Uttar Pradesh School: उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने शनिवार को शिक्षा विभाग के कार्यों की समीक्षा की। सीएम योगी ने कहा कि कोई भी सरकारी बेसिक व माध्यमिक स्कूल शिक्षक विहीन नहीं होना चाहिए। उन्होंने कहा कि हर कीमत पर विद्यालयों में शिक्षकों की तैनाती सुनिश्चित की जाए। सरकार के पास धन की कोई कमी नहीं है, हमारा पूरा फोकस गुणवत्तापरक शिक्षा देने पर होना चाहिए। उन्होंने कहा कि सभी आकांक्षात्मक जिलों व विकासखंडों में शिक्षक-छात्र अनुपात बेहतर रहे।

सीएम योगी ने पांच कालिदास मार्ग स्थित अपने सरकारी आवास पर आयोजित बैठक में कहा कि आपरेशन कायाकल्प के तहत 19 पैरामीटर्स को ध्यान में रखकर अंतर विभागीय समन्वय के साथ कार्य किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि सभी परिषदीय विद्यालयों में बालक व बालिकाओं के लिए अलग-अलग शौचालय की व्यवस्था सुनिश्चित की गई है। विद्यालयों में पेयजल, बेहतर क्लासरूम, विद्युत की सुविधा, बाउंड्रीवाल व गेट सहित अच्छे फर्नीचर की व्यवस्था की गई है।

आदित्यनाथ ने कहा कि प्रदेश सरकार कक्षा एक से कक्षा 12 तक की पढ़ाई के लिए मुख्यमंत्री माडल कंपोजिट विद्यालयों का निर्माण करा रही है। 26 जिलों में इसके निर्माण के लिए धनराशि जारी की जा चुकी है। वहीं प्री-प्राइमरी से कक्षा आठ तक की पढ़ाई के लिए मुख्यमंत्री अभ्युदय कंपोजिट विद्यालयों का निर्माण किया जा रहा है। 58 जिलों में इसके लिए धनराशि जारी की जा चुकी है। इन दोनों प्रकार के विद्यालयों में प्ले ग्राउंड और ट्रेनिंग सेंटर खोले जाएं।

मुख्यमंत्री ने कहा कि एक अप्रैल से 15 अप्रैल तक और जुलाई महीने में 15 दिवसीय स्कूल चलो अभियान चलाया जाए। शिक्षकों, ग्राम प्रधानों व ग्राम पंचायत सदस्यों द्वारा मिलकर इस प्रकार की व्यवस्था की जाए कि यह स्कूल चलो अभियान बच्चों को एक उत्सव की भांति लगे। शिक्षक व प्रधानाध्यापक घर-घर जाकर बच्चों को स्कूल आने के लिए प्रेरित करें। कस्तूरबा गांधी आवासीय बालिका विद्यालयों में एक विद्यालय एक खेल नीति को बढ़ावा दिया जाए। अंडर-19 क्रिकेट में यहां की छात्राओं ने प्रदेश का नाम रोशन किया है। ऐसे में यहां अच्छे खेल प्रशिक्षण की व्यवस्था की जाए।

डायट को IIM लखनऊ व बेंगलुरू से जोड़ें

सीएम योगी ने कहा कि 13 जिला शिक्षा एवं प्रशिक्षण संस्थानों (डायट) को सेंटर आफ एक्सीलेंस के रूप में विकसित किया जा रहा है। जिससे डायट एक उत्कृष्ट संसाधन केंद्र के रूप में विकसित होंगे और समावेशी शिक्षा को आगे बढ़ा सकेंगे। यहां रखरखाव की व्यवस्था अच्छी हो और नियमित सफाई हो। जरूरत के अनुसार आउटसोर्सिंग पर कर्मचारियों की तैनाती की जाए। डायट का फर्स्ट इंप्रेशन काफी अच्छा होना चाहिए। इंडियन इंस्टीट्यूट आफ मैनेजमेंट (आइआइएम) लखनऊ व बंगलुरू को यहां के ट्रेनिंग माड्यूल के साथ जोड़ा जाए। ताकि और बेहतर ट्रेनिंग शिक्षकों को मिल सके।

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