“मेरे कफ़न के कोने-कोने पर हिंदुस्तान लिख देना…” — शाहरुख की पंक्तियों ने देशभक्ति से भर दिया परिसर

“भारत को कमजोर करने वाली शक्तियों के विरुद्ध स्वदेशी ही सबसे बड़ा शस्त्र है” — प्रो. डॉ. हिमांशु ऐरन

विजडम इंडिया।

देहरादून | विशेष संवाददाता

रास बिहारी बोस सुभारती विश्वविद्यालय में आज 76वाँ गणतंत्र दिवस पूरे गरिमा, राष्ट्रगौरव और सांस्कृतिक उल्लास के साथ मनाया गया। विश्वविद्यालय परिसर देशभक्ति, राष्ट्रबोध और संवैधानिक चेतना के रंगों में सराबोर दिखाई दिया।


कार्यक्रम में विश्वविद्यालय के प्रमुख पदाधिकारीगणों की गरिमामयी उपस्थिति रही, जिनमें कुलपति प्रोफेसर डॉ. हिमांशु ऐरन, महानिदेशक मेजर जनरल जी. के. थपलियाल, प्रति कुलपति डॉ. देश दीपक, डॉ. पी. के. शर्मा, प्रशासनिक अधिकारी डॉ. रविंद्र प्रताप, रजिस्ट्रार श्री खालिद हसन, लोकप्रिय अस्पताल की निदेशक डॉ. जीवन आशा, डॉ. लोकेश त्यागी सहित डीन एकेडेमिक्स मनमोहन गुप्ता, नीतिका कौशल, विनय सेमवाल, समस्त विभागाध्यक्ष एवं शिक्षकगण उपस्थित रहे।
कार्यक्रम का शुभारंभ सरस्वती गान से हुआ, जिसके पश्चात कुलपति प्रो. डॉ. हिमांशु ऐरन ने राष्ट्रीय ध्वज तिरंगा फहराया। राष्ट्रध्वज के आरोहण के साथ ही परिसर ‘जय हिंद’ के उद्घोष से गूंज उठा।


प्रति कुलपति डॉ. देश दीपक ने अपने उद्बोधन में गणतंत्र और लोकतंत्र की अवधारणा पर विस्तार से प्रकाश डालते हुए दोनों के बीच के अंतर और उनकी पारस्परिक पूरकता को सरल शब्दों में समझाया। उन्होंने कहा कि एक सशक्त लोकतंत्र ही मजबूत गणतंत्र की नींव होता है।
महानिदेशक मेजर जनरल जी. के. थपलियाल ने अपने प्रेरक संबोधन में मौलिक अधिकारों के साथ-साथ मौलिक कर्तव्यों की महत्ता को रेखांकित किया और उपस्थित जनों से आह्वान किया कि अधिकारों के साथ कर्तव्यों के प्रति भी उतनी ही सजगता आवश्यक है।


कुलपति प्रो. डॉ. हिमांशु ऐरन ने अपने ओजस्वी वक्तव्य में भारत को आर्थिक रूप से कमजोर करने की मंशा रखने वाली वैश्विक शक्तियों के प्रति आगाह किया। उन्होंने स्वदेशी अपनाने, स्वदेशी उद्योगों और तकनीक को सशक्त बनाने को समय की सबसे बड़ी आवश्यकता बताया। साथ ही उन्होंने नई शिक्षा नीति के अंतर्गत विश्वविद्यालय के संस्थापक अध्यक्ष डॉ. अतुल कृष्ण द्वारा निर्मित राष्ट्रबोध पाठ्यक्रम की विशेषताओं से अवगत कराते हुए छात्रों, शिक्षकों और अधिकारियों से विश्वविद्यालय के मूल तत्व राष्ट्रवाद से भावनात्मक रूप से जुड़ने और प्रत्येक राष्ट्रीय कार्यक्रम में सक्रिय सहभागिता निभाने की अपील की।


सांस्कृतिक कार्यक्रमों की कड़ी में विभिन्न विभागों के छात्रों ने देशप्रेम से ओत-प्रोत प्रस्तुतियाँ दीं। पहलगाम की घटना की पीड़ा और उसके बाद ऑपरेशन सिंदूर के माध्यम से भारत के प्रतिशोध को मंच पर जीवंत रूप में प्रस्तुत किया गया, जिसने दर्शकों को भावुक कर दिया।


परफॉर्मिंग आर्ट्स विभाग के प्राध्यापक शाहरुख द्वारा प्रस्तुत गीत
“मेरे कफ़न के कोने-कोने पर हिंदुस्तान लिख देना”
ने उपस्थित जनसमूह को भाव-विभोर कर दिया, वहीं फार्मेसी विभाग के छात्र शनि मिश्रा के ओजस्वी भाषण ने श्रोताओं में जोश और रोमांच भर दिया।
कार्यक्रम का सफल एवं प्रभावी संचालन डॉ. मंजू जेठी एवं सुश्री मिधात असलम ने किया। समारोह का समापन सामूहिक देशभक्ति गीत
“दिल दिया है, जान भी देंगे ऐ वतन तेरे लिए”
के साथ हुआ। अंत में सभी उपस्थित जनों को प्रसाद स्वरूप मिष्ठान वितरित किया गया।
गणतंत्र दिवस का यह आयोजन न केवल एक उत्सव था, बल्कि राष्ट्र के प्रति कर्तव्य, चेतना और संकल्प को पुनः जागृत करने वाला प्रेरक संदेश भी।

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