बिहार सरकार ने आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) तकनीक की मदद से कई जिलों में बड़े पैमाने पर टैक्स चोरी का खुलासा किया है। करीब तीन महीने पहले एआई के माध्यम से संदिग्ध दस्तावेजों की पहचान की गई थी, जिसके बाद जांच में जमीन और भवन के निबंधन के दौरान मूल्यांकन में हेराफेरी सामने आई। इस गड़बड़ी के जरिए करोड़ों रुपये के राजस्व की चोरी की गई थी। निबंधन विभाग के सचिव ने 838 चिन्हित दस्तावेजों के आधार पर जमीन मालिकों से लगभग 31 करोड़ रुपये की वसूली का आदेश जारी किया है।

निबंधन विभाग के सचिव अजय यादव ने इस मामले को बेहद गंभीर बताते हुए कहा कि इसमें विभागीय कर्मचारियों की संलिप्तता से भी इनकार नहीं किया जा सकता। उन्होंने सभी अवर निबंधकों को निर्देश दिया है कि उनके क्षेत्र में चिन्हित दस्तावेजों के आधार पर संबंधित लेख्यधारियों से बकाया राशि की वसूली सुनिश्चित की जाए।

सचिव ने स्पष्ट किया है कि यदि तय समय में राशि जमा नहीं होती है तो जमीन मालिकों के खिलाफ नीलामी प्रक्रिया या अन्य कानूनी प्रावधानों के तहत कार्रवाई की जाएगी। एआई के जरिए उजागर हुए इस घोटाले के बाद राज्य के निबंधन कार्यालयों में अफरा-तफरी का माहौल है। अधिकारियों का मानना है कि सामने आए मामलों से कहीं अधिक वास्तविक संख्या हो सकती है।

विभागीय निर्देशों के तहत एआईजी राकेश कुमार ने सभी संबंधित अधिकारियों को आदेश जारी किए हैं। उन्होंने बताया कि जिले में अब तक निबंधन विभाग अपने निर्धारित राजस्व लक्ष्य का केवल 62 प्रतिशत ही हासिल कर पाया है। वित्तीय वर्ष समाप्ति के करीब है, लेकिन राजस्व वसूली की गति संतोषजनक नहीं है।

एआईजी ने सभी अवर निबंधकों को निर्देश दिया है कि आवेदन प्राप्त होने के तीन दिनों के भीतर स्थल निरीक्षण किया जाए। कर्मचारियों की कमी होने पर लिपिकों को भी निरीक्षण कार्य में लगाया जाएगा। इसके साथ ही एमवीआर संशोधन से संबंधित रिपोर्ट भी मांगी गई है।

गौरतलब है कि वित्तीय वर्ष समाप्त होने से पहले नई एमवीआर दरें लागू की जानी हैं, जिससे जमीन की कीमतों में दो से चार गुना तक बढ़ोतरी संभव है। इसी को लेकर विभाग ने सभी अवर निबंधन कार्यालयों से विस्तृत रिपोर्ट तलब की है।

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