
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के राष्ट्रीय युवा दिवस संबोधन की लाइव स्ट्रीमिंग से हुई कार्यशाला की प्रभावी शुरुआत
विजडम इंडिया संवाददाता।
देहरादून। रास बिहारी बोस सुभारती विश्वविद्यालय, देहरादून में राष्ट्रीय युवा दिवस के अवसर पर आयोजित दो दिवसीय कार्यशाला का शुभारंभ प्रेरक और राष्ट्रप्रेरणा से ओत-प्रोत वातावरण में हुआ। कार्यक्रम के प्रथम दिन राष्ट्रीय युवा दिवस के अवसर पर देश के यशस्वी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के संबोधन की लाइव स्ट्रीमिंग विश्वविद्यालय परिसर में की गई, जिसे बड़ी संख्या में छात्र-छात्राओं, शिक्षकों एवं अधिकारियों ने एकाग्रता से सुना। प्रधानमंत्री के प्रेरक संदेशों ने युवाओं में आत्मनिर्भरता, राष्ट्र सेवा और लक्ष्यबद्ध जीवन के प्रति नई ऊर्जा का संचार किया और पूरे कार्यक्रम की वैचारिक दिशा तय की।

कार्यक्रम के प्रथम दिन विश्वविद्यालय के डायरेक्टर जनरल मेजर जनरल (रि.) जी. के. थपलियाल, कुलपति प्रोफेसर डॉ. हिमांशु ऐरन, कुलसचिव श्री खालिद हसन तथा डीन एकेडेमिक्स प्रोफेसर डॉ. मनमोहन गुप्ता ने स्वामी विवेकानंद एवं भारत माता के चित्र पर पुष्पांजलि अर्पित कर दीप प्रज्वलन किया।
दीप प्रज्वलन के उपरांत विश्वविद्यालय के कुलपति प्रोफेसर डॉ. हिमांशु ऐरन ने विद्यार्थियों को संबोधित करते हुए कहा कि स्वामी विवेकानंद केवल एक संत नहीं, बल्कि युवा चेतना के सबसे बड़े प्रेरणास्रोत हैं। उन्होंने छात्रों से आह्वान किया कि वे विवेकानंद के पदचिह्नों पर चलते हुए अपने छात्र जीवन में लक्ष्य, अनुशासन और नैतिक मूल्यों को आत्मसात करें। डॉ. ऐरन ने कहा कि राष्ट्र का भविष्य आज के विद्यार्थियों के चरित्र, सोच और कर्म पर निर्भर करता है।

इसके पश्चात विश्वविद्यालय के डायरेक्टर जनरल मेजर जनरल (रि.) जी. के. थपलियाल ने स्वामी विवेकानंद के जीवन चरित्र पर विस्तार से प्रकाश डालते हुए उनकी शिकागो यात्रा और विश्व धर्म सम्मेलन के प्रेरणादायक प्रसंग विद्यार्थियों के साथ साझा किए। उन्होंने कहा कि आत्मविश्वास, अनुशासन और सेवा भाव ही एक सशक्त व्यक्ति और सशक्त राष्ट्र की पहचान हैं।
कार्यक्रम के अगले,सत्र में विश्वविद्यालय के विद्यार्थियों याना, कुलदीप पाल और विशाल ने भी राष्ट्रीय युवा दिवस एवं स्वामी विवेकानंद के विचारों पर अपने विचार व्यक्त किए, जिससे कार्यक्रम की भूमिका और अधिक प्रभावशाली बनी।
पहले दिन की इस प्रेरक वैचारिक पृष्ठभूमि को आगे बढ़ाते हुए कार्यशाला के दूसरे दिन अनिवार्य वैल्यू-एडेड पाठ्यक्रम “राष्ट्र बोध” के अंतर्गत “भारतीय दर्शन” विषय पर व्याख्यान आयोजित किया गया। यह कार्यक्रम 13 जनवरी 2026 को विश्वविद्यालय के मुख्य परिसर स्थित सम्राट ललितादित्य प्रेक्षागृह, लाल बहादुर शास्त्री लोकप्रिय अस्पताल में संपन्न हुआ। यह व्याख्यान 23 दिसंबर 2025 को आयोजित परिचयात्मक-सह-उद्घाटन व्याख्यान श्रृंखला का अगला चरण था, जिसका उद्देश्य विद्यार्थियों में राष्ट्रीय चेतना, दार्शनिक दृष्टि, नागरिक दायित्व और चरित्र निर्माण को प्रोत्साहित करना है।

कार्यक्रम के आरंभ में लाल बहादुर शास्त्री लोकप्रिया अस्पताल की निदेशिका डॉ. जीवन आशा एवं विश्वविद्यालय के प्रति कुलपति डॉ. देशदीपक ने आमंत्रित विशिष्ट वक्ता डॉ. धर्मेन्द्र कुमार गुप्ता का पौधा एवं अंगवस्त्र भेंट कर स्वागत किया।
कार्यक्रम के मुख्य वक्ता प्रोफेसर डॉ. मनमोहन गुप्ता ने “राष्ट्र बोध” पाठ्यक्रम के अंतर्गत भारतीय दर्शन पर विद्यार्थियों का मार्गदर्शन करते हुए भारतीय चिंतन परंपरा, राष्ट्रीय मूल्यों और नागरिक कर्तव्यों की सरल व्याख्या की। वहीं विशिष्ट वक्ता डॉ. धर्मेन्द्र कुमार गुप्ता ने सतत विकास और स्वस्थ जीवनशैली पर संवाद करते हुए संतुलित दिनचर्या को सार्थक जीवन का आधार बताया।
दोनों वक्ताओं ने “राष्ट्र बोध” योजना के मुख्य सूत्रधार एवं अध्यक्ष MTV बुद्धिस्ट रिलीजियस एंड चैरिटेबल ट्रस्ट, डॉ. अतुल कृष्ण के विचार “चरित्र निर्माण से राष्ट्र निर्माण” को केंद्र में रखते हुए इस पाठ्यक्रम की आवश्यकता और प्रासंगिकता पर प्रकाश डाला। डॉ. अतुल कृष्ण का उद्देश्य इस पाठ्यक्रम के माध्यम से विद्यार्थियों में भारतीय कला, संस्कृति, जीवन मूल्यों और नागरिक कर्तव्यों के प्रति चेतना विकसित करना है। विश्वविद्यालय द्वारा इन व्याख्यानों के माध्यम से विद्यार्थियों को भारतीय से सुभारतीय बनाने का संकल्प लिया गया है।
कार्यक्रम का समापन डॉ. मंजू जेठी द्वारा सुभारती परंपरा के अनुसार “आज़ाद हिंद गान” के गायन के साथ हुआ। सफल आयोजन के लिए निदेशिका डॉ. जीवन आशा ने विश्वविद्यालय के संस्कृति विभाग के सचिव श्री विनय सेमवाल एवं सदस्य श्री रमन कृष्ण किमोठी को बधाई दी।
इस अवसर पर विश्वविद्यालय के डीन्स, विभागाध्यक्ष, संस्थान प्रमुख, संकाय सदस्य एवं बड़ी संख्या में विद्यार्थी उपस्थित रहे। व्याख्यान श्रृंखला का उद्देश्य विद्यार्थियों को समग्र शिक्षा देकर उन्हें जिम्मेदार, जागरूक और राष्ट्रनिष्ठ नागरिक के रूप में विकसित करना है।
