श्रीलंका के बल्लेबाज भानुका राजपक्षा की भारतीय खिलाड़ियों के बैट को लेकर की गई एक टिप्पणी ने टी20 विश्व कप के दौरान एक बड़े विवाद को जन्म दे दिया था। राजपक्षा ने कहा कि भारतीय खिलाड़ियों के बैट बहुत अच्छे है। ऐसा लगता है जसे कि उस पर रबड़ की एक परत लगी हुई है और इन बैट को दूसरे खरीद भी नहीं सकते। श्रीलंकाई क्रिकेटर की इस टिप्पणी को ‘बैट-टैंपरिंग’ के रूप में देखा जाने लगा था कि वह भारतीय बल्लेबाजों पर मानकों से हटकर गलत तरह के बैट के इस्तेमाल का आरोप लगा रहे हैं। विवाद बढ़ता देख अब राजपक्षा ने सोशल मीडिया पर सफाई दी है कि उनकी बात को गलत समझा गया, वो तो भारतीय क्रिकेट की तारीफ कर रहे थे।

राजपक्षा ने एक हालिया इंटरव्यू में कहा था, ‘हम जो बेस्ट बैट पा सकते हैं, उससे भी कहीं बेहतर बैट भारतीय खिलाड़ियों के होते हैं। ऐसा लगता है कि जैसे उस पर रबड़ की एक परत लगी हुई है। मैं ये कल्पना नहीं कर सकता कि ये कैसे संभव हो सकता है। इन बैट को दूसरे खरीद तक नहीं सकते- सभी खिलाड़ी ये जानते हैं।’

राजपक्षा के इंटरव्यू के इस हिस्से पर ऑनलाइन डिबेट छिड़ गई थी जिसमें ऐसी अटकलें लगने लगीं कि क्या भारतीय खिलाड़ी किसी खास तरह का बल्ला या मॉडिफाइड बैट का इस्तेमाल कर रहे हैं। हालांकि इसे लेकर किसी ने आईसीसी से कोई आधिकारिक शिकायत नहीं दर्ज कराई है। इसके अलावा इस मुद्दे पर न तो भारत और ना श्रीलंका की तरफ से कोई औपचारिक बयान दिया गया है। पूरा विवाद सिर्फ सोशल मीडिया तक सीमित है।

राजपक्षा ने जब इंटरव्यू में भारतीय खिलाड़ियों के बल्ले को लेकर टिप्पणी की तब शायद उन्हें भी अंदाजा नहीं रहा होगा कि इससे एक बहस छिड़ सकती है। विवाद बढ़ता देख उन्होंने सफाई दी कि उनका इरादा तो भारतीय खिलाड़ियों और वहां के क्रिकेट इन्फ्रास्ट्रक्चर की तारीफ करने की थी।

उन्होंने एक सोशल मीडिया पोस्ट में लिखा, ‘एक हालिया इंटरव्यू में किए कॉमेंट के बारे में सफाई देना चाहता हूं जिसे अलग तरह से लिया गया और कुछ तो अनुवाद की वजह से ऐसा हुआ। मैं ये तारीफ करना चाहता था: भारतीय क्रिकेट अविश्वसनीय रूप से बहुत आगे है, उसके सिस्टम से लेकर इन्फ्रास्ट्रक्चर और उपकरणों की गुणवत्ता तक। उनके बैट मैन्यूफैक्चरर्स दुनिया में सर्वश्रेष्ठ में से एक हैं। मुझे एक स्पष्ट संदर्भ देना चाहिए था।’

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