राम ने यादव को मारा, मोहम्मद इकबाल भीख मांगते हैं’, वोटरों के नाम पर बवाल, किसने क्या कहा?
उत्तर प्रदेश विधान परिषद चुनाव की मतदाता सूची में गलत नाम और अजीबोगरीब प्रविष्टियां सामने आने के बाद विवाद खड़ा हो गया है.
उत्तर प्रदेश में विधान परिषद चुनाव की मतदाता सूची में अजीबोगरीब नाम और विवरण सामने आने के बाद विवाद खड़ा हो गया है. कहीं मतदाता का नाम ‘राम ने यादव को मारा’ दर्ज होने का दावा किया जा रहा है, तो कहीं पिता के नाम वाले कॉलम में ‘बी.कॉम’ लिखा मिला. मतदाता सूची की इन कथित गड़बड़ियों को लेकर विपक्षी नेताओं ने चुनाव आयोग पर सवाल उठाए हैं. वहीं, उत्तर प्रदेश के मुख्य निर्वाचन अधिकारी के कार्यालय ने सफाई देते हुए इन्हें सॉफ्टवेयर में नामों के हिंदी रूपांतरण से जुड़ी संभावित त्रुटियां और मानवीय लापरवाही बताया है.
ये विसंगतियां इलाहाबाद-झांसी स्नातक निर्वाचन क्षेत्र की मतदाता सूची में सामने आने की बात कही गई है. शुक्रवार को उत्तर प्रदेश विधान परिषद की 11 सीटों के लिए मतदान के बीच सोशल मीडिया पर कथित गड़बड़ियों की सूची साझा की गई, जिसके बाद चुनाव आयोग की ओर से स्पष्टीकरण जारी किया गया.
सॉफ्टवेयर की गलती से ‘राम ने यादव को मारा’ कैसे बना नाम?
उत्तर प्रदेश के मुख्य निर्वाचन अधिकारी (सीईओ) के आधिकारिक सोशल मीडिया हैंडल से दी गई जानकारी के अनुसार, विधान परिषद चुनाव की मतदाता सूची में पहली बार ऑनलाइन पंजीकरण की सुविधा दी गई थी. आयोग के मुताबिक, कुल 14,81,310 प्रविष्टियों में से 158 ऐसी प्रविष्टियां मिलीं, जिनमें मतदाताओं या उनके संबंधियों के नाम अजीब प्रतीत हो रहे थे.
सीईओ कार्यालय ने बताया कि सॉफ्टवेयर का काम अंग्रेजी में टाइप किए गए नामों को हिंदी में लिप्यंतरित करना था, लेकिन कुछ मामलों में संभावित तकनीकी त्रुटि के कारण नामों का अनुवाद हो गया. उदाहरण देते हुए बताया गया कि यदि किसी मतदाता का नाम ‘रामहित यादव’ है और अंग्रेजी में उसे ‘Ramhit Yadav’ लिखने के बजाय गलती से ‘Ram hit Yadav’ टाइप कर दिया जाए, तो सॉफ्टवेयर उसका अनुवाद ‘राम ने यादव को मारा’ कर सकता है. सीईओ कार्यालय के अनुसार, इस तरह की गलतियों को संपादित कर सुधारने की व्यवस्था थी, लेकिन जहां संबंधित लोगों ने सावधानी नहीं बरती, वहां ऐसी त्रुटियां बनी रह गईं. वहीं, पिता के नाम वाले कॉलम में ‘B.Com’ दर्ज होने को मानवीय भूल या लापरवाही बताया गया.
साकेत गोखले ने चुनाव आयोग पर उठाए सवाल
तृणमूल कांग्रेस के सांसद साकेत गोखले ने मतदाता सूची में सामने आई कथित गड़बड़ियों को लेकर चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए. उन्होंने ‘सॉफ्टवेयर की गलती’ वाले स्पष्टीकरण को बहाना बताते हुए आरोप लगाया कि यह चुनाव में धांधली का मामला है. गोखले ने कहा कि विपक्ष लगातार आरोप लगाता रहा है कि ज्ञानेश कुमार और चुनाव आयोग एसआईआर (विशेष गहन पुनरीक्षण) में अपारदर्शी सॉफ्टवेयर एल्गोरिदम का इस्तेमाल कर चुनावों को प्रभावित कर रहे हैं. उन्होंने यह भी दावा किया कि दोनों चुनाव आयुक्तों ने कैबिनेट सचिव से चुनाव आयोग के उप निर्वाचन आयुक्त मनीष गर्ग की शिकायत की थी, जो सूचना प्रौद्योगिकी विभाग का काम देख रहे थे. गोखले ने इस संदर्भ में आयोग के महानिदेशक आईटी सीमा खन्ना का भी उल्लेख किया.
उन्होंने मुख्य निर्वाचन आयुक्त ज्ञानेश कुमार के तत्काल इस्तीफे की मांग की. साथ ही, चुनाव आयोग से उस सॉफ्टवेयर का सोर्स कोड सार्वजनिक करने की मांग की, जिसका इस्तेमाल मतदाता सूची तैयार करने में किया गया. गोखले ने आरोप लगाया कि इस सॉफ्टवेयर का इस्तेमाल चुनावों में धांधली के लिए किया जा रहा है. हालांकि, ये उनके आरोप हैं; उपलब्ध जानकारी के आधार पर सॉफ्टवेयर की त्रुटियों से चुनाव में धांधली साबित नहीं होती.
श्रीनिवास बी.वी. ने पूछा- ‘सॉफ्टवेयर है कि हिट की दुकान?’
श्रीनिवास बी.वी. ने भी मतदाता सूची में नामों के कथित गलत अनुवाद पर तंज कसा. उन्होंने ‘रामहित यादव’ के नाम का उदाहरण देते हुए सवाल किया कि अंग्रेजी में नाम टाइप करते समय ‘Ramhit Yadav’ की जगह ‘Ram hit Yadav’ लिख देने पर उसका अनुवाद ‘राम ने यादव को मारा’ कैसे हो गया. उन्होंने इस गड़बड़ी पर व्यंग्य करते हुए पूछा, ‘सॉफ्टवेयर है कि हिट की दुकान?’
संजय सिंह ने पूछा- क्या पिता का नाम ‘बी.कॉम’ हो सकता है?
आम आदमी पार्टी के सांसद संजय सिंह ने भी मतदाता सूची में सामने आई कथित विसंगतियों को लेकर सवाल उठाए. उन्होंने पूछा कि क्या किसी व्यक्ति के पिता का नाम ‘बी.कॉम’ हो सकता है? क्या किसी मतदाता का नाम ‘राम ने यादव को मारा’ हो सकता है? उन्होंने सवाल किया कि उत्तर प्रदेश की मतदाता सूची में इस तरह की प्रविष्टियां कैसे दर्ज हो गईं.
मनोज काका ने भी मतदाता सूची की गड़बड़ियों पर जताई नाराजगी
आम आदमी पार्टी से जुड़े मनोज काका ने भी मतदाता सूची में दर्ज एक कथित प्रविष्टि को लेकर सवाल उठाए. उन्होंने सोशल मीडिया पर दावा किया कि एक मतदाता का नाम ‘अफजल अहमद’ है, जबकि पिता के नाम वाले कॉलम में ‘मोहम्मद इकबाल भीख मांगते हैं’ लिखा हुआ है. मनोज काका ने चुनाव आयोग से पूछा कि क्या इस तरह मतदाता सूची का शुद्धिकरण किया जाता है. उन्होंने कहा कि उत्तर प्रदेश में स्नातक और शिक्षक विधान परिषद सीटों के चुनाव के दौरान मतदाता सूची में अनेक खामियां सामने आ रही हैं. उन्होंने सवाल किया कि इन गलतियों के लिए जिम्मेदार कौन है और निर्वाचन अधिकारियों की जवाबदेही क्या होगी.
चुनाव आयोग ने अधिकारियों से मांगा स्पष्टीकरण
उत्तर प्रदेश के मुख्य निर्वाचन अधिकारी के कार्यालय ने स्पष्ट किया कि मतदाता सूची में नामों और उनके संबंधियों के विवरण से जुड़ी 158 प्रविष्टियां अजीब प्रतीत हो रही थीं. कार्यालय के मुताबिक, ऑनलाइन पंजीकरण की नई व्यवस्था में अंग्रेजी में दर्ज नामों को हिंदी में लिप्यंतरित करने के दौरान कुछ गलतियां हुईं. कुछ मामलों में मानवीय भूल या लापरवाही के कारण भी गलत प्रविष्टियां बनी रह गईं.
सीईओ कार्यालय ने बताया कि मंडलायुक्त संबंधित मतदाता सूची के निर्वाचन रजिस्ट्रेशन अधिकारी (ईआरओ) हैं, जबकि संबंधित जिले के जिलाधिकारी सहायक निर्वाचन रजिस्ट्रेशन अधिकारी (एईआरओ) हैं. मतदाता सूची को सभी त्रुटियों से मुक्त रखना इन अधिकारियों की जिम्मेदारी है. इस मामले में उनसे स्पष्टीकरण मांगा गया है. कार्यालय ने यह भी कहा कि इन गलतियों के कारण मतदाताओं को किसी तरह की परेशानी न हो, इसके लिए जिला अधिकारियों को निर्देश दिए गए हैं.
