केंद्र सरकार ने मॉनसून सत्र के दौरान जारी हंगामे के बीच फॉरेन कंट्रीब्यूशन रेगुलेशन एक्ट (FCRA Bill, 2026) को विस्तृत समीक्षा के लिए संयुक्त संसदीय समिति (JPC) के पास भेजने का फैसला किया है। इसके लिए संसद के द्वारा एक प्रस्ताव पास किया गया है। लोकसभा में इस बिल को जेपीसी में भेजने के लिए नित्यानंद राय ने प्रस्ताव रखा, जिसके बाद तीखी नोकझोंक देखी गई। अखिलेश यादव ने कहा कि सरकार FCRA ला रही है, विपक्ष इसके खिलाफ है। वहीं, सरकार की ओर से संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने बताया कि यह अल्पसंख्यकों के खिलाफ नहीं है।
आपको बता दें कि प्रस्ताव के तहत समिति में शामिल होने वाले 21 लोकसभा सांसदों का चयन लोकसभा अध्यक्ष के द्वारा, जबकि राज्यसभा के 10 सांसदों का चयन राज्यसभा के सभापति द्वारा किया जाएगा। जेपीसी की आधिकारिक बैठक आयोजित करने के लिए न्यूनतम कोरम कुल सदस्यों की संख्या 31 का लगभग एक-तिहाई (1/3) निर्धारित किया गया है।
प्रस्ताव के माध्यम से लोकसभा ने राज्यसभा से इस जेपीसी में शामिल होने और अपने 10 सदस्यों के नामों की औपचारिक सूचना देने की सिफारिश की है।
25 मार्च 2026 को लोकसभा में पेश किया गया FCRA संशोधन विधेयक 2026 विदेशी धन प्राप्त करने वाले गैर-सरकारी संगठनों यानी की एनजीओ धार्मिक और सामाजिक संस्थाओं के साथ-साथ ट्रस्टों के नियमन से जुड़ा है। इस विधेयक में यह प्रमुख प्रावधान शामिल है कि यदि किसी संगठन का एफसीआरए रजिस्ट्रेशन रद्द होता है, समाप्त होता है या सरेंडर किया जाता है तो विदेशी धन से तैयार उसकी संपत्तियों को एक प्राधिकरण के अधीन कर दिया जाएगा। इसके अलावा, नियमों के उल्लंघन पर अधिकतम सजा की अवधि को 5 वर्ष से घटाकर 1 वर्ष करने का भी प्रस्ताव है।
विपक्ष के साथ-साथ कई धार्मिक संस्थाओं ने इन प्रावधानों को अत्यधिक कड़ा बताते हुए कड़ी आपत्ति जताई थी। उनका तर्क है कि इससे कार्यपालिका को मनमाने अधिकार मिल जाएंगे। व्यापक विरोध और विभिन्न प्रतिनिधिमंडलों द्वारा जताई गई चिंताओं को देखते हुए सरकार ने इसे 31 सदस्यीय संयुक्त संसदीय समिति के पास भेजने का निर्णय लिया है।
