
नवप्रवेशित विद्यार्थियों को शैक्षणिक उत्कृष्टता, संस्कार, राष्ट्रबोध एवं वैश्विक दृष्टिकोण से कराया गया परिचय
विजडम इंडिया।
देहरादून, 18 अगस्त 2026: रास बिहारी बोस सुभारती विश्वविद्यालय, देहरादून में नवप्रवेशित विद्यार्थियों के विश्वविद्यालय जीवन में सहज, सकारात्मक एवं प्रेरणादायी प्रवेश सुनिश्चित करने के उद्देश्य से “दीक्षारंभ 2026 – विद्यार्थी अभिमुखीकरण कार्यक्रम” का आज दिनांक 18 अगस्त 2026 को लालित्यादित्य प्रेक्षागृह में गरिमापूर्ण वातावरण में शुभारंभ किया गया। तीन दिवसीय यह कार्यक्रम 18 से 20 अगस्त 2026 तक आयोजित किया जा रहा है।
कार्यक्रम का उद्देश्य नवप्रवेशित विद्यार्थियों को विश्वविद्यालय के शैक्षणिक वातावरण, दृष्टि एवं मूल्यों, अनुशासन, नियम एवं विनियम, शैक्षणिक एवं सह-पाठ्यक्रम गतिविधियों, विद्यार्थी सुविधाओं तथा विभिन्न विद्यार्थी सहायता सेवाओं से परिचित कराना है। कार्यक्रम के प्रथम दिवस में फैकल्टी ऑफ नर्सिंग एवं फैकल्टी ऑफ एजुकेशन के नवप्रवेशित विद्यार्थियों ने उत्साहपूर्वक सहभागिता की।

कार्यक्रम में विश्वविद्यालय के माननीय प्रो-चांसलर डॉ. प्रमोद कुमार शर्मा ने नवप्रवेशित विद्यार्थियों का विश्वविद्यालय परिवार में स्वागत करते हुए अपने प्रेरणादायी संबोधन में कहा कि विश्वविद्यालय में प्रवेश विद्यार्थियों के जीवन की एक महत्वपूर्ण नई यात्रा की शुरुआत है। उन्होंने विद्यार्थियों को शिक्षा के साथ-साथ अनुशासन, संस्कार, नैतिक मूल्यों, परिश्रम एवं सामाजिक उत्तरदायित्व को अपने जीवन का अभिन्न हिस्सा बनाने के लिए प्रेरित किया।
उन्होंने विद्यार्थियों का आह्वान किया कि वे विश्वविद्यालय में उपलब्ध शैक्षणिक एवं सह-पाठ्यक्रम अवसरों का अधिकतम लाभ उठाएं तथा अपनी प्रतिभा एवं व्यक्तित्व का सर्वांगीण विकास करें। उन्होंने कहा कि विद्यार्थी की सफलता केवल अच्छे अंक प्राप्त करने तक सीमित नहीं है, बल्कि एक जिम्मेदार, संवेदनशील एवं राष्ट्रहित के प्रति समर्पित नागरिक के रूप में स्वयं को विकसित करना भी उतना ही महत्वपूर्ण है।
शैक्षणिक अधिष्ठाता एवं आंतरिक गुणवत्ता आश्वासन प्रकोष्ठ के निदेशक प्रो. मनमोहन गुप्ता ने अपने वक्तव्य में नवप्रवेशित विद्यार्थियों को विश्वविद्यालय की शैक्षणिक व्यवस्था, गुणवत्ता आधारित शिक्षा, अकादमिक अनुशासन एवं उच्च शिक्षा में उत्कृष्टता के संबंध में जानकारी दी।

उन्होंने विद्यार्थियों को नियमित अध्ययन, समय प्रबंधन, शिक्षकों के साथ संवाद तथा विश्वविद्यालय की शैक्षणिक गतिविधियों में सक्रिय सहभागिता के महत्व से अवगत कराया। उन्होंने कहा कि उच्च शिक्षा का उद्देश्य केवल डिग्री प्राप्त करना नहीं, बल्कि विद्यार्थियों में ज्ञान, तार्किक सोच, शोध की प्रवृत्ति, नवाचार एवं समस्या समाधान की क्षमता विकसित करना है।
उन्होंने विद्यार्थियों को विश्वविद्यालय में उपलब्ध शैक्षणिक संसाधनों एवं अवसरों का अधिकतम उपयोग करने तथा बदलती तकनीकी एवं वैश्विक आवश्यकताओं के अनुरूप स्वयं को निरंतर विकसित करने के लिए प्रेरित किया।
संस्कृति विभाग के सदस्य एवं अंतरराष्ट्रीय विद्यार्थी एवं वैश्विक संबंध विभाग के सहायक निदेशक श्री रमण कृष्ण किमोठी ने विद्यार्थियों को सुभारती की मूल भावना “राष्ट्र बोध से राष्ट्र भक्ति” से परिचित कराया।

अपने संबोधन में उन्होंने विद्यार्थियों को राष्ट्र, समाज एवं मानवता के प्रति अपने दायित्वों को समझने तथा शिक्षा को केवल ज्ञान अर्जन तक सीमित न रखते हुए उसे चरित्र निर्माण, सामाजिक उत्तरदायित्व एवं राष्ट्र सेवा से जोड़ने का संदेश दिया। उन्होंने कहा कि एक विद्यार्थी की वास्तविक सफलता उसके ज्ञान एवं व्यक्तिगत उपलब्धियों के साथ-साथ एक जिम्मेदार, संवेदनशील एवं राष्ट्रहित के प्रति समर्पित नागरिक के रूप में उसके विकास में निहित है।
उन्होंने विद्यार्थियों को बदलते वैश्विक परिदृश्य के अनुरूप स्वयं को तैयार करने तथा वैश्विक दृष्टिकोण, संवाद कौशल, सांस्कृतिक समझ, आत्मविश्वास एवं नेतृत्व क्षमता विकसित करने के लिए भी प्रेरित किया।

कार्यक्रम का विशेष सत्र “राष्ट्र बोध” रहा, जिसके माध्यम से विद्यार्थियों को भारतीय संस्कृति, राष्ट्रीय एकता, राष्ट्रप्रेम एवं राष्ट्र के प्रति कर्तव्यबोध की भावना से जोड़ा गया। विद्यार्थियों को यह संदेश दिया गया कि शिक्षा का उद्देश्य केवल व्यक्तिगत उन्नति नहीं, बल्कि समाज एवं राष्ट्र के प्रति जिम्मेदारियों का निर्वहन करने की क्षमता विकसित करना भी है।
“राष्ट्र बोध से राष्ट्र भक्ति” की भावना को केंद्र में रखते हुए विद्यार्थियों को अपने गौरवशाली इतिहास, भारतीय संस्कृति एवं राष्ट्रीय मूल्यों के प्रति जागरूक रहने तथा अपने कार्यों के माध्यम से राष्ट्र निर्माण में सकारात्मक योगदान देने के लिए प्रेरित किया गया।
प्रो. नीलिमा चौहान, डीन द्वारा विद्यार्थियों को विश्वविद्यालय की संरचना, विभिन्न शैक्षणिक एवं सह-पाठ्यक्रम गतिविधियों, सुविधाओं तथा विद्यार्थियों के लिए उपलब्ध अवसरों की जानकारी प्रदान की गई।

फैकल्टी ऑफ एजुकेशन द्वारा विश्वविद्यालय के नियम एवं विनियम, अनुशासन एवं संस्थागत व्यवस्थाओं के संबंध में आवश्यक जानकारी दी गई। मुख्य प्रॉक्टर द्वारा एंटी-रैगिंग जागरूकता के माध्यम से विद्यार्थियों को सुरक्षित, सम्मानजनक एवं सकारात्मक शैक्षणिक वातावरण बनाए रखने के लिए प्रेरित किया गया।
राष्ट्रीय सेवा योजना (NSS) के समन्वयक श्री प्रदीप महारा ने विद्यार्थियों को NSS की गतिविधियों एवं सामाजिक सेवा के विभिन्न अवसरों से परिचित कराया तथा समाज के प्रति जिम्मेदारी एवं सेवा भावना विकसित करने का संदेश दिया।
परीक्षा नियंत्रक श्रीमती पूनम कौशिक द्वारा विश्वविद्यालय की परीक्षा प्रणाली, मूल्यांकन प्रक्रिया, परीक्षा संबंधी नियमों एवं महत्वपूर्ण दिशा-निर्देशों की जानकारी प्रदान की गई। उन्होंने विद्यार्थियों से परीक्षा संबंधी नियमों का पालन करने तथा शैक्षणिक अनुशासन बनाए रखने का आह्वान किया।

कार्यक्रम का संचालन सुश्री कविता नैनवाल, फैकल्टी ऑफ एलाइड हेल्थ साइंसेज एवं सुश्री अंजलि उपाध्याय, फैकल्टी ऑफ फाइन आर्ट्स एंड फैशन डिजाइन द्वारा किया गया। दोनों ने कार्यक्रम की विभिन्न गतिविधियों का सुचारु, अनुशासित एवं प्रभावी संचालन किया।
कार्यक्रम के अंत में डीन, विद्यार्थी कल्याण द्वारा धन्यवाद ज्ञापित किया गया तथा विद्यार्थियों को विश्वविद्यालय में उपलब्ध अवसरों का अधिकतम लाभ उठाते हुए अनुशासन, संस्कार एवं उत्कृष्टता के साथ अपने शैक्षणिक जीवन को आगे बढ़ाने का संदेश दिया गया।
इस अवसर पर कुलसचिव श्री खालिद हसन, प्रो. नितिका कौशल सहित विभिन्न संकायों के अधिष्ठाता, विभागाध्यक्ष, प्राध्यापक, अधिकारी, कर्मचारी एवं नवप्रवेशित विद्यार्थी उपस्थित रहे।

“दीक्षारंभ 2026” के प्रथम दिवस ने नवप्रवेशित विद्यार्थियों के लिए विश्वविद्यालय में उनके नए शैक्षणिक जीवन की सकारात्मक एवं प्रेरणादायी शुरुआत का मार्ग प्रशस्त किया। कार्यक्रम के माध्यम से विद्यार्थियों को यह संदेश दिया गया कि विश्वविद्यालय केवल डिग्री प्राप्त करने का स्थान नहीं, बल्कि ज्ञान, संस्कार, अनुशासन, राष्ट्रबोध, व्यक्तित्व निर्माण एवं वैश्विक दृष्टिकोण विकसित करने का महत्वपूर्ण केंद्र है।
तीन दिवसीय “दीक्षारंभ 2026” कार्यक्रम के आगामी दिवसों में अन्य संकायों एवं विभागों के नवप्रवेशित विद्यार्थियों के लिए भी अभिमुखीकरण कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे।
