लोकप्रिय कथावाचक देवकीनंदन ठाकुर ने अयोध्या राम मंदिर के प्रबंधन से अफसरों को हटाकर उसकी व्यवस्था सरकार की पसंद के एक शंकराचार्य की अगुवाई में धर्मज्ञ लोगों के सनातन बोर्ड के हवाले करने की मांग की है। राम मंदिर से चढ़ावा की चोरी के आरोपों को लेकर देवकीनंदन ठाकुर ने कहा कि अगर मंदिर का संचालन धर्मज्ञ लोगों के हाथों में होता तो कोई चोरी नहीं होती, क्योंकि उन्हें पता होता कि जो मंदिर का धन खाएगा, वो 60 हजार वर्षों तक मल का कीड़ा बनेगा। उन्होंने इस बात पर खेद जताया कि राम मंदिर बने अभी कुछ ही साल हुए हैं और इस तरह का विवाद पैदा हो गया है।

देवकीनंदन ठाकुर ने मीडिया से कहा- ‘हमें भगवान राम का मंदिर बनाए गिने-चुने कुछ दिन हुए हैं और हम इन विषयों में पड़ गए हैं। हम कहते थे कि सनातन बोर्ड बनाओ। आप मंदिर का अधिकारी सरकारी अधिकारियों को बना रहे हैं, वो ठीक नहीं है। ऐसे धर्मज्ञ लोग, जो जानते हों इस बात को कि मंदिर का धन हरण करने वाला 60 हजार वर्ष तक मल का कीड़ा बनेगा। ये शास्त्रों की बात है। जिसे ज्ञान होगा कि जो मंदिर का धन खाएगा, वो 60 हजार वर्ष तक मल का कीड़ा बनेगा, वो एक रुपया भी लेगा, खाएगा। जिसे ज्ञान नहीं होगा, उसके लिए पैसा है, चाहे वो मंदिर पर चढ़े या चोरी से आए, चाहे कैसे भी आए। जो इस ज्ञान को जानेगा, वो तो कभी हाथ नहीं लगाएगा।’

देवकीनंदन ठाकुर ने राम मंदिर को सनानत बोर्ड के अंदर लाने की वकालत करते हुए कहा- ‘हम अभी भी कह रहे हैं कि सनातन बोर्ड बने और धर्म के मर्मज्ञ लोगों के हाथों में धर्म और सनातन की व्यवस्था होनी चाहिए। अधिकारी वगैरह की व्यवस्था हमारे धर्म से संबंधित नहीं है। और किसी धर्म में तो अधिकारियों का हस्तक्षेप नहीं है। हमारे धर्म में हस्तक्षेप क्यों होगा। हम अभी भी सीएम योगी से प्रार्थना करेंगे कि राम मंदिर से ही इसकी शुरुआत हो जाए। सनातन बोर्ड बने। चार शंकराचार्य में जो एक आपको प्रिय हों, जिनके प्रति आपकी निष्ठा हो, उन शंकराचार्य को सनातन बोर्ड का अध्यक्ष बनाकर सनातन प्रगति को आगे बढ़ाने का काम करना चाहिए।’

कथावाचक ठाकुर ने कहा कि जिसने भी चोरी की है, वह अपनी गलती माने, उस धन को रामजी को वापस करे। उन्होंने कहा कि जिसने भी चोरी की है, उसे वहां से तुरंत हटाना चाहिए और धन बरामद करके रामजी को वापस कर देना चाहिए, यही न्याय है।

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