कुलपति डॉ. हिमांशु ऐरन ने दी राष्ट्रभक्ति की सीख, डॉ. अतुल कृष्ण के राष्ट्रवादी विचारों को बताया विश्वविद्यालय की पहचान
देहरादून। रास बिहारी बोस सुभारती विश्वविद्यालय, देहरादून में सुभारती दिवस उत्साह और देशभक्ति के माहौल में मनाया गया। कार्यक्रम का शुभारंभ कुलपति प्रो. डॉ. हिमांशु ऐरन ने दीप प्रज्वलन और पुष्प अर्पण के साथ किया। इस अवसर पर महान क्रांतिकारी चंद्रशेखर आज़ाद एवं सभी स्वतंत्रता सेनानियों को श्रद्धांजलि अर्पित की गई।

अपने संबोधन में डॉ. हिमांशु ऐरन ने कहा कि सुभारती दिवस केवल एक औपचारिक कार्यक्रम नहीं, बल्कि यह हर महीने छात्रों के भीतर राष्ट्रप्रेम और जिम्मेदारी की भावना जगाने का अवसर है। उन्होंने स्पष्ट कहा कि पढ़ाई का मकसद सिर्फ औपचारिक शिक्षा हासिल करना नहीं, बल्कि ऐसे जिम्मेदार और देशभक्त नागरिक तैयार करना है जो देश को सर्वोपरि मानें।
उन्होंने कहा कि विश्वविद्यालय का मूल मंत्र “राष्ट्र प्रथम–सदैव प्रथम” है और इसी सोच के साथ हर गतिविधि आयोजित की जाती है। डॉ. ऐरन ने विशेष रूप से कहा कि डॉ. अतुल कृष्ण का राष्ट्रवादी चरित्र उनकी सबसे बड़ी पहचान है, और उसी सोच का असर उनके रास बिहारी बोस सुभारती विश्वविद्यालय के साथ साथ सभी शैक्षणिक संस्थानों में साफ दिखाई देता है। उन्होंने कहा कि स्वयं वे भी इसी राष्ट्रवादी विचारधारा को आगे बढ़ाने के लिए प्रतिबद्ध हैं।
फैकल्टी ऑफ एलाइड हेल्थ केयर द्वारा आयोजित काव्य पाठ (Poetry) और एक्सटेम्पोर (Extempore) प्रतियोगिताओं में छात्रों ने देशभक्ति, बलिदान, युवा शक्ति और सामाजिक जागरूकता जैसे विषयों पर प्रभावशाली प्रस्तुतियां दीं। निर्णायकों ने विषय, प्रस्तुति, भाषा और आत्मविश्वास के आधार पर प्रतिभागियों का मूल्यांकन किया। एक्सटेम्पोर सिमरन नेगी, कविता पाठ में निकी राठौड़ प्रथम स्थान के साथ विजेता रहीं।

इस अवसर पर परीक्षा नियंत्रक डॉ. प्रदीप शर्मा, संस्कृति विभाग के सचिव श्री विनय सेमवाल, डीन फैकल्टी ऑफ एलाइड हेल्थ केयर डॉ. अनिर्बन पात्रा सहित विभिन्न विभागों के अधिकारी, संकाय सदस्य और बड़ी संख्या में छात्र-छात्राएं उपस्थित रहे।
कार्यक्रम के अंत में आयोजक समिति ने सभी अतिथियों और प्रतिभागियों का आभार व्यक्त किया। राष्ट्रगान के साथ कार्यक्रम का समापन हुआ, लेकिन परिसर में देर तक एक ही संदेश गूंजता रहा—
“राष्ट्र प्रथम–सदैव प्रथम।”
