बागेश्वर धाम के पीठाधीश्वर पंडित धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री ने बांदा में आयोजित धार्मिक कार्यक्रम में हिंदू समाज के लिए महत्वपूर्ण संदेश दिया। उन्होंने स्पष्ट किया कि किसी भी दूसरे समुदाय को गाली देना या उन्हें निशाना बनाना भारत को हिंदू राष्ट्र बनाने का रास्ता नहीं है। शास्त्री ने कहा कि पहले हिंदुओं को अपने समाज में विद्यमान कुरीतियों, आंतरिक कमजोरियों और गलत प्रथाओं को सुधारने की जरूरत है। यही असली तरीका है जिससे समाज में शांति, एकता और भाईचारे की भावना कायम की जा सकती है।

धीरेंद्र शास्त्री ने बांदा में खुरहंड स्टेशन स्थित सदर विधायक प्रकाश द्विवेदी के आवास पर आयोजित सुंदरकांड व हनुमान चालीसा पाठ कार्यक्रम में भाग लिया। उन्होंने उपस्थित लोगों को संबोधित करते हुए कहा कि “हिंदू मेरी एक बात नोट कर लें – मुसलमानों को गालियां देकर हिंदू राष्ट्र नहीं बनेगा। अगर हमें सच में हिंदू राष्ट्र बनाना है तो पहले हमें अपनी जात-पात, पुराने सामाजिक भेदभाव और आंतरिक कमियों को दूर करना होगा। जब हम अपने भीतर सुधार लाएंगे तभी भारत में हिंदू राष्ट्र की अवधारणा साकार हो सकेगी।”

उन्होंने समाज के लोगों को यह भी समझाया कि धर्म का असली उद्देश्य केवल कर्मकांड या पूजा तक सीमित नहीं है। धर्म का अर्थ है आत्म सुधार, नैतिकता और सभी के प्रति प्रेम एवं सम्मान। पंडित शास्त्री ने कहा कि अगर व्यक्ति अपने जीवन में सनातन धर्म के मूल सिद्धांतों को अपनाए और गलत प्रथाओं को छोड़ दे, तो समाज में आपसी मेलजोल और भाईचारा स्वतः स्थापित होगा।

शास्त्री ने अपने भाषण में यह भी कहा कि हर हिंदू को खुद पर और भगवान पर भरोसा रखना चाहिए। उन्होंने उदाहरण देते हुए कहा कि किसी के पास अंधविश्वास या अन्य धर्मों की प्रथाओं में भटकने से कुछ हासिल नहीं होगा। भगवान पर पूर्ण विश्वास रखें और अपने कर्म पर ध्यान दें।

बागेश्वरधाम पीठाधीश्वर ने कहा कि उनके यहां समाज सुधार के लिए कई कार्यक्रम आयोजित किए जाते हैं। उन्होंने मजाकिया अंदाज में कहा कि यहां तलाक जैसी समस्याएं केवल नियमों और अनुशासन के साथ सुलझती हैं। इससे यह संदेश मिलता है कि समाज में सुधार और नियमों का पालन बेहद जरूरी है।

इस अवसर पर पंडित शास्त्री ने हिंदू समाज को जात-पात की परंपराओं से मुक्त होने की भी नसीहत दी। उन्होंने कहा कि समाज में भाईचारे की भावना तभी स्थायी होगी जब हम सभी हिंदू एक-दूसरे को भाई-भाई की तरह मानेंगे और पुराने भेदभाव को खत्म करेंगे।

अंत में उन्होंने कहा, “हमारा काम केवल धर्म और पूजा के माध्यम से समाज में मार्गदर्शन करना है। बाकी का काम भगवान संभालेंगे। अगर हम पूरी तरह से भगवान पर विश्वास रखेंगे, तो हमारा मार्ग हमेशा सही रहेगा।”

इस तरह, धीरेंद्र शास्त्री ने बांदा में अपने संबोधन के माध्यम से यह स्पष्ट संदेश दिया कि हिंदू राष्ट्र बनने के लिए गाली, विवाद या किसी अन्य समुदाय को निशाना बनाने की आवश्यकता नहीं है। असली बदलाव समाज के भीतर और हमारे अपने आचरण में सुधार से ही संभव है।

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