पश्चिम बंगाल के खड़गपुर शहर को आईआईटी के नाम से ही जाना जाता है। देश और दुनिया में शहर की पहचान इस नामचीन संस्थान के चलते है। फिलहाल बंगाल में विधानसभा चुनाव है और हर किसी की नजर खड़गपुर सदर सीट पर भी है। इसे आईआईटी वाली सीट भी कहा जाता है और यहां मिलने वाली जीत किसी भी दल के लिए नैरेटिव के लिहाज से मायने रखती है। भाजपा ने इस सीट से अपने सीनियर नेता दिलीप घोष को उतारा है, जो पूर्व में प्रदेश अध्यक्ष भी रहे हैं। कुछ समय पहले वह थोड़ा बागी सुर भी दिखा रहे थे, लेकिन हाईकमान के दखल के बाद उनका मिजाज बदला हुआ है।
पश्चिम मेदिनीपुर जिले की यह सीट बंगाल ही नहीं बल्कि देश के माहौल को बताने वाली मानी जाती है। ऐसा इसलिए क्योंकि यह उन सीटों में से एक है, जहां गैर-बांग्ला समुदाय के लोगों की अच्छी खासी आबादी है। यहां पर तेलुगू, पंजाबी, मारवाड़ी समेत अलग-अलग इलाकों और भाषा-बोलियों के लोग रहते हैं। पीढ़ियों से वे यहां कारोबार, नौकरी आदि के सिलसिले में रहते आए हैं। ऐसे में इस सीट का अपना एक महत्व है और यहां मिलने वाली जीत बताती है कि हर समुदाय में किसकी पकड़ है। दिलीप घोष यहां से दम भर रहे हैं, जिन्हें भाजपा के टॉप लीडर्स में गिना जाता है।
दिलीप घोष के प्रदेश अध्यक्ष रहते हुए ही 2019 में भाजपा ने बंगाल की 19 लोकसभा सीटें हासिल कर बड़ी सफलता पाई थी। उनका मुकाबला टीएमसी के प्रदीप सरकार से है, जिनकी पहचान जमीनी नेता के तौर पर है। वह पूर्व में विधायक रहे हैं और फिलहाल म्युनिसिपलिटी के चेयरमैन के तौर पर काम कर रहे हैं। कभी यह सीट लेफ्ट का गढ़ होती थी, फिर यहां कांग्रेस ने जीत हासिल की। 2016 में यहां से दिलीप घोष जीते थे और वह मायने रखता है क्योंकि तब भाजपा राज्य में काफी कमजोर थी। उन्होंने कांग्रेस के ज्ञान सिंह सोहनपाल को हराया था। इसके बाद वह 2019 में खड़गपुर से ही लोकसभा चुनाव लड़े थे और इस एक सीट से ही उन्हें 45 हजार की बढ़त मिली थी।
हालांकि उनकी छोड़ी सीट पर हुए उपचुनाव में ही प्रदीप सरकार जीत गए थे। अब उनसे ही दिलीप घोष का मुकाबला है। 2021 के चुनाव में भी यहां भाजपा को जीत मिली थी, लेकिन भाजपा ने इस बार मौजूदा विधायक के स्थान पर दिलीप घोष को ही मौका दिया है। स्थानीय लोगों का कहना है कि दिलीप घोष की अच्छी छवि है और उन्हें विधायक एवं सांसद रहते इलाके में खूब काम किए थे। ऐसी स्थिति में संभव है कि उन्हें जीत मिल जाए। टीएमसी की अंतर्कलह भी उन्हें मजबूत कर रही है।
