विजडम इंडिया

रिपोर्ट : विशेष संवाददाता, देहरादून

देहरादून, गाँव थानों में चल रहे स्पर्श हिमालयन महोत्सव 2025 के अंतर्गत तीन दिवसीय कला प्रदर्शनी का कल भव्य समापन हुआ। इस प्रदर्शनी में रास बिहारी बोस सुभारती विश्वविद्यालय, देहरादून के डॉ. मुक्ति भटनागर स्कूल ऑफ फाइन आर्ट्स एंड फैशन डिज़ाइन के प्रतिभाशाली विद्यार्थियों ने अपनी कला से दर्शकों का मन मोह लिया।

 

 

इस तीन दिवसीय कला उत्सव में सुभारती विश्वविद्यालय के 30 विद्यार्थियों ने अपनी उत्कृष्ट चित्रकला, रेखांकन और सृजनात्मक प्रदर्शनों के माध्यम से हिमालय और गंगा की अनोखी भाव-भंगिमाओं को सजीव कर दिया। प्रदर्शनी स्थल “चित्रों का महासागर” बन गया, जहाँ सुभारती के कलाकारों की रचनात्मकता ने सबका ध्यान आकर्षित किया।

विभागाध्यक्ष श्री संतोष कुमार ने ‘गंगा’ विषय पर बनाए अपने भव्य चित्रों से प्रदर्शनी को विशेष पहचान दी। वहीं, विश्वविद्यालय के उभरते कलाकार आयुष कुमार ने देहरादून की रजत जयंती सांस्कृतिक श्रृंखला के अंतर्गत फाइन आर्ट्स एंड परफॉर्मिंग आर्ट्स की संयुक्त प्रस्तुति से सभी का मन जीत लिया।

*रास बिहारी बोस सुभारती विश्वविद्यालय के कुलपति डॉ. हिमांशु ऐरन ने विशेष सम्मानित अतिथि के रूप में अपनी गरिमामयी उपस्थिति दर्ज कराई। समापन समारोह में उन्होंने विद्यार्थियों की रचनात्मकता की सराहना करते हुए कहा—

> “कला केवल अभिव्यक्ति नहीं, बल्कि संस्कृति और संवेदना का संगम है। सुभारती विश्वविद्यालय का उद्देश्य यही है कि हमारे विद्यार्थी अपने कौशल और सृजन से समाज में सकारात्मक परिवर्तन लाएँ। इस प्रदर्शनी में हमारे विद्यार्थियों ने जिस तरह हिमालय और गंगा के सौंदर्य को जीवंत किया है, वह वास्तव में प्रेरणादायक है।”
डॉ. ऐरन ने आगे कहा कि “रास बिहारी बोस सुभारती विश्वविद्यालय” आज देशभर में गुणवत्ता पूर्ण शिक्षा और सामाजिक चेतना से जुड़ी पहल के लिए जाना जाता है। उन्होंने यह भी जोड़ा कि विश्वविद्यालय अपने विद्यार्थियों को केवल अकादमिक उत्कृष्टता ही नहीं, बल्कि मानवीय मूल्यों, कला-संवेदना और रचनात्मक स्वतंत्रता का भी वातावरण प्रदान करता है।
डॉ. मुक्ति भटनागर स्कूल ऑफ फाइन आर्ट्स एंड फैशन डिज़ाइन के संकाय सदस्यों और विद्यार्थियों ने भी इस अवसर पर डॉ. ऐरन के मार्गदर्शन और प्रेरणा के लिए आभार व्यक्त किया। समापन के साथ ही देहरादून के इस स्पर्श हिमालयन महोत्सव में सुभारती विश्वविद्यालय ने अपनी कला-संवेदना की गूंज छोड़ दी, जिसे लंबे समय तक याद रखा जाएगा।

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