प्रो. डॉ. हिमांशु ऐरन बोले: आयातित मॉडल नहीं, भारत-केंद्रित अनुसंधान से ही बनेगा आत्मनिर्भर विज्ञान

विजडम इंडिया संवाददाता।

देहरादून | 19 जनवरी 2026
नेक्स्ट-जेन मॉलिक्यूलर डायग्नोस्टिक्स, CRISPR-Cas एवं बायोइन्फॉर्मेटिक्स जैसे उभरते बायोमेडिकल क्षेत्रों में कौशल विकास को बढ़ावा देने के उद्देश्य से एक सप्ताह का राष्ट्रीय हैंड्स-ऑन प्रशिक्षण एवं फैकल्टी डेवलपमेंट प्रोग्राम (FDP) सोमवार से CRIS–DNA लैब्स, ईस्ट होप टाउन, देहरादून में शुरू हो गया। यह कार्यक्रम 19 से 25 जनवरी 2026 तक आयोजित किया जा रहा है। प्रशिक्षण का आयोजन उत्तराखंड काउंसिल ऑफ बायोटेक्नोलॉजी (UCB), उत्तराखंड सरकार के सहयोग से तथा माइक्रोबायोलॉजिस्ट्स सोसाइटी ऑफ इंडिया के तत्वावधान में किया जा रहा है।


उद्घाटन सत्र की शुरुआत सरस्वती वंदना से हुई। इसके बाद डॉ. नरोतम शर्मा, संस्थापक, प्रबंध निदेशक एवं वैज्ञानिक, CRIS–DNA लैब्स ने स्वागत भाषण दिया। उन्होंने प्रतिभागियों का अभिनंदन करते हुए कहा कि आधुनिक बायोटेक्नोलॉजी में व्यावहारिक और उद्योग-उपयोगी प्रशिक्षण आज की सबसे बड़ी आवश्यकता है। उन्होंने छात्रों और संकाय सदस्यों से सत्रों में सक्रिय सहभागिता का आह्वान किया।
इसके पश्चात इंजीनियर सुधांशु मैथ्यू, वैज्ञानिक सलाहकार एवं काउंसलर, CRIS–DNA लैब्स ने अनुसंधान और वैज्ञानिक दृष्टिकोण की अहमियत पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि ऐसे प्रशिक्षण कार्यक्रम भारत के अनुसंधान एवं विकास पारिस्थितिकी तंत्र को मजबूत करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।
कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में प्रोफ़ेसर डॉ हिमांशु ऐरन, कुलपति, रास बिहारी बोस सुभारती विश्वविद्यालय, देहरादून उपस्थित रहे। अपने संबोधन में उन्होंने भारतीय जनसंख्या-केंद्रित अनुसंधान पर जोर देते हुए कहा कि “भारत को अब आयातित मॉडल नहीं, बल्कि अपनी ज़मीनी आवश्यकताओं पर आधारित शोध समाधान विकसित करने होंगे। जब तक रिसर्च लैब और समाज की ज़रूरतें आपस में नहीं जुड़ेंगी, तब तक वैज्ञानिक आत्मनिर्भरता अधूरी रहेगी।”


उन्होंने डॉ. ए. पी. जे. अब्दुल कलाम के साथ हुए अपने व्यक्तिगत संवादों का उल्लेख करते हुए युवाओं से अनुशासन और राष्ट्रहित को अनुसंधान का केंद्र बनाने का आह्वान किया। साथ ही, CRIS–DNA लैब्स द्वारा बायोटेक्नोलॉजी, माइक्रोबायोलॉजी, फॉरेंसिक साइंस, बॉटनी, जूलॉजी सहित जीवन विज्ञान के विद्यार्थियों को दिए जा रहे तकनीकी प्रशिक्षण को भविष्य के करियर और उच्च शिक्षा के लिए अत्यंत उपयोगी बताया।
इस अवसर पर प्रो. डॉ. हिमांशु ऐरन को स्मृति-चिह्न (मोमेंटो) एवं पौधा भेंट कर सम्मानित किया गया। उद्घाटन समारोह का एक प्रमुख आकर्षण माइक्रोबायोलॉजिस्ट्स सोसाइटी ऑफ इंडिया के वार्षिक कैलेंडर का विमोचन रहा, जिसे डॉ. नरोतम शर्मा ने प्रो. डॉ. हिमांशु ऐरन, इंजीनियर सुधांशु मैथ्यू तथा डॉ. नेगी, विभागाध्यक्ष, प्राणीशास्त्र, राजकीय महाविद्यालय, कोटद्वार की उपस्थिति में संपन्न कराया।


कार्यशाला की तकनीकी रूपरेखा डॉ. अंकिता सिंह, उप निदेशक, जूनियर वैज्ञानिक एवं क्वालिटी मैनेजर (NABL), CRIS–DNA लैब्स ने प्रस्तुत की। उन्होंने बताया कि सात दिवसीय इस गहन हैंड्स-ऑन प्रशिक्षण में रिकॉम्बिनेंट डीएनए तकनीक, कंपिटेंट सेल्स की तैयारी, CRISPR-Cas आधारित जीनोम एडिटिंग, बैक्टीरियल ट्रांसफॉर्मेशन, क्लोनिंग, GFP-आधारित जीन अभिव्यक्ति विश्लेषण, बायोइन्फॉर्मेटिक्स टूल्स से gRNA डिज़ाइन, प्लास्मिड आइसोलेशन, PCR, इलेक्ट्रोफोरेसिस, सीक्वेंस एनालिसिस तथा AlphaFold के माध्यम से AI-आधारित प्रोटीन मॉडलिंग शामिल हैं। उन्होंने कहा कि यह FDP सैद्धांतिक ज्ञान के साथ कठोर प्रयोगशाला अभ्यास का संतुलित संगम है।
कार्यशाला में देहरादून, कोटद्वार, मुंबई, हिमाचल प्रदेश, वडोदरा, पटना, जमशेदपुर, रुड़की, मेरठ और हरियाणा सहित देश के विभिन्न विश्वविद्यालयों और महाविद्यालयों के विद्यार्थियों ने सहभागिता की।


उद्घाटन सत्र का समापन श्री दर्शन अंबीगा, वायरोलॉजिस्ट, CRIS–DNA लैब्स द्वारा धन्यवाद ज्ञापन के साथ हुआ। उन्होंने UCB, माइक्रोबायोलॉजिस्ट्स सोसाइटी ऑफ इंडिया तथा विशेष रूप से प्रो. डॉ. हिमांशु ऐरन सहित सभी अतिथियों, वक्ताओं, संकाय सदस्यों, आयोजकों और प्रतिभागियों का आभार व्यक्त किया।
कार्यक्रम का समन्वय एवं प्रबंधन श्री जगजीत सिंह, जूलॉजिस्ट एवं रिसर्च असिस्टेंट, CRIS–DNA लैब्स ने किया। इस अवसर पर श्री रितिक डोगरा (डिप्टी क्वालिटी कंट्रोल मैनेजर), श्री प्रोहित जुमनानी (वायरोलॉजिस्ट), श्री विपिन नौटियाल (सेक्शन इंचार्ज, पैथोलॉजी), सुश्री रश्मि भट्ट, श्री साहेब लाल सहित अन्य स्टाफ सदस्य भी उपस्थित रहे।
यह सात दिवसीय राष्ट्रीय कार्यशाला एवं FDP आगामी छह दिनों तक जारी रहेगा और 25 जनवरी 2026 को समापन सत्र एवं प्रमाण-पत्र वितरण समारोह के साथ संपन्न होगा। प्रतिभागियों को UCB-संबद्ध प्रमाण-पत्र प्रदान किए जाएंगे, जो CRIS–DNA लैब्स के ISO, NABL एवं ICMR-अनुरूप प्रशिक्षण मानकों को दर्शाते हैं।

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