उनके निधन से पैतृक गांव बिहारीपुर में शोक है। गांव और मोहल्ले के लोगों का कहना है कि छह साल पहले अनुराग परिवार के साथ गांव में आए थे, वह काफी मिलनसार थे। गांव के ही अनिल हवलदार का कहना है कि 10 दिन पहले उन्होंने अनुराग से फोन पर बातचीत की थी, जिसमें उन्होंने जनपद के लिए कोई अच्छा कार्य करने की बात कही थी।