ईरान के शीर्ष राजनयिक ने मंगलवार को कहा कि अमेरिका के साथ युद्ध खत्म करने वाले समझौते के तहत इजरायल को लेबनान से भी हटना होगा। ऐसे में अब उस समझौते को लेकर सवाल उठने लगे हैं जो अभी तक सार्वजनिक नहीं किया गया है और क्या इस शर्त पर असहमति हुई तो संघर्ष लंबा खिंच सकता है।
ईरान के सरकारी टेलीविजन पर प्रसारित बयानों में विदेश मंत्री अब्बास अरागची ने दूसरे देशों के राजनयिकों से कहा कि दक्षिणी लेबनान पर इजरायल का कब्जा जारी रहना अमेरिका और ईरान के बीच हुए समझौते (मेमोरेंडम ऑफ अंडरस्टैंडिंग) का उल्लंघन होगा।
अरागची ने आगे कहा कि लेबनान पर इजरायल के और हमले हमारे लिए समझौते का उल्लंघन माने जाएंगे। हालांकि अमेरिका ने यह नहीं बताया है कि क्या लेबनान इस अंतिम समझौते का हिस्सा था। लेकिन अरागची की बात युद्ध खत्म करने के उस समझौते के बारे में इजरायली अधिकारियों के बयानों से मेल नहीं खाती, जिसकी शुरुआत 28 फरवरी को अमेरिका और इजरायल के संयुक्त हवाई हमलों से हुई थी।
यह अस्पष्टता पिछली बातचीत के दौरान हुई घटनाओं जैसी ही है, जिसमें अप्रैल में हुआ अस्थायी युद्धविराम भी शामिल है। उस समझौते से व्यापक शांति या होर्मुज स्ट्रेट को फिर से खोलने का रास्ता नहीं बन पाया, क्योंकि अमेरिका और ईरान ने अलग-अलग रूपरेखाएं घोषित की थीं।
इस अंतर से पता चलता है कि शुक्रवार को जिनेवा में होने वाले औपचारिक हस्ताक्षर से पहले समझौते का कितना हिस्सा अभी भी अनसुलझा है।
