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प्रेस विज्ञप्ति
रास बिहारी बोस सुभारती विश्वविद्यालय में ‘राष्ट्र बोध’ को शिक्षा की धुरी बनाने का संकल्प
2025–26 से सभी संकायों में अनिवार्य मूल्यवर्धित पाठ्यक्रम लागू
देहरादून, 23 दिसम्बर 2025।


रास बिहारी बोस सुभारती विश्वविद्यालय में “राष्ट्र बोध” विषय पर परिचयात्मक-सह-उद्घाटन व्याख्यान का भव्य आयोजन 23 दिसम्बर 2025 को लाल बहादुर शास्त्री लोकप्रिया अस्पताल स्थित विश्वविद्यालय के मुख्य (KS) परिसर के व्याख्यान थिएटर में गरिमामय वातावरण में संपन्न हुआ।
कार्यक्रम का शुभारंभ अपराह्न 02:00 बजे गणमान्य अतिथियों के स्वागत के साथ हुआ। माननीय मुख्य अतिथि डॉ. देवेंद्र भसीन, उपाध्यक्ष—उत्तराखंड राज्य उच्च शिक्षा प्रोत्साहन समिति (उत्तराखंड सरकार) का शॉल एवं पौधा भेंट कर अभिनंदन किया गया। इसके पश्चात दीप प्रज्ज्वलन, भारत माता को पुष्पांजलि तथा नर्सिंग संकाय की

छात्राओं द्वारा “वंदे मातरम्” की भावपूर्ण प्रस्तुति ने आयोजन को राष्ट्रभाव से ओत-प्रोत कर दिया।
कार्यक्रम को संबोधित करते हुए विश्वविद्यालय के अध्यक्ष डॉ. अतुल कृष्ण ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि राष्ट्रीय शिक्षा नीति–2020 भारत-केंद्रित मूल्यों पर आधारित ऐसी शिक्षा की परिकल्पना करती है जो केवल डिग्री नहीं, बल्कि जिम्मेदार नागरिक तैयार करे। उन्होंने घोषणा की कि विश्वविद्यालय शैक्षणिक सत्र 2025–26 से ‘राष्ट्र बोध’ को सभी संकायों एवं विषयों में अनिवार्य मूल्यवर्धित पाठ्यक्रम के रूप में लागू कर रहा है।

उन्होंने जोर देकर कहा, “राष्ट्र बोध केवल पाठ्यक्रम नहीं, चरित्र निर्माण की प्रयोगशाला है—जहाँ संवैधानिक मूल्य, नागरिक कर्तव्य और सामाजिक उत्तरदायित्व एक साथ आकार लेते हैं। यही शिक्षा भारत को समतामूलक, जीवंत और ज्ञान-आधारित वैश्विक महाशक्ति बनाती है।”
इस अवसर पर विश्वविद्यालय के कार्यवाहक कुलपति प्रो. (डॉ.) प्रदीप कुमार शर्मा एवं रजिस्ट्रार श्री खालिद हसन की गरिमामयी उपस्थिति रही। दोनों ने इस पहल को विद्यार्थियों के सर्वांगीण विकास तथा राष्ट्र निर्माण की दिशा में निर्णायक कदम बताया।
कार्यक्रम में डॉ. जी. के. थपलियाल, महानिदेशक—एमटीवी बौद्ध धार्मिक एवं परोपकारी ट्रस्ट ने ‘राष्ट्र बोध’ की वैचारिक पृष्ठभूमि पर प्रकाश डाला। इसके उपरांत डॉ. रीता तिवारी, डीन—फैकल्टी ऑफ फाइन आर्ट्स एंड फैशन डिजाइन ने उद्घाटन व्याख्यान में भारतीय कला, संस्कृति और जीवन मूल्यों के माध्यम से राष्ट्र चेतना को प्रभावशाली ढंग से प्रस्तुत किया।
कार्यक्रम की औपचारिक रूपरेखा प्रस्तुत करते हुए डॉ. राजेश तिवारी, विभागाध्यक्ष—संस्कृति विभाग ने ‘राष्ट्र बोध’ एवं विभाग का परिचय देते हुए माननीय मुख्य अतिथि का औपचारिक परिचय कराया। अपने संबोधन में मुख्य अतिथि डॉ. देवेंद्र भसीन ने शिक्षा, संस्कृति और युवाओं को राष्ट्र निर्माण की आधारशिला बताते हुए ‘राष्ट्र बोध’ जैसे पाठ्यक्रम को समय की अनिवार्य मांग करार दिया।


कार्यक्रम में श्री बलवंत बोहरा एवं श्री रविंद्र कुमार सैनी सहित अनेक गणमान्य व्यक्तियों की उपस्थिति रही, जिससे आयोजन की गरिमा और बढ़ी।
समापन अवसर पर डॉ. जीवन आशा चंद्रा, निदेशक—एलबीएसएलएच एवं बीहाइव अस्पताल ने धन्यवाद ज्ञापन प्रस्तुत किया। उद्घाटन सत्र के पश्चात डॉ. रीता तिवारी द्वारा ‘राष्ट्र बोध’ पर व्याख्यान का क्रम आगे बढ़ाया गया।
कार्यक्रम का संचालन श्री रमण कृष्ण किमोठी, सदस्य—संस्कृति विभाग द्वारा किया गया।
इस अवसर पर विश्वविद्यालय के अधिकारीगण, शिक्षक, विद्यार्थी तथा बड़ी संख्या में गणमान्य श्रोता उपस्थित रहे। आयोजन ने स्पष्ट संदेश दिया कि सुभारती विश्वविद्यालय राष्ट्र-केंद्रित शिक्षा को अकादमिक ढांचे के केंद्र में स्थापित करने के लिए प्रतिबद्ध है।

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