देहरादून :
भारतीय समकालीन कला जगत के प्रतिष्ठित चित्रकार एवं कला शिक्षाविद् श्री संतोष कुमार को उनके दीर्घकालीन, सृजनात्मक एवं प्रेरणादायी योगदान के लिए ‘कला गुरु सम्मान’ से सम्मानित किया गया। यह सम्मान सुरभि आर्ट्स सोसाइटी, हिसार (हरियाणा) द्वारा संस्था के 25 वर्ष पूर्ण होने के उपलक्ष्य में आयोजित रजत जयंती समारोह के अंतर्गत प्रदान किया गया।
सुरभि आर्ट्स सोसाइटी, जो वर्ष 2000 से कला के संरक्षण, संवर्धन एवं नवोदित कलाकारों के मार्गदर्शन हेतु सतत सक्रिय रही है, ने अपनी रजत जयंती के अवसर पर दो दिवसीय चित्रकला कार्यशाला, वरिष्ठ कलाकार सम्मान समारोह एवं कला प्रदर्शनी का सफल आयोजन किया। यह आयोजन 13 एवं 14 दिसंबर 2025 को गुरु जम्भेश्वर विश्वविद्यालय, हिसार के सभागार में संपन्न हुआ।
इस राष्ट्रीय स्तर के कला आयोजन में देशभर से लगभग 150 वरिष्ठ एवं युवा कलाकारों ने सहभागिता की। कार्यक्रम के दौरान वरिष्ठ चित्रकार श्री विजय बिस्वाल , प्रो. डॉ. सुनील विश्वकर्मा (अध्यक्ष, ललित कला अकादमी, उत्तर प्रदेश), श्री विजेंद्र शर्मा (दिल्ली), डॉ. सुनील कुशवाहा (वाराणसी) तथा वरिष्ठ चित्रकार श्री एन.पी. पांडेय (पश्चिम बंगाल) सहित अनेक ख्यातिलब्ध कलाकार उपस्थित रहे। समापन समारोह में 31 प्रतिष्ठित कलाकारों एवं 21 अन्य प्रतिभाशाली कलाकारों को भी सम्मानित किया गया।
श्री संतोष कुमार, जो रास बिहारी बोस सुभारती विश्वविद्यालय, देहरादून से संबद्ध रहे हैं, ने ललित कला के क्षेत्र में अपने सशक्त सृजन और युवाओं के मार्गदर्शन के माध्यम से एक विशिष्ट पहचान बनाई है। उनकी कला सतत साधना और शिक्षण ने अनेक नवोदित कलाकारों को प्रेरित किया है।
इस अवसर पर रास बिहारी बोस सुभारती विश्वविद्यालय, देहरादून के माननीय कुलपति प्रो. डॉ. हिमांशु ऐरन ने श्री संतोष कुमार को बधाई देते हुए कहा—
“प्रोफेसर संतोष कुमार का ‘कला गुरु सम्मान’ से सम्मानित होना विश्वविद्यालय के लिए अत्यंत गर्व का क्षण रहा है। उन्होंने कला को केवल अभिव्यक्ति का माध्यम न मानकर उसे संस्कार, संवेदना और सामाजिक चेतना से जोड़ा।
उनके मार्गदर्शन में अनेक युवा कलाकारों ने अपनी पहचान स्थापित की है। विश्वविद्यालय को उनके योगदान पर गर्व है और हम उनके निरंतर सृजनशील भविष्य की कामना करते हैं।”
सुरभि आर्ट्स सोसाइटी द्वारा प्रदान किया गया ‘कला गुरु सम्मान’ श्री संतोष कुमार की आजीवन कला साधना, शिक्षण और प्रेरणादायी योगदान का सार्थक सम्मान सिद्ध हुआ।
