गौतम बुद्ध चिकित्सा महाविद्यालय एवं डॉ0 के0के0बी0एम0 सुभारती अस्पताल, देहरादून में देशभर के विशेषज्ञों ने साझा किए अनुभव
विजडम इंडिया।
देहरादून। प्रख्यात शिक्षाविद एवं समाजसेवी डॉ. कृष्ण कुमार भटनागर की 99वीं जयंती के अवसर पर गौतम बुद्ध चिकित्सा महाविद्यालय एवं डॉ0 के0के0बी0एम0 सुभारती अस्पताल, झाझरा, देहरादून में राष्ट्रीय स्तर का विशेष नेत्र रोग कॉन्फ्रेंस भव्य रूप से आयोजित किया गया। इस कॉन्फ्रेंस में न केवल उत्तराखंड, बल्कि देश के विभिन्न राज्यों से आए विशेषज्ञ चिकित्सकों ने भाग लिया और नेत्र विज्ञान से संबंधित नवीन शोध, अनुभव एवं तकनीकों पर विस्तार से विचार-विमर्श किया।

कार्यक्रम का आरंभ सुभारती समूह के संस्थापक डॉ. अतुल कृष्ण के संयोजन में दीप प्रज्वलन के साथ हुआ। मंच पर उपस्थित मुख्य अतिथि जनपद देहरादून के मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ. मनोज कुमार शर्मा, विशेष अतिथि उत्तराखंड शासन के संयुक्त निदेशक डॉ. जे0एन0एस0 नेगी तथा रास बिहारी बोस सुभारती विश्वविद्यालय के कुलपति प्रोफेसर डॉ. हिमांशु एरन, प्राचार्य डॉ. देश दीपक, अधीक्षक डॉ. (ले. कर्नल) राहुल शुक्ला, सहायक परियोजना निदेशक डॉ. लोकेश त्यागी, उप-प्रधानाचार्या डॉ. रूपा हंसपाल, प्रचार एवं मार्केटिंग प्रमुख डॉ. प्रशांत कुमार भटनागर सहित अनेक गणमान्य अतिथियों का स्वागत किया गया।

सुभारती समूह के संस्थापक डॉ. अतुल कृष्ण ने अपने उद्बोधन में बताया कि
उनके पिता डॉ. कृष्ण कुमार भटनागर शिक्षा, समाज सेवा और स्वास्थ्य क्षेत्र में अनुकरणीय योगदान देने वाले व्यक्तित्व थे। डॉक्टर कृष्ण कुमार भटनागर का जन्म 16 अगस्त 1925 को हुआ था, वो एक शिक्षक थे बाद में वह मसूरी के नगर पालिका (पोस्ट ग्रेज्यूट) महाविद्यालय के प्रधानाचार्य बने। उनकी इच्छा थी कि उत्तराखंड में शिक्षा की अलख जगाई जाए। ताकि यहाँ का जन जन शिक्षित हो सके । पिता की इसी इच्छा को लक्ष्य बना कर डॉक्टर अतुल कृष्ण ने उनकी स्मृति में ही देहरादून में रास बिहारी बोस सुभारती विश्वविद्यालय एवं गौतम बुद्ध चिकित्सा महाविद्यालय की स्थापना।

कॉन्फ्रेंस के दौरान विभिन्न सत्रों में विशेषज्ञों ने अपने शोध पत्र प्रस्तुत किए—
मैक्स अस्पताल, पंचशील, दिल्ली से आए वरिष्ठ नेत्र सर्जन डॉ. देवेंद्र सूद ने कोणीय बंद लूकोमा (एंगल क्लोजर ग्लूकोमा) विषय पर कहा कि यदि समय पर निदान न हो तो यह स्थायी अंधता का कारण बन सकता है।
डॉ. रेणु दसमाना ने समय से पहले जन्मे शिशुओं में रेटिना संबंधी विकारों और उसके आधुनिक उपचार पर विस्तृत जानकारी दी।
डॉ. तृप्ति चौधरी ने ऑप्टिक न्यूराइटिस (दृष्टि तंत्रिका की सूजन) एवं पीओएचआईपी (गर्भवती महिलाओं में उच्च रक्तचाप) जैसे गंभीर नेत्र रोगों पर अपने शोध निष्कर्ष साझा किए।
डॉ. मानी गौसिया पोहदियारा ने बैग टू विट्रियस जैसी शल्य प्रक्रिया पर प्रकाश डाला, जिसमें आंख से तरल पदार्थ का संतुलित निकास सुनिश्चित किया जाता है।
इस कॉन्फ्रेंस की विशेषता यह रही कि इसमें नेत्र रोगों के निदान एवं उपचार में कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) की संभावनाओं पर भी विस्तार से चर्चा की गई। विशेषज्ञों ने बताया कि डीप लर्निंग और ट्रांसफर लर्निंग तकनीकों से नेत्र रोगों का प्रारंभिक चरण में पता लगाना और उनका प्रभावी उपचार संभव है।
कार्यक्रम के अंत में सभी प्रतिभागियों को स्मृति-चिन्ह प्रदान कर सम्मानित किया गया। इस अवसर पर डॉ. ललित मोहन सुन्द्रीयाल, डॉ. रितेश श्रीवास्तव, श्री जितेन्द्र त्यागी, श्री रवि मित्तल, श्री आदित्य गौतम, श्री सागर, श्री सचिन कुमार, श्री राहुल राणा सहित विभिन्न विभागों के अध्यक्ष, अधिकारी एवं कर्मचारी मौजूद रहे।
यह सम्मेलन न केवल चिकित्सकों के लिए बल्कि चिकित्सा शिक्षा प्राप्त कर रहे छात्रों के लिए भी अत्यंत ज्ञानवर्धक सिद्ध हुआ। विशेषज्ञों ने कहा कि इस प्रकार के आयोजन नेत्र रोगों के उपचार में नवीनतम तकनीकों के विकास और उपयोग की दिशा में महत्वपूर्ण मील का पत्थर साबित होंगे।
