Explained: ट्रंप ने मिड टर्म इलेक्शन में मानी हार! अब US प्रेसिडेंट को इन पांच खतरों का करना होगा सामना!
अमेरिका में राष्ट्रपति या किसी भी बड़े अधिकारी को पद से हटाने या उनके खिलाफ औपचारिक रूप से आरोप तय करने की शक्ति संसद के निचले सदन यानी हाउस ऑफ रिप्रेजेंटेटिव्स के पास होती है.

कांग्रेस के दोनों सदनों में डेमोक्रेटिक पार्टी आगे चल रही है. अमेरिकी मीडिया के मुताबिक कांग्रेस के प्रतिनिधि सभा (हाउस) में डेमोक्रेटिक पार्टी को बहुमत मिलने की संभावना है. सीनेट में भी डेमोक्रेटिक पार्टी आगे चल रही है. ट्रंप की रिपब्लिकन पार्टी फिलहाल पीछे चल रही है. इसी बीच अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप ने हार स्वीकार कर ली है. अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने नतीजों के बीच कहा, ‘मैं बैलेट पर नहीं था, और अगर होता, तो हम भारी बहुमत से जीत जाते. इस मामले पर ध्यान देने के लिए धन्यवाद.’
अब डोनाल्ड ट्रंप की पार्टी की हार के बाद उनके राष्ट्रपति कार्यकाल के राजनीतिक समीकरण पूरी तरह बदल जाएंगे. अमेरिकी संसद (कांग्रेस) में नियंत्रण खोने का मतलब है कि ट्रंप की नीतियां, प्रशासन और उनकी पूरी राजनीतिक रणनीति एक बहुत बड़े संकट में फंस जाएगी. ट्रंप को पांच बड़े खतरों का सामना करना पड़ सकता है. आइए जानते हैं वो क्या हैं.
1-महाभियोग का सीधा और तलवार जैसा खतरा
अमेरिका में राष्ट्रपति या किसी भी बड़े अधिकारी को पद से हटाने या उनके खिलाफ औपचारिक रूप से आरोप तय करने की शक्ति संसद के निचले सदन यानी हाउस ऑफ रिप्रेजेंटेटिव्स के पास होती है.
यदि मिडटर्म चुनावों के फाइनल नतीजों के बाद डेमोक्रेटिक पार्टी हाउस में बहुमत हासिल कर लेती है, तो उनके पास साधारण बहुमत आ जाता है. महाभियोग का प्रस्ताव पास करने के लिए केवल साधारण बहुमत की ही आवश्यकता होती है.
इतिहास गवाह है कि ट्रंप के पहले कार्यकाल के दौरान भी हाउस ऑफ रिप्रेजेंटेटिव्स द्वारा उन पर महाभियोग चलाया गया था. यदि मिडटर्म में हार मिलती है, तो डेमोक्रेट्स तुरंत ट्रंप के फैसलों, नीतियों या उनके किसी कदम को आधार बनाकर नया महाभियोग ला सकते हैं.
हालांकि राष्ट्रपति को पद से हटाने के लिए सीनेट में दो-तिहाई (2/3) बहुमत की जरूरत होती है, जो मिलना बहुत कठिन होता है, फिर भी महाभियोग की प्रक्रिया शुरू होने मात्र से प्रशासन की साख और राष्ट्रपति की पूरी राजनीतिक ऊर्जा बचाव पक्ष की मुद्रा में चली जाती है.
2-विधायी एजेंडे पर पूर्ण विराम और ‘ग्रिडलॉक’
अमेरिका में कोई भी नया कानून, टैक्स में बदलाव, बजट आवंटन या बड़ा सुधार तब तक पास नहीं हो सकता जब तक उसे संसद के दोनों सदनों हाउस ऑफ रिप्रेजेंटेटिव्स और सीनेट की मंजूरी न मिले.
अमेरिकी संसद का यह ढांचा एक ‘चेक एंड बैलेंस’ सिस्टम पर चलता है. यदि मिडटर्म चुनाव में रिपब्लिकन पार्टी संसद के एक या दोनों सदनों में अपना बहुमत खो देती है, तो इसे ‘विभाजित सरकार’ कहा जाता है.
ट्रंप अपने दूसरे कार्यकाल में जिन बड़े वादों (जैसे टैक्स में कटौती, सख्त आव्रजन नियम या बड़े आर्थिक सुधार) के साथ आगे बढ़ रहे हैं, उन्हें कानूनी अमलीजामा पहनाने के लिए संसद की मुहर जरूरी है. विपक्षी पार्टी के बहुमत वाले सदन इन सभी बिलों को सीधे खारिज कर देंगे या उनमें ऐसे संशोधन कर देंगे जो ट्रंप के लिए अस्वीकार्य हों.
इससे देश में ‘पॉलिसी ग्रिडलॉक’ की स्थिति पैदा हो जाएगी, यानी सरकार नीतिगत मोर्चे पर पूरी तरह पंगु हो जाएगी और कोई भी नया बड़ा कानून पास नहीं हो पाएगा.
3-आक्रामक संसदीय जांच और समन की बौछार
संसद के सदनों का नियंत्रण हाथ से जाते ही सबसे ताकतवर हथियार जो विपक्षी दल के हाथ लगता है, वह संसदीय समितियों की कमान हैच हाउस और सीनेट की समितियों के पास असीमित जांच अधिकार होते हैं. वे तय करती हैं कि किस विभाग, किस मंत्री या किस सरकारी नीति की जांच करनी है. समिति के अध्यक्ष पद पर विपक्षी दल के सांसद बैठते हैं.
हार की स्थिति में डेमोक्रेटिक समितियां ट्रंप प्रशासन के हर एक फैसले, उनके वित्तीय लेन-देन, व्हाइट हाउस के आंतरिक दस्तावेजों और प्रशासनिक नियुक्तियों की फाइलें खंगालना शुरू कर देंगे.
वे कैबिनेट मंत्रियों, सलाहकारों और खुद प्रशासन के अधिकारियों को समन भेजकर जबरन पेश होने और गवाही देने के लिए मजबूर कर सकते हैं. यह लगातार चलने वाली जांच प्रशासन की छवि को धूमिल करती है और मीडिया का पूरा ध्यान विकास के कामों से हटाकर घोटालों या विवादों की ओर खींच लेती है.
8-जजों और प्रशासनिक नियुक्तियों का रुक जाना
अमेरिका की न्यायपालिका (जिसमें सुप्रीम कोर्ट और संघीय अदालतें शामिल हैं) और प्रशासनिक तंत्र में बड़े पदों पर अधिकारियों की नियुक्ति राष्ट्रपति अकेले नहीं कर सकता.
अमेरिकी संविधान के अनुसार, राष्ट्रपति द्वारा चुने गए किसी भी संघीय जज, कैबिनेट मंत्री, राजदूत या शीर्ष अधिकारी के नाम की पुष्टि सीनेट द्वारा किया जाना अनिवार्य है. इसके लिए सीनेट में बहुमत (51 वोट या उससे अधिक) की जरूरत होती है.
यदि मिडटर्म चुनावों में सीनेट का नियंत्रण रिपब्लिकन पार्टी के हाथ से निकलकर डेमोक्रेट्स के पास चला जाता है, तो ट्रंप के लिए अपने पसंद के रूढ़िवादी जजों या प्रमुख अधिकारियों को नियुक्त करना असंभव हो जाएगा.
डेमोक्रेटिक बहुमत वाली सीनेट ट्रंप द्वारा भेजे गए हर नाम को रोक सकती है या लंबी खींचतान कर सकती है. इससे न्यायपालिका में रूढ़िवादी संतुलन बनाने का ट्रंप का सपना अधूरा रह जाएगा और प्रशासन के कई अहम पद खाली पड़े रहेंगे.
5-बजट युद्ध, कर्ज सीमा संकट और सरकारी शटडाउन
देश को चलाने के लिए हर साल बजट पास करना होता है और देश की उधार लेने की सीमा को बढ़ाना पड़ता है. यह पूरी प्रक्रिया संसद के नियंत्रण में होती है.
बजट और वित्तीय विधेयक हमेशा हाउस ऑफ रिप्रेजेंटेटिव्स से शुरू होते हैं. यदि संसद के किसी भी सदन में विपक्ष का बहुमत है, तो वे बजट पास करने से इनकार कर सकते हैं या उसमें अपनी शर्तें जोड़ सकते हैं.
ट्रंप प्रशासन और विपक्षी बहुमत वाली संसद के बीच जब बजट और खर्चों को लेकर सहमति नहीं बनती है, तो वाशिंगटन में वित्तीय गतिरोध पैदा हो जाता है.
इस गतिरोध का नतीजा ‘सरकारी शटडाउन’ के रूप में सामने आता है, जहां सरकारी कर्मचारियों को वेतन मिलना बंद हो जाता है, राष्ट्रीय पार्क और सेवाएं ठप हो जाती हैं, और अर्थव्यवस्था को भारी नुकसान पहुंचता है. इसका सीधा राजनीतिक नुकसान राष्ट्रपति और उनकी पार्टी को उठाना पड़ता है.
यदि मध्यावधि चुनावों के फाइनल नतीजों में ट्रंप की पार्टी को हार मिलती है, तो ट्रंप का दूसरा कार्यकाल केवल नीतियों को लागू करने का दौर नहीं रह जाएगा, बल्कि वह संसद में रोज होने वाले राजनीतिक संघर्ष, महाभियोग के खतरों, और अंतहीन संसदीय जांचों से जूझने वाला एक कठिन दौर बन जाएगा. गणितीय रूप से संसद का नियंत्रण खोना अमेरिकी राष्ट्रपति की सबसे बड़ी कमजोरी साबित हो सकता है.