कुलपति प्रो. डॉ. हिमांशु ऐरन का कहा – रास बिहारी बोस सुभारती विश्वविद्यालय तंबाकू उपयोग से मुक्त, तंबाकू को कैंसर जैसी घातक बीमारियों का बड़ा कारण बताया
विजडम इंडिया संवाददाता।
देहरादून। उत्तराखंड में तंबाकू मुक्त समाज के निर्माण के उद्देश्य से उत्तराखंड टोबैको-फ्री कोएलिशन (UTFC) की 22वीं त्रैमासिक बैठक का आयोजन सम्राट ललितादित्य प्रेक्षागृह, रास बिहारी बोस सुभारती विश्वविद्यालय, देहरादून में किया गया। इस अवसर पर स्वास्थ्य विशेषज्ञों, शिक्षाविदों तथा सामाजिक कार्यकर्ताओं ने तंबाकू के दुष्प्रभावों और इससे बचाव के उपायों पर गंभीर विचार-विमर्श किया। UTFC, बाला जी सेवा संस्थान के सहयोग से राज्य में तंबाकू नियंत्रण और जनजागरूकता के कार्यों को सफलतापूर्वक आगे बढ़ा रहा है।

इस अवसर पर रास बिहारी बोस सुभारती विश्वविद्यालय और UTFC के मध्य एक महत्वपूर्ण MOU समझौता ज्ञापन पर भी हस्ताक्षर किए गए। इस समझौते के अनुसार रास बिहारी बोस सुभारती विश्वविद्यालय, UTFC के उद्देश्यों को पूरा करने तथा तंबाकू नियंत्रण और जनजागरूकता कार्यक्रमों को आगे बढ़ाने में अपना पूर्ण सहयोग प्रदान करेगा।
कार्यक्रम का शुभारंभ अतिथियों द्वारा दीप प्रज्ज्वलन के साथ हुआ। बैठक का संचालन प्रदीप आनंद, संयुक्त सचिव UTFC ने किया। प्रारंभ में UTFC के चेयरमैन इंजीनियर प्रेम तनेजा ने सभी प्रतिभागियों का स्वागत करते हुए कहा कि तंबाकू नियंत्रण के लिए समाज, शिक्षा संस्थानों और प्रशासन को मिलकर निरंतर प्रयास करने होंगे।
बैठक में UTFC के सदस्य-सचिव अवधेश कुमार ने पिछली त्रैमासिक बैठक की कार्यवाही और प्रगति की समीक्षा प्रस्तुत की तथा विभिन्न जागरूकता कार्यक्रमों की जानकारी दी।
मुख्य अतिथि के रूप में संबोधित करते हुए रास बिहारी बोस सुभारती विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. डॉ. हिमांशु ऐरन ने कहा कि तंबाकू आज के समय में सार्वजनिक स्वास्थ्य के सामने सबसे बड़ी चुनौतियों में से एक है। उन्होंने कहा कि युवाओं को तंबाकू के दुष्प्रभावों से बचाने के लिए शिक्षा संस्थानों की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण है।
डॉ. ऐरन ने अपने संबोधन में यह भी कहा कि रास बिहारी बोस सुभारती विश्वविद्यालय पूरी तरह तंबाकू उपयोग से मुक्त परिसर है और यहां तंबाकू सेवन के विरुद्ध सख्त जागरूकता और अनुशासनात्मक व्यवस्था लागू है। उन्होंने तंबाकू सेवन के खतरों को कैंसर जैसी घातक बीमारियों से सीधे जोड़ते हुए कहा कि तंबाकू कई प्रकार के कैंसर और गंभीर स्वास्थ्य समस्याओं का प्रमुख कारण है, इसलिए समाज के हर वर्ग को इससे दूर रहना चाहिए।
डॉ. ऐरन ने विश्वविद्यालय स्तर पर स्वास्थ्य जागरूकता अभियानों को बढ़ाने की आवश्यकता पर बल देते हुए कहा कि यदि स्कूल और विश्वविद्यालय स्तर पर सही जानकारी दी जाए तो आने वाली पीढ़ियों को तंबाकू की लत से बचाया जा सकता है। उन्होंने UTFC के प्रयासों की सराहना करते हुए कहा कि इस प्रकार के सामूहिक प्रयास ही समाज में सकारात्मक बदलाव लाते हैं।

कार्यक्रम में प्रो. डॉ. ज्योत्सना सेठ, उपाध्यक्ष UTFC एवं प्रोफेसर, सीमा डेंटल कॉलेज ऋषिकेश ने तंबाकू सेवन से होने वाले गंभीर स्वास्थ्य परिणामों और इसके सामाजिक-आर्थिक प्रभावों पर विस्तार से प्रकाश डाला।
प्रो. डॉ. आरती रौथान, कार्यकारी सदस्य UTFC एवं विभागाध्यक्ष, पब्लिक हेल्थ साई इंस्टीट्यूट, देहरादून ने UTFC की उपलब्धियों और भविष्य की कार्ययोजना प्रस्तुत की।
प्रो. लुफिना अहमद, प्रोफेसर नर्सिंग विभाग, रास बिहारी बोस सुभारती विश्वविद्यालय ने उत्तराखंड में तंबाकू सेवन की स्थिति, उससे जुड़े सार्वजनिक स्वास्थ्य प्रभावों तथा रोकथाम की रणनीतियों पर प्रस्तुति दी।
पूर्व अध्यक्ष UTFC कमांडर अनिल अग्निहोत्री ने अवैध तंबाकू व्यापार और उसके नियंत्रण में आने वाली चुनौतियों पर अपने विचार रखे। वहीं सुभाष बंसल, कार्यकारी सदस्य UTFC ने बच्चों और किशोरों के बीच किए गए जागरूकता अभियानों के अपने अनुभव साझा किए।
बैठक के दौरान UTFC से जुड़े नए सदस्यों का सम्मान भी किया गया, जिनमें नितिका कौशल कार्यक्रम की नोडल अधिकारी, डॉ. रश्मि भारद्वाज,डॉ. नरेंद्र कुमार, सुश्री सृष्टि थापा,प्रो. लुफिना अहमद एवं श्री मानवीर सिंह नेगी
को सम्मानित किया गया। यह सम्मान प्रदीप आनंद एवं गणमान्य अतिथियों द्वारा प्रदान किया गया।
बैठक के अंत में अजीत सिंह तोमर, कार्यकारी सदस्य UTFC एवं राष्ट्रीय पुरस्कार प्राप्तकर्ता ने सभी अतिथियों और प्रतिभागियों के प्रति धन्यवाद ज्ञापित किया।
इस बैठक में तंबाकू नियंत्रण को लेकर राज्य में जनजागरूकता बढ़ाने तथा संस्थागत स्तर पर ठोस कदम उठाने पर सहमति व्यक्त की गई।
