पीएम मोदी की आम जनता से पेट्रोल-डीजल बचाने, सोना नहीं खरीदने की अपील के बाद अब वित्त मंत्रालय ने सभी सरकारी बैंकों, बीमा कंपनियों और वित्तीय संस्थानों को खर्च घटाने के लिए सख्त आदेश दिए हैं। इसका असर स्टेट बैंक ऑफ इंडिया, बैंक ऑफ बड़ौदा, भारतीय जीवन बीमा निगम (LIC) और उनके लाखों कर्मचारियों पर पड़ेगा।
रायटर्स के मुताबिक वित्तीय सेवा विभाग के आदेश के मुताबिक, सभी बैठकें, समीक्षाएं और सलाह-मशविरा अब वीडियो कॉन्फ्रेंस के जरिए ही करनी होंगी। अगर शारीरिक मौजूदगी बिल्कुल जरूरी हो, तभी अलग से इजाजत दी जाएगी।
बैंकों और संस्थानों के चेयरमैन, प्रबंध निदेशक और सीईओ की विदेश यात्राओं को तय सीमा के भीतर रखने का निर्देश दिया गया है। जब भी संभव हो, अंतरराष्ट्रीय कार्यक्रमों में वर्चुअल तरीके से हिस्सा लिया जाए।
सरकार ने सभी संस्थानों से कहा है कि वे तेजी से इलेक्ट्रिक वाहन (ईवी) अपनाएं। आदेश में लिखा है, “हर संस्थान अपने मुख्यालय और ब्रांचों में पेट्रोल और डीजल से चलने वाली गाड़ियों की जगह ज्यादा से ज्यादा इलेक्ट्रिक कारों का इस्तेमाल करें।”
वित्त मंत्रालय का यह आदेश प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अपील के बाद जारी किया गया है। उन्होंने अधिकारियों से खर्च में संयम बरतने और खर्च कम करने को कहा था। दरअसल, बढ़ते ईरान युद्ध के चलते सरकार आर्थिक प्रभाव से बचने की तैयारी में है।
अभी बीते शनिवार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी नीदरलैंड में भारतीय समुदाय को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा कि अगर दुनिया के बढ़ते संकटों को तुरंत नहीं रोका गया, तो गरीबी के खिलाफ दशकों की मेहनत से हासिल की गई प्रगति गंभीर खतरे में पड़ जाएगी।
उन्होंने कहा, “दुनिया नई चुनौतियों का सामना कर रही है।” उन्होंने हिंदी में समझाते हुए कहा, “पहले कोरोना महामारी आई, फिर युद्ध शुरू हो गए, और अब ऊर्जा संकट है। यह दशक दुनिया के लिए आपदाओं वाला दशक बनता जा रहा है।”
मिडिल ईस्ट में लंबा चल रहा संकट भारत की विकास दर को धीमा कर सकता है, महंगाई बढ़ा सकता है और भुगतान संतुलन पर दबाव डाल सकता है। भारतीय रुपया पहले ही रिकॉर्ड निचले स्तर पर पहुंच चुका है और इस साल एशिया में सबसे कमजोर रहा है। कई राज्यों ने खर्च कम करने के लिए अपने कर्मचारियों को हफ्ते में दो दिन घर से काम करने के निर्देश दिए हैं।
