आज 21 अप्रैल 2026 का दिन वृंदावन के मशहूर संत और राधारानी के परमभक्त प्रेमानंद जी महाराज के सुविचारों के साथ शुरू हो रहा है। प्रेमानंद जी महाराज अपने प्रवचनों में समाज की छोटी-छोटी समस्याओं और उनसे राहत पाने के उपाय बताते रहते हैं। आलस और मोबाइल का जरूरत से ज्यादा इस्तेमाल करने को लेकर भी प्रेमानंद जी महाराज ने कुछ सलाह दिए हैं। प्रेमानंद जी महाराज कहते हैं कि आलस कोई बीमारी नहीं, बल्कि पुरानी आदत का दोष है। जिस तरह हम खाने-पीने, सोने और बोलने की मात्रा को अपनी इच्छा से घटा-बढ़ा सकते हैं, उसी तरह आलस को भी अभ्यास से पूरी तरह कंट्रोल किया जा सकता है। महाराज जी का यह वचन आज के व्यस्त और मोबाइल-मोहग्रस्त जीवन में बेहद प्रासंगिक है।

आज 21 अप्रैल 2026 का दिन वृंदावन के मशहूर संत और राधारानी के परमभक्त प्रेमानंद जी महाराज के सुविचारों के साथ शुरू हो रहा है। प्रेमानंद जी महाराज अपने प्रवचनों में समाज की छोटी-छोटी समस्याओं और उनसे राहत पाने के उपाय बताते रहते हैं। आलस और मोबाइल का जरूरत से ज्यादा इस्तेमाल करने को लेकर भी प्रेमानंद जी महाराज ने कुछ सलाह दिए हैं। प्रेमानंद जी महाराज कहते हैं कि आलस कोई बीमारी नहीं, बल्कि पुरानी आदत का दोष है। जिस तरह हम खाने-पीने, सोने और बोलने की मात्रा को अपनी इच्छा से घटा-बढ़ा सकते हैं, उसी तरह आलस को भी अभ्यास से पूरी तरह कंट्रोल किया जा सकता है। महाराज जी का यह वचन आज के व्यस्त और मोबाइल-मोहग्रस्त जीवन में बेहद प्रासंगिक है।

आलस पर विजय पाने का सबसे सरल और प्रभावी उपाय है – कम बोलें, कम खाना, कम सोना और भजन । जब साधक का मन भजन-कीर्तन और नाम-जप में रम जाता है, तब बाहर के मोबाइल, वीडियो और मनोरंजन का आकर्षण अपने आप खत्म हो जाता है। भजन में डूबने से मन हल्का हो जाता है, शरीर में ऊर्जा आती है और आलस भाग जाता है। यह सूत्र इतना शक्तिशाली है कि इसे अपनाने वाला साधक खुद महसूस करता है कि उसका समय अब व्यर्थ नहीं जा रहा।

आलस पर विजय पाने का सबसे सरल और प्रभावी उपाय है – कम बोलें, कम खाना, कम सोना और भजन । जब साधक का मन भजन-कीर्तन और नाम-जप में रम जाता है, तब बाहर के मोबाइल, वीडियो और मनोरंजन का आकर्षण अपने आप खत्म हो जाता है। भजन में डूबने से मन हल्का हो जाता है, शरीर में ऊर्जा आती है और आलस भाग जाता है। यह सूत्र इतना शक्तिशाली है कि इसे अपनाने वाला साधक खुद महसूस करता है कि उसका समय अब व्यर्थ नहीं जा रहा।

महाराज जी कहते हैं कि अलार्म नहीं, दृढ़ संकल्प ही सच्ची जागृति लाता है। अगर आपने तय कर लिया कि सुबह चार बजे से पहले उठना है, तो भगवान खुद आपकी आंखें खोल देंगे। आंखें खुलने के बाद सबसे पहला काम रजाई फेंककर उठ बैठना। लेटे रहना ही आलस है। उठते ही मुंह धोकर नाम-जप शुरू करें। अगर बीच में नींद छा जाए, तो थोड़ा टहल लें, पानी पी लें और फिर ध्यान में लग जाएं। निरंतर अभ्यास से शरीर और मन दोनों हल्के हो जाते हैं। छह घंटे की नींद पर्याप्त है और सुबह 4 बजे से पहले उठना शुभ माना गया है।

मोबाइल बहुत अच्छी चीज है, लेकिन विवेक चाहिए। महाराज जी चेताते हैं – इसमें झूठी बातें, व्यर्थ तस्वीरें और समय का अपव्यय भरा पड़ा है। अगर इस्तेमाल करना ही है, तो केवल सत्संग सुनने, ग्रंथ पढ़ने और नाम-जप की प्रेरणा लेने के लिए करें। गाड़ी चलाते समय कभी ना छुएं, एक पल की असावधानी जीवन संकट में डाल सकती है। अच्छा ग्रहण करें, बुरा त्याग दें – यही सच्चा विवेक है।

जब साधक दिन की शुरुआत भगवान के नाम से करता है और पूरे दिन कर्म करते हुए भी मन में नाम का स्मरण रखता है, तब आलस और मोबाइल का अंधा मोह दोनों अपने आप दूर हो जाते हैं। प्रेमानंद जी महाराज का यह उपदेश हमें याद दिलाता है कि शांति बाहर नहीं, भीतर है। बस थोड़ा अभ्यास, थोड़ा संकल्प और निरंतर भजन चाहिए।

प्रेमानंद जी महाराज की बातों का अनुसरण करते हुए आज से ही शुरू करें – कम बोलना, कम खाना, कम सोना और कुछ समय भजन के लिए निकालना। ऐसा करने से मन की शांति फिर से आपके पास लौट आएगी।

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