देहरादून, 25 जून। रास बिहारी बोस सुभारती विश्वविद्यालय, देहरादून ने आधुनिक, शोध-आधारित एवं कौशलोन्मुख शिक्षा को बढ़ावा देने की अपनी प्रतिबद्धता को एक बार फिर सशक्त रूप से प्रदर्शित करते हुए उत्तराखण्ड विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी परिषद (यूकॉस्ट) तथा सीआरआईएस डीएनए लैब्स के सहयोग से “माँ धरा नमन कार्यक्रम” के अंतर्गत “वाटर क्वालिटी एनालिसिस एंड स्किल डेवलपमेंट” विषय पर एक दिवसीय राष्ट्रीय कार्यशाला का सफल आयोजन किया। इस कार्यशाला में देशभर से वैज्ञानिकों, शिक्षाविदों, शोधार्थियों, विद्यार्थियों एवं पर्यावरण विशेषज्ञों ने सहभागिता कर जल गुणवत्ता विश्लेषण, जल संरक्षण तथा वैज्ञानिक अनुसंधान के नवीन आयामों पर विचार-विमर्श किया

विश्वविद्यालय द्वारा आयोजित इस राष्ट्रीय कार्यशाला का उद्देश्य विद्यार्थियों को केवल सैद्धांतिक ज्ञान तक सीमित न रखकर उन्हें अत्याधुनिक प्रयोगशाला तकनीकों, वैज्ञानिक परीक्षण विधियों तथा उद्योग एवं अनुसंधान आधारित व्यावहारिक प्रशिक्षण से जोड़ना था। इसी सोच के अनुरूप कार्यशाला में जल गुणवत्ता परीक्षण की आधुनिक तकनीकों का लाइव डेमो, प्रयोगशाला प्रशिक्षण तथा फील्ड आधारित विश्लेषण भी कराया गया, जिससे प्रतिभागियों को प्रत्यक्ष अनुभव प्राप्त हुआ।

कार्यक्रम का संयोजन डॉ. नरोत्तम शर्मा, एसोसिएट प्रोफेसर एवं रिसर्च कोऑर्डिनेटर, फैकल्टी ऑफ हेल्थ केयर एंड एलाइड साइंसेज़, रास बिहारी बोस सुभारती विश्वविद्यालय तथा डॉ. अंकिता सिंह, डायरेक्टर, जूनियर साइंटिस्ट एवं क्वालिटी कंट्रोल मैनेजर ने किया। उनके नेतृत्व में आयोजित इस कार्यशाला में 20 राज्यों से आए 50 से अधिक प्रतिभागियों ने उत्साहपूर्वक भाग लिया। प्रतिभागियों में एमएमडीयू अंबाला, उत्तरांचल विश्वविद्यालय, सीजीसी यूनिवर्सिटी मोहाली, जीएलए यूनिवर्सिटी मथुरा सहित अनेक प्रतिष्ठित संस्थानों के विद्यार्थी एवं शोधार्थी शामिल रहे।

तकनीकी सत्रों में डॉ. भावतोष शर्मा ने जल संरक्षण, वैज्ञानिक जल प्रबंधन एवं पर्यावरणीय उत्तरदायित्व पर व्याख्यान देते हुए कहा कि भविष्य की जल सुरक्षा वैज्ञानिक दृष्टिकोण, जन-जागरूकता तथा सतत विकास पर निर्भर करती है। उन्होंने युवाओं से जल संसाधनों के संरक्षण में सक्रिय भूमिका निभाने का आह्वान किया।
कार्यक्रम में रीजनल साइंस सेंटर के समन्वयक डॉ. नवीन चंद जोशी ने मुख्य अतिथि के रूप में सहभागिता करते हुए विश्वविद्यालय की इस पहल की सराहना की। उन्होंने कहा कि इस प्रकार के कौशल-आधारित प्रशिक्षण कार्यक्रम नई शिक्षा नीति के उद्देश्यों को साकार करने के साथ-साथ विद्यार्थियों में वैज्ञानिक सोच एवं अनुसंधान संस्कृति को भी सुदृढ़ करते हैं।

समापन सत्र की अध्यक्षता यूकॉस्ट के महानिदेशक एवं कार्यक्रम के मुख्य अतिथि प्रो. दुर्गेश पंत एवं संयुक्त निदेशक डॉ. डी.पी. उनियाल ने की। उन्होंने सफल आयोजन के लिए रास बिहारी बोस सुभारती विश्वविद्यालय, सीआरआईएस डीएनए लैब्स एवं आयोजन टीम को बधाई देते हुए कहा कि जल संरक्षण जैसी वैश्विक चुनौती से निपटने के लिए वैज्ञानिक अनुसंधान, तकनीकी नवाचार और कौशल विकास अत्यंत आवश्यक हैं। इस अवसर पर प्रतिभागियों को प्रमाण-पत्र भी वितरित किए गए।

कार्यशाला का समापन धन्यवाद ज्ञापन के साथ हुआ। इस अवसर पर रास बिहारी बोस सुभारती विश्वविद्यालय ने पुनः यह संदेश दिया कि विश्वविद्यालय आधुनिक शिक्षा, अनुसंधान, नवाचार, प्रयोगात्मक अधिगम तथा समाजोपयोगी वैज्ञानिक गतिविधियों के माध्यम से विद्यार्थियों को वैश्विक चुनौतियों के अनुरूप तैयार करने के लिए निरंतर प्रतिबद्ध है। यही दृष्टिकोण विश्वविद्यालय को उच्च शिक्षा के क्षेत्र में एक अग्रणी एवं नवाचारोन्मुख संस्थान के रूप में स्थापित कर रहा है।
