विजडम इंडिया संवाददाता।
देहरादून। रास बिहारी बोस सुभारती विश्वविद्यालय में आज बसंत पंचमी पर्व अत्यंत श्रद्धा, उल्लास और रचनात्मक वातावरण के साथ मनाया गया। संपूर्ण परिसर ज्ञान, साधना और सृजनशीलता के रंगों में रंगा नजर आया। इस सांस्कृतिक आयोजन ने यह संदेश दिया कि विश्वविद्यालय केवल डिग्री देने का केंद्र नहीं, बल्कि संस्कार, संस्कृति और सृजन का जीवंत मंच है।
कार्यक्रम का शुभारंभ माँ सरस्वती के विधिवत पूजन से हुआ। इसके पश्चात वैदिक मंत्रोच्चार के साथ हवन संपन्न कराया गया, जिसमें विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो डॉ हिमांशु ऐरन, महानिदेशक मेजर जनरल जी. के. थपलियाल, एडमिनिस्ट्रेटर रवींद्र प्रताप, डीन एकेडेमिक्स डॉ. मनमोहन गुप्ता, डॉ लोकेश त्यागी, सुश्री नीतिका कौशल, पंकज जोशी समस्त विभागाध्यक्ष, शिक्षकगण एवं कर्मचारी उपस्थित रहे। हवन के माध्यम से ज्ञान, विवेक, अनुशासन और सद्बुद्धि की सामूहिक कामना की गई।
बसंत पंचमी के अवसर पर विश्वविद्यालय की रचनात्मक प्रतिभा भी पूरे शबाब पर दिखाई दी। प्रत्येक विभाग से एक-एक प्रतिभागी ने रंगोली प्रतियोगिता में भाग लिया। रंगोली में कहीं माँ सरस्वती की आकृति उभरी, तो कहीं शिक्षा, संस्कृति और प्रकृति का सुंदर समन्वय देखने को मिला। विद्यार्थियों ने रंगों के माध्यम से अपनी कल्पनाशीलता, सांस्कृतिक समझ और कलात्मक दृष्टि का प्रभावशाली प्रदर्शन किया।
कार्यक्रम को संबोधित करते हुए विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. डॉ. हिमांशु ऐरन ने अत्यंत प्रेरक सांस्कृतिक संदेश दिया। उन्होंने कहा कि बसंत पंचमी केवल एक धार्मिक पर्व नहीं, बल्कि ज्ञान के नवसृजन का प्रतीक है। जब शिक्षा संस्कृति से जुड़ती है, तभी वह समाज को दिशा देती है और राष्ट्र निर्माण का आधार बनती है। उन्होंने विद्यार्थियों से आह्वान किया कि वे आधुनिक ज्ञान के साथ भारतीय सांस्कृतिक मूल्यों को आत्मसात करें और अपनी रचनात्मकता को सकारात्मक सामाजिक परिवर्तन का माध्यम बनाएं।
वहीं विश्वविद्यालय के महानिदेशक मेजर जनरल जी. के. थपलियाल ने अपने संक्षिप्त एवं औपचारिक संदेश में सभी छात्र-छात्राओं, शिक्षकों और कर्मचारियों को बसंत पंचमी की शुभकामनाएँ दीं। उन्होंने कहा कि ऐसे सांस्कृतिक आयोजन विश्वविद्यालय परिसर में अनुशासन, सौहार्द और सामूहिक चेतना को सशक्त करते हैं।
इस अवसर पर विश्वविद्यालय के एडमिनिस्ट्रेटर रवींद्र प्रताप, डीन एकेडेमिक्स डॉ. मनमोहन गुप्ता सहित समस्त संकाय सदस्य एवं कर्मचारी उपस्थित रहे। पूरे कार्यक्रम के दौरान अनुशासित व्यवस्था, सांस्कृतिक गरिमा और उत्सव का संतुलित वातावरण बना रहा।
कुल मिलाकर, रास बिहारी बोस सुभारती विश्वविद्यालय में मनाया गया बसंत पंचमी पर्व एक धार्मिक अनुष्ठान से आगे बढ़कर ज्ञान, संस्कृति और रचनात्मकता के सामूहिक उत्सव के रूप में स्थापित हुआ, जिसने विश्वविद्यालय की सांस्कृतिक पहचान को और अधिक मजबूत किया।
