश्वविद्यालय के अंतर्गत एलजीएसबी सुभारती कॉलेज ऑफ जर्नलिज्म एंड मास कम्युनिकेशन के निदेशक प्रो. शील शुक्ला ने सक्रिय सहभागिता करते हुए अपने विचार रखे। राज्यपाल ने अपने संबोधन में कहा कि एआई और डिजिटल मीडिया ने सूचना के स्वरूप को पूरी तरह बदल दिया है, ऐसे में मीडिया शिक्षा को समयानुकूल बनाना अनिवार्य है। उन्होंने स्पष्ट किया कि मीडिया का उद्देश्य केवल समाचार देना नहीं, बल्कि जिम्मेदार नागरिक तैयार करना भी होना चाहिए।
बैठक के दौरान प्रो. शील शुक्ला ने पत्रकारिता पाठ्यक्रम में क्राइसिस एवं डिजास्टर कम्युनिकेशन को शामिल करने तथा पत्रकारिता में प्रवेश हेतु एक कॉमन एंट्रेंस परीक्षा लागू करने का महत्वपूर्ण सुझाव दिया। उन्होंने अपने संबोधन में सुभारती समूह के अध्यक्ष डॉ. अतुल कृष्ण और विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो डॉ. हिमांशु ऐरन के सहयोग के प्रति आभार व्यक्त करते हुए विश्वास जताया कि उनके मार्गदर्शन में सुभारती विश्वविद्यालय का पत्रकारिता संस्थान शीघ्र ही उच्च कोटि के मानदंड स्थापित करेगा।
इस अवसर पर यह भी उल्लेख किया गया कि सुभारती विश्वविद्यालय के अंतर्गत पत्रकारिता संस्थान का नाम शहीद लेफ्टिनेंट ज्ञान सिंह बिष्ट के सम्मान में “लेफ्टिनेंट ज्ञान सिंह बिष्ट सुभारती कॉलेज ऑफ जर्नलिज्म एंड मास कम्युनिकेशन” रखा गया है, जो संस्थान के राष्ट्रीय चरित्र को दर्शाता है।
विशेष रूप से 17 मार्च, जो लेफ्टिनेंट ज्ञान सिंह बिष्ट की पुण्यतिथि (बलिदान दिवस) के रूप में मनाया जाता है, के अवसर पर प्रो. शील शुक्ला ने सुभारती विश्वविद्यालय की ओर से राज्यपाल को संस्थान का एक स्मृति-पोर्ट्रेट भेंट किया।
बैठक में दून विश्वविद्यालय के सहयोग से आयोजित इस विमर्श में विभिन्न विश्वविद्यालयों के विशेषज्ञों ने एआई के बढ़ते प्रभाव, उसके जिम्मेदार उपयोग, मीडिया नैतिकता, फैक्ट-चेकिंग व्यवस्था और व्यावहारिक शिक्षा पर जोर दिया।
बैठक के अंत में राज्यपाल ने ऐसे संवादों को नियमित रूप से आयोजित करने की बात कही, ताकि मीडिया शिक्षा को नई दिशा मिल सके और सकारात्मक परिणाम सामने आ सकें।
इसी क्रम में प्रो. शील शुक्ला को “राष्ट्रीय मीडिया में आवश्यक बदलाव” विषय पर एक महत्वपूर्ण प्रोजेक्ट के नेतृत्व की जिम्मेदारी भी सौंपी गई, जिसे मीडिया शिक्षा के क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण पहल माना जा रहा है।
