विजडम इंडिया।
देहरादून:
रास बिहारी बोस सुभारती विश्वविद्यालय, देहरादून ने शिक्षा के क्षेत्र में एक और ऐतिहासिक उपलब्धि अपने नाम करते हुए प्रतिष्ठित ‘प्राइड ऑफ नेशन अवॉर्ड 2025’ प्राप्त किया है। यह सम्मान विश्वविद्यालय की अकादमिक उत्कृष्टता, गुणवत्ता-आधारित शिक्षा, तथा राष्ट्र निर्माण के प्रति उसकी सतत प्रतिबद्धता का राष्ट्रीय स्तर पर सशक्त प्रमाण है।
यह गौरवपूर्ण उपलब्धि विश्वविद्यालय के संस्थापक एवं अध्यक्ष प्रो. डॉ. अतुल कृष्ण की दूरदर्शी सोच, राष्ट्रवादी दृष्टिकोण और शिक्षा को समाज परिवर्तन का सशक्त माध्यम बनाने की प्रतिबद्धता का प्रतिफल है। प्रो. डॉ. अतुल कृष्ण के नेतृत्व में विश्वविद्यालय ने औपचारिक शिक्षा से आगे समग्र विकास (Beyond Academics) की अवधारणा को आत्मसात करते हुए शिक्षा को चरित्र निर्माण, अनुशासन, नेतृत्व क्षमता और राष्ट्रीय चेतना से जोड़ा है। उनके मार्गदर्शन में विश्वविद्यालय ने यह सिद्ध किया है कि उच्च शिक्षा केवल डिग्री प्रदान करने तक सीमित नहीं, बल्कि एक सशक्त, आत्मनिर्भर और जागरूक भारत के निर्माण का आधार है।

विश्वविद्यालय की इस सफलता में कुलपति प्रो. डॉ. हिमांशु ऐरन के ऊर्जावान, प्रगतिशील एवं परिणामोन्मुख नेतृत्व की भी निर्णायक भूमिका रही है। शिक्षण-अधिगम में शोध एवं गुणवत्ता संवर्धन को प्राथमिकता देते हुए उन्होंने विश्वविद्यालय को राष्ट्रीय पहचान दिलाने की दिशा में निरंतर कार्य किया।
इस अवसर पर कुलपति प्रो. डॉ. हिमांशु ऐरन ने कहा—
“प्राइड ऑफ नेशन अवॉर्ड 2025 केवल एक सम्मान नहीं, बल्कि हमारी सामूहिक जिम्मेदारी की पुष्टि है। यह पुरस्कार हमारे संस्थापक प्रो. डॉ. अतुल कृष्ण की दूरदृष्टि, प्रबंधन की प्रतिबद्धता, संकाय सदस्यों की मेहनत और विद्यार्थियों की प्रतिभा का साझा परिणाम है। हमारा संकल्प है कि हम शिक्षा के माध्यम से भारत को ‘विश्वगुरु’ बनाने की दिशा में और अधिक प्रभावी योगदान दें।”
यह प्रतिष्ठित सम्मान प्रो. अनिल सहस्रबुद्धे जी—अध्यक्ष, नेशनल बोर्ड ऑफ एक्रिडिटेशन (NBA), नेशनल असेसमेंट एंड एक्रिडिटेशन काउंसिल (NAAC) एवं नेशनल एजुकेशनल टेक्नोलॉजी फोरम (NETF), भारत सरकार—द्वारा केरल उच्च न्यायालय के माननीय न्यायाधीश की गरिमामयी उपस्थिति में प्रदान किया गया। पुरस्कार समारोह का आयोजन वेटरन्स इंडिया, दिल्ली द्वारा किया गया।
समारोह में विश्वविद्यालय का प्रतिनिधित्व प्रो. मनमोहन गुप्ता, डीन ऐकडेमिक एवं डॉ. इमरान खान, डीन, कला एवं सामाजिक विज्ञान संकाय ने किया।
उल्लेखनीय है कि विजय दिवस के पावन अवसर पर प्रदान किया गया यह सम्मान इस तथ्य को रेखांकित करता है कि भारत में शिक्षा केवल कक्षाओं तक सीमित नहीं, बल्कि यह साहस, अनुशासन, नेतृत्व और राष्ट्रीय चेतना को गढ़ने वाली एक जीवंत शक्ति है।
यह उपलब्धि विश्वविद्यालय के प्रबंधन, संकाय सदस्यों, कर्मचारियों एवं विद्यार्थियों के सामूहिक परिश्रम और समर्पण का परिणाम है, जो शिक्षा, नवाचार और सामाजिक दायित्व के उच्चतम मानकों को निरंतर सुदृढ़ कर रहे हैं।
