अयोध्या राम मंदिर में दान की गणना के कार्यों में बड़ा बदलाव किया गया है। गणना प्रभारी को हटाने के साथ ही डेढ़ महीने के भीतर ही गणना कर्मचारियों की वर्दी का रंग भी बदलकर भगवा कर दिया गया है। पहले कर्मचारी नीले रंग की ड्रेस पहनते थे। दो दिनों से सभी कर्मचारी बदले रंग की ड्रेस में काम कर रहे हैं। गणना प्रभारी को भी हटाकर दूसरे को दायित्व भी सौंप दिया गया है। इसके साथ ही नई गाइडलाइन भी जारी की गई है। अब जल्द ही कुछ और नए फेरबदल की गुंजाइश बढ़ गई है।
चढ़ावा चोरी पकड़े जाने के पहले तक सभी गणना कर्मचारी मनपसंद कपड़े पहन कर आते थे। कुछ ने इसका लाभ उठाकर चोरी की वारदात को अंजाम दिया। एसआईटी और पुलिस की जांच में खुलासा हुआ कि गणना में लगे कर्मचारी मोजे और पैंट की जेब में रुपये चुरा कर ले जाते थे। खुलासे के बाद गणनाकर्मियों के लिए ड्रेस कोड लागू कर नीली वर्दी लागू कर दी गई। इसमें शर्ट-पैंट दोनों आपस में जुड़े और जेब भी नहीं थी।
नई व्यवस्था कुछ दिन तक चली, मगर कर्मचारियों ने शिकायत करनी शुरू की कि कपड़ा मोटा है, जिससे बैठने में काफी दिक्कत हो रही है। ऐसे में परेशानियों को समझते हुए उन्हें अब पतले सूती कपड़े वाली भगवा ड्रेस पहनाई जा रही है। कर्मचारियों को मोजा आदि पहनने से भी मना किया गया है।
सूत्र बताते हैं कि पूर्व और वर्तमान गणना कर्मियों को राम जन्मभूमि परिसर में शनिवार को बुलाकर हिदायत देते नई गाइडलाइन समझाई गई। बैंक अधिकारी की मौजूदगी में कुछ दिशा-निर्देश दिए गए हैं। प्रमुखता से बताया गया है कि एसआईटी की जांच रिपोर्ट बन चुकी है। सार्वजनिक होने के बाद किसी भी प्रकार की टीका टिप्पणी कोई नहीं करेगा। शिकायत मिलने पर सख्त कार्रवाई की जाएगी।
निर्देश का आशय यह है कि एसआईटी रिपोर्ट की समीक्षा बाहर कोई भी कर्मचारी नही करेगा। इस्तीफा दे चुके कर्मचारियों को आश्वासन दिया गया है कि उन्हें बकाया भुगतान नियमानुसार कर दिया जाएगा और आने वाले दिनों में भर्ती के दौरान वरीयता भी दी जाएगी। सूत्र बताते हैं कि सोमवार को भी मात्र 12 कर्मचारी ही गणना में जुटे रहे।
राम मंदिर चढ़ावा चोरी प्रकरण की जांच के बीच अब नया पहलू सामने आया है। पुलिस सूत्रों के अनुसार, एक आरोपी से पूछताछ के दौरान कथित ‘क्लोन चेक’ को लेकर भी जानकारी जुटाई गई है। हालांकि किसी पुलिस अफसर ने इसकी पुष्टि नहीं कि, यहां तक कहा कि यह हमारे जांच के दायरे के बाहर की बात है।
सूत्रों का दावा है कि जांच एजेंसियां इस बात की पड़ताल कर रही हैं कि कहीं श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के तीन बैंक खातों में से किसी एक खाते से क्लोन चेक के माध्यम से धन निकालने की कोशिश या जालसाजी तो नहीं की गई। जांच में क्लोन चेक के जरिए वित्तीय अनियमितता की पुष्टि होती है, तो यह मामला केवल चढ़ावा चोरी तक सीमित न रहकर बैंकिंग धोखाधड़ी और वित्तीय सुरक्षा में सेंध तक पहुंच सकता है। ऐसे में जांच का दायरा और भी व्यापक हो सकता है।
राम मंदिर ट्रस्ट पहले भी क्लोन चेक धोखाधड़ी का शिकार हो चुका है। एक सितंबर 2020 को क्लोन चेक के जरिए 2.50 लाख निकाले गए थे। आठ सितंबर 2020 को इसी तरीके से 3.50 लाख और निकाल लिए गए। इसके बाद 9.86 लाख का तीसरा फर्जी चेक बैंक में लगाया गया, मगर बैंक की ओर से पुष्टि के लिए तत्कालीन महासचिव चंपत राय से संपर्क करने पर धोखाधड़ी का खुलासा हो गया।
सूचना मिलने के बाद पुलिस ने जांच शुरू की और बाद में भारतीय स्टेट बैंक के खाते से निकाली गई 6 लाख की पूरी राशि ट्रस्ट के खाते में वापस जमा कर दी गई। घटना के बाद ट्रस्ट ने सुरक्षा बढ़ाते हुए चेक की बजाय आरटीजीएस सहित अन्य सुरक्षित डिजिटल भुगतान प्रणाली को प्राथमिकता देने का निर्णय लिया था।
