भगवान शिव की पवित्र गुफा और हर साल स्वयं प्रकट होने वाले बाबा बर्फानी (प्राकृतिक बर्फ के शिवलिंग) के दर्शन करने के लिए भक्तों की जबरदस्त भीड़ उमड़ रही है। यह यात्रा 3 जुलाई को शुरू हुई थी। 6 दिन के बाद ही भक्तों में निराशा देखी जा रही है। इसकी बड़ी वजह है कि यात्रा शुरू होने के बाद महज पांच दिन में ही शिवलिंग लगभग पिघल गया है। कई लोगों का कहना है कि लिंगम की ऊंचाई एक फीट बची है। वहीं यात्रा से वापस आने वाले कई यात्रियों ने कहा कि अब लिंगम पिघल चुका है। शिवलिंग इतनी तेजी से पिघला है कि दर्शन करने वाले लोग इसका अनुभव कर सकते थे। वहीं इतनी जल्दी शिवलिंग के पिघलने की वजह से लोग बेहद चिंतित हैं। इसके पीछे कई वजहें बताई जा रही हैं।

अमरनाथ की यात्रा 57 दिन तक चलनी है। वहीं पांच दिन में ही लिंगम के पिघलने की वजह से आने वाले दिनों में लोगों को दर्शन ही नहीं हो पाएंगे। इंडिया टुडे की रिपोर्ट के मुताबिक पीडीएफ नेता इल्तिजा मुफ्ती ने कहा कि पवित्र गुफा पर जलवायु परिवर्तन का असर पड़ रहा है। इसके अलावा गुफा के आसपास मानवीय गतिविधियां बढ़ने और बड़ी संख्या में लोगों के पहुंचने की वजह से यहां के तापमान में भी परिवर्तन हो रहा है जिसकी वजह से शिवलिंग तेजी से पिघल जाता है। उन्होंने कहा कि सुप्रीम कोर्ट ने यात्रियों की सीमा निर्धारित की थी जिसका ध्यान देना चाहिए। एक दिन में 10 हजार से ज्यादा यात्रियों को दर्शन की अनुमति नहीं देनी चाहिए।
बाबा बर्फानी का लिंगम पिघलने को लेकर बहस कई सालों से चल रही है। इससे पहले भी लिंग के पिघलने के समय को लेकर चिंता जताई गई है। बाबा बर्फानी की गुफा की ऊंचाई समुद्र तल से 3,888 मीटर है। जम्मू-कश्मीर के अनंतनाग में दुर्गम पहाड़ियों के बीच शिवलिंग का स्वतः निर्माण होता है। कई सदियों से यह भक्तों की आस्था का केंद्र रहा है। हालांकि दुर्गम पहाड़ी रास्तों की वजह से पहले ज्यादा लोग यहां नहीं आते थे। कोविड के दौरान यात्रियों की संख्या में काफी कमी आई। इसके बाद बीते साल पहलगाम में हुए आतंकी हमले के के बाद भी यात्रा नहीं हो पाई। इस बार यात्रा शुरू होते ही भक्तों का सैलाब उमड़ पड़ा।
यहां पहुंचने के लिए दो रास्ते हैं। एक है पहलगाम होकर 48 किलोमीटर का रास्ता। यह रास्ता थोड़ा आसान है। वहीं दूसरा रास्ता बलटाल वाला है जो कि केवल 14 किलोमीटर का है लेकिन यह रास्ता दुर्गम और पथरीला है। आंकड़ों के मुताबिक यात्रा के पहले चार दिन में ही करीब 93 हजार लोगों ने बाबा बर्फानी के दर्शन किए। 5 जुलाई को करीब 32 हजार लोगों ने दर्शन किए। यात्रा के दूसरे दिन इतनी बड़ी संख्या में लोग पहुंचे कि पहले कभी नहीं पहुंचे थे।
बड़ी संख्या में गैर पंजीकृत यात्रियों के पहुंचने से प्रशासन भी चिंतित है। ऐसे में सुरक्षा और व्यवस्था दोनों के लिए चुनौती खड़ी हो गई है। यात्रियों के लिए हेल्थ सर्टिफिकेट और RFID रजिस्ट्रेशन जरूरी होता है। उपराज्यपाल मनोज सिन्हा ने भी लोगों से अपील की है कि बिना रजिस्ट्रेशन के कोई भी दर्शन करने ना आए। वहीं बोर्ड ने फैसला किया है कि एक दिन में 10 हजार यात्रियों को ही दर्शन करवालया जाएगा।
श्रीनगर के आंत्रप्रेन्योर विनीत तौल ने कहा कि पहली बार इतनी जल्दी लिंगम पिघल गया है। ऐसा पहले कभी नहीं हुआ है। उन्होंने कहा कि गुफा के पास प्रस्तावित रोपवे और भी खतरनाक साबित हो सकता है। इससे यहां की इकोलॉजी डिस्टर्ब हो जाएगी। जानकारों का कहना है कि बदलते मौसम की वजह से भी शिवलिंग जल्दी पिघल रहा है। पहले लोग 40 से 45 दिन बाबा बर्फानी के दर्शन किया करते थे। आज यह समय केवल सात दिन रह गया है। बता दें कि शिवलिंग का बनना और पिघलना यहां बर्फबारी, गुफा के तापमान, आर्द्रता और मौसमी गतिविधियों पर निर्भर करता है।
वैज्ञानिकों का कहना है कि हिमालय का तेजी से गर्म होना भी इसकी बड़ी वजह है। पहाड़ों का औसत तापमान बढ़ रहा है। ऐसे में ग्लेशियर तेजी से पिघल रहे हैं। इसीलिए शिवलिंग की ऊंचाई और इसके बने रहने की अवधि में भी परिवर्तन हो रहा है। 2018 में यह शिवलिंग 29 दिन में पिघळा था। वहीं 2020 में यह 38 दिनों तक था। कोविड की वजह से यहां कोई भीड़ नहीं थी। 2022 में 28 दिन तो वहीं 2024 में मात्र एक सप्ताह ही शिवलिंग के दर्शन मिले थे।
पिछले दो दशकों में अमरनाथ के रास्ते में बड़े परिवर्नत हुए हैं। अब गुफा के पास ही लंगर चल रहे हैं। यहं बिजली और सोलर लाइटिंग की सुविधा है। बड़ी मशीनरी इंस्टॉल कर दी गई है। इसके अलावा केंद्र सरकार ने रेलवे प्रोजेक्ट भी अप्रूव कर दिया है। शेषनाग से पंचतरणी तक सुरंग भी प्रस्तावित है। ऐसे में यात्रा आसान हो गई है।
