होर्मुज में जहाजों पर हमले को लेकर भड़का भारत, UN में कहा- ‘ये बर्दाश्त नहीं’
संयुक्त राष्ट्र में भारत ने कहा है कि समुद्री जहाजों पर हमले बिल्कुल बर्दाश्त नहीं किए जाएंगे. साथ ही समुद्री रास्तों पर बिना रुकावट आवाजाही की आजादी की मांग की है.

संयुक्त राष्ट्र (UN) में भारत ने समुद्री सुरक्षा, जहाजों की आवाजाही की स्वतंत्रता और वैश्विक व्यापार की सुरक्षा को लेकर अपनी बात रखी है. संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में भारत के स्थायी प्रतिनिधि हरीश पर्वतानेनी ने व्यापारिक जहाजों पर हो रहे हमलों की कड़ी निंदा की.
हरीश पर्वतानेनी ने कहा कि दुनियाभर के देशों का व्यापार काफी हद तक समुद्री रास्तों पर निर्भर करता है. इसलिए समुद्र में जहाजों को बिना किसी डर या रुकावट के आने-जाने की पूरी आजादी होनी चाहिए. यदि समुद्र के मुख्य रास्तों पर कोई हमला होता है या रुकावट आती है तो इसका असर केवल किसी एक देश पर नहीं, बल्कि पूरी दुनिया की अर्थव्यवस्था, सामानों की आपूर्ति और विकासशील देशों पर पड़ता है.
नाविकों की जान की सुरक्षा जरुरी
भारत का मानना है कि समुद्र में काम करने वाले नाविकों की जान की सुरक्षा सबसे जरूरी है और इसके लिए सभी देशों को ‘संयुक्त राष्ट्र समुद्री कानून संधि’ (UNCLOS) जैसे अंतरराष्ट्रीय नियमों का पालन करना चाहिए.
नई तकनीक के फायदे और खतरे
भारत ने कहा कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI), सैटेलाइट और नई तकनीकों से समुद्री सुरक्षा मजबूत हो सकती है और जहाजों की निगरानी में मदद मिलती है. इससे समुद्री हादसों में लोगों को बचाना और सुरक्षा बनाए रखना आसान होता है. हालांकि अगर इन तकनीकों का गलत इस्तेमाल हो या जहाजों और बंदरगाहों के डिजिटल सिस्टम पर साइबर हमला हो जाए तो इससे सुरक्षा के बड़े खतरे पैदा हो सकते हैं.
भारत का क्या है विजन
भारत ने अपना विजन साझा करते हुए कहा कि हमारी नीति SAGAR (Security and Growth for All in the Region) यानी क्षेत्र में सभी की सुरक्षा और विकास’ पर आधारित है. भारत चाहता है कि तकनीक का इस्तेमाल इंसानियत की सुरक्षा और अवसरों को बढ़ाने के लिए हो न कि देशों के बीच विवाद या असमानता बढ़ाने के लिए.