अयोध्या में राम मंदिर चढ़ावा चोरी को बहुजन समाज पार्टी (बसपा) की अध्यक्ष मायावती ने बेहद गंभीर और चिंता वाला मामला बताया है। इसके साथ ही आरोपितों की कतई नहीं बख्शने की बात कही है। इसके साथ ही यह भी अपील की है कि इस मामले का राजनीतिकरण नहीं होना चाहिए। देश के दूसरे मंदिरों की व्यवस्था से सीख लेने की भी नसीहत दी है। यह भी कहा कि धर्म का राजनीतिकरण और राजनीति का अंध धर्मीकरण नहीं होना चाहिए। राम मंदिर चढ़ावा चोरी के मामले में मायावती का पहली बार बयान सामने आया है।

बसपा प्रमुख ने सोशल मीडिया प्लेटफार्म एक्स पर लिखा कि अयोध्या में श्रीराम मन्दिर से चढ़ावे की हुई चोरी, ग़बन व हेराफेरी ख़बरें अति-गम्भीर और चिन्तनीय हैं। इस गबन और चोरी के मामले में लिप्त लोग क़तई भी बख़्शे नहीं जाने चाहिये। इसके साथ ही इस मामले का राजनीतिकरण करना भी ठीक नहीं है।

मायावती ने कहा कि इसके साथ ही अब यहां मन्दिर में श्रद्धा के चढ़ावे आदि में आगे कोई भी शिकायत ना आये, इसके लिए देश के दूसरे विख्यात व प्रसिद्ध मन्दिरों में चढ़ावे के हिसाब-किताब के लिए जो व्यवस्था है उनका अनुशरण अयोध्या में भी होना चाहिए। यह भी कहा कि पूरा मामला जल्द ही सुलझाना भी चाहिये।

मायावती ने राजनीतिक दलों को नसीहत देते हुए यह भी कहा कि देश में राजनीति का अपराधीकरण और अपराध का राजनीतिकरण नहीं होना चाहिए। धर्म का राजनीतिकरण और राजनीति का अंध धर्मीकरण भी नहीं होना चाहिए।

गौरतलब है कि समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादव ने सात जून को सबसे पहले राम मंदिर में चंदा चोरी का मामला उठाया था। इसके बाद राम मंदिर ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय सामने आए और अखिलेश के बयान का अपने ही अंदाज में खंडन कर दिया था। इसके बाद भी अखिलेश यादव के हमले जारी रहे। कांग्रेस और आम आदमी पार्टी ने भी चंदा चोरी का मामला उठाया। अयोध्या से राम भक्तों और राम मंदिर आंदोलन में शामिल रहे कार्यकर्ताओं ने भी जब मामले को उठाना शुरू किया तो मंदिर ट्रस्ट पर चौतरफा दबाव आने लगा।

ट्रस्ट की अपील पर सीएम योगी ने मामले की जांच के लिए एसआईटी का गठन कर दिया। एसआईटी ने प्रारंभिक जांच रिपोर्ट सौंपी तो साफ हो गया कि चढ़ावा की चोरी हो रही थी। ऐसे में तत्काल एफआईआर दर्ज कर आठ लोगों को गिरफ्तार किया गया। इन लोगों के पास से 80 लाख रुपए भी बरामद कर लिए गए। पुलिस का ऐक्शन तेज हुए तो चंपत राय और उनके सहयोगी अनिल मिश्रा ने ट्रस्ट से इस्तीफा दे दिया। मामले को लेकर अब अयोध्या के वकील भी मुखर हो गए हैं। चंपत राय, अनिल मिश्रा औऱ विनोद राव के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। आरोपियों की पैरवी नहीं करने का फैसला लिया है। इस बीच मंगलवार को मायावती का बयान सामने आया है।

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