दिल्ली समेत 5 राज्यों में SIR को लेकर चुनाव आयोग का बड़ा ऐलान, जानें अब क्या कहा
इलेक्शन कमीशन ने 5 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेश दिल्ली में मतदाता सूची के SIR कार्यक्रम में बड़ा बदलाव किया है. दिल्ली में अब 30 अक्टूबर के बजाय 25 नवंबर तक दावे और आपत्तियां दाखिल की जा सकती हैं.

चुनाव आयोग (ECI) ने गुरुवार को 5 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेश दिल्ली में मतदाता सूची के स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR) के कार्यक्रम में बदलाव किया है. यह बदलाव संबंधित मुख्य निर्वाचन अधिकारियों के अनुरोध पर किया गया है. जिन राज्यों में मतदाता सूची के पुनरीक्षण कार्यक्रम में बदलाव किया गया है, उनमें महाराष्ट्र, आंध्र प्रदेश, हरियाणा, तेलंगाना और नागालैंड शामिल हैं.
न्यूज एजेंसी पीटीआई की रिपोर्ट के मुताबिक चुनाव आयोग ने इन पांचों राज्यों और दिल्ली केंद्र शासित प्रदेश को अलग-अलग पत्र लिखकर समय-सीमा बढ़ाने के बारे में सूचित किया है. महाराष्ट्र में, दावे और आपत्तियां दाखिल करने की समय-सीमा 26 अक्टूबर से बढ़ाकर 13 नवंबर कर दी गई है. इसके अलावा नोटिस का चरण और दावों के निपटारे की प्रक्रिया अब 25 नवंबर तक चलेगी और अंतिम मतदाता सूची 30 नवंबर को प्रकाशित की जाएगी.
दिल्ली में बदला नियम
बता दें कि ड्राफ्ट मतदाता सूची 31 अगस्त को जारी की गई थी और पहले दावों के निपटारे की तारीख 10 नवंबर तय की गई थी. राजधानी दिल्ली में अब 30 अक्टूबर के बजाय 25 नवंबर तक दावे और आपत्तियां दाखिल की जा सकती हैं. दावों के निपटारे की तारीख 30 नवंबर से बढ़ाकर 15 दिसंबर कर दी गई है और अंतिम मतदाता सूची 22 दिसंबर को प्रकाशित की जाएगी.
आंध्र प्रदेश और हरियाणा को लेकर नियम
SIR प्रक्रिया का कार्यक्रम पहले भी कई बार अलग-अलग कारणों से आगे बढ़ाया जा चुका है. नोटिस और समाधान की अवधि अब आंध्र प्रदेश और हरियाणा के लिए 20 नवंबर, नागालैंड के लिए 25 नवंबर और तेलंगाना के लिए 26 नवंबर को समाप्त होगी. ये चारों राज्य 30 नवंबर को अपनी अंतिम मतदाता सूची प्रकाशित करेंगे. चुनाव आयोग द्वारा 14 मई को घोषित SIR के तीसरे चरण में 16 राज्य और तीन केंद्र शासित प्रदेश शामिल हैं.
चुनाव आयोग ने हाल ही में सुप्रीम कोर्ट में अपना पक्ष रखते हुए दावा किया है कि मतदाता सूचियों के पुनरीक्षण से संबंधित सभी प्रमुख फैसले तीनों चुनाव आयुक्तों ने सर्वसम्मति से लिए थे. आयोग ने इस आरोप को भी खारिज किया कि ज्ञानेश कुमार ने दोनों चुनाव आयुक्तों की सहमति के बिना एकतरफा निर्णय लिए.
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