वैदिक ज्योतिष के अनुसार बुध ग्रह को बुद्धि, तर्कशक्ति, वाणी, शिक्षा, व्यापार और करियर का प्रमुख कारक माना जाता है। जिन जातकों की जन्म कुंडली में बुध मजबूत अवस्था में होता है, वे तेज दिमाग वाले, स्पष्ट वक्ता और तर्क-वितर्क में निपुण होते हैं। ऐसे लोग निर्णय लेने में सक्षम होते हैं और अक्सर अपने व्यवसाय या नौकरी में अच्छी प्रगति करते हैं।
वहीं यदि कुंडली में बुध ग्रह कमजोर या पीड़ित हो, तो व्यक्ति को जीवन के कई क्षेत्रों में कठिनाइयों का सामना करना पड़ता है। खासतौर पर करियर और व्यापार से जुड़े फैसलों में भ्रम और असफलता देखने को मिलती है। आइए जानते हैं बुध दोष के लक्षण और उसे शांत करने के उपाय।
यदि किसी व्यक्ति की कुंडली में बुध कमजोर होता है, तो उसकी स्मरण शक्ति प्रभावित हो जाती है। ऐसे लोग बातें जल्दी भूल जाते हैं और एकाग्रता की कमी महसूस करते हैं। इसके साथ ही वाणी से संबंधित समस्याएं भी उत्पन्न हो सकती हैं, जैसे हकलाना, तुतलाना या शब्दों का सही प्रयोग न कर पाना। कमजोर बुध के कारण व्यक्ति निर्णय लेने में असमर्थ रहता है और बार-बार मानसिक तनाव, चिंता व अधिक सोचने की आदत से ग्रस्त हो जाता है।
बुध दोष होने पर व्यापार में नुकसान की संभावना बढ़ जाती है। साथ ही त्वचा, नसों और मानसिक स्वास्थ्य से जुड़ी परेशानियां भी सामने आ सकती हैं।
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लोगों से बातचीत और संवाद में परेशानी होती है, जिससे गलतफहमियां बढ़ती हैं।
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अपनी बात दूसरों तक सही ढंग से पहुंचा पाना कठिन हो जाता है।
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पढ़ाई में मन नहीं लगता और विषयों को समझने में दिक्कत आती है।
बुध ग्रह की शांति के लिए बुधवार का दिन अत्यंत शुभ माना जाता है। इस दिन भगवान गणेश और बुध ग्रह की विधिपूर्वक पूजा करने से बुध दोष के प्रभाव में कमी आती है।
बुधवार के दिन बुध बीज मंत्र – “ॐ ब्रां ब्रीं ब्रौं सः बुधाय नमः” या “ॐ गं गणपतये नमः” का कम से कम 108 बार जप करना लाभकारी माना जाता है।
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बुधवार को व्रत रखने से भी बुध ग्रह मजबूत होता है। यह व्रत शुक्ल पक्ष के किसी बुधवार से प्रारंभ किया जा सकता है।
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बुध ग्रह का रंग हरा होता है, इसलिए इस दिन हरे रंग के वस्त्र, आसन या वस्तुओं का उपयोग शुभ माना जाता है।
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बुधवार को तुलसी के पौधे की सेवा, पूजा और दान करना विशेष फलदायी होता है।
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इस दिन गाय को हरा चारा खिलाने से बुध दोष शांत होता है।
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वाणी में मधुरता रखें और अपशब्दों के प्रयोग से बचें, क्योंकि इससे बुध ग्रह पर नकारात्मक प्रभाव पड़ता है।
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ज्योतिषीय परामर्श के बाद पन्ना रत्न धारण करना भी लाभकारी हो सकता है।
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इसके अतिरिक्त, विष्णु सहस्त्रनाम का नियमित पाठ करने से भी बुध ग्रह की अशुभता कम होती है।
