सफदरजंग अस्पताल में निदेशक की नियुक्ति को CAT ने बताया अवैध और मनमाना
वरिष्ठ डॉक्टरों की याचिका पर फैसला; चयन प्रक्रिया पर उठाए सवाल, वरिष्ठतम पात्र अधिकारी को अंतरिम प्रभार देने का निर्देश
विजडम इंडिया
नई दिल्ली। केंद्रीय प्रशासनिक अधिकरण (CAT), नई दिल्ली ने सफदरजंग अस्पताल के स्पोर्ट्स इंजरी सेंटर (SIC) में डॉ. दीपक जोशी की निदेशक पद पर नियुक्ति को अवैध और मनमाना माना है। 27 अक्टूबर 2026 को दिए गए फैसले में अधिकरण ने नियुक्ति प्रक्रिया में पारदर्शिता और निष्पक्षता की कमी पर सवाल उठाए।

इस नियुक्ति को डॉ. स्कंद सिन्हा और डॉ. देवेंद्र सिंह ने चुनौती दी थी। उनका कहना था कि वे डॉ. दीपक जोशी से वरिष्ठ हैं, लेकिन उन्हें पद के लिए उचित अवसर नहीं दिया गया। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि पद के लिए सार्वजनिक विज्ञापन क्यों नहीं निकाला गया और सभी योग्य अधिकारियों से आवेदन क्यों नहीं मांगे गए।
वरिष्ठता सूची में डॉ. स्कंद सिन्हा और डॉ. देवेंद्र सिंह का नाम डॉ. दीपक जोशी से ऊपर था, जबकि डॉ. जोशी उनसे नीचे के क्रम पर थे। सरकार ने अधिकरण को बताया कि 30 अगस्त 2023 को गठित चयन समिति ने योग्य अधिकारियों पर विचार करने के बाद डॉ. जोशी को इस पद के लिए उपयुक्त माना था। डॉ. जोशी की ओर से उनके लंबे अनुभव और स्पोर्ट्स इंजरी सेंटर से जुड़ाव को नियुक्ति का आधार बताया गया।
हालांकि, CAT ने पाया कि चयन समिति के रिकॉर्ड में यह स्पष्ट नहीं था कि कितने अधिकारियों पर विचार किया गया, चयन के लिए कौन-से मानदंड अपनाए गए और उम्मीदवारों की योग्यता की तुलना किस आधार पर की गई। अधिकरण ने कहा कि किसी अधिकारी का अनुभव महत्वपूर्ण हो सकता है, लेकिन सभी योग्य अधिकारियों को निष्पक्ष विचार का अवसर मिलना चाहिए।
CAT ने नियुक्ति को अवैध और मनमाना माना। हालांकि, डॉ. जोशी का तीन वर्ष का कार्यकाल 31 अक्टूबर 2026 को समाप्त होने वाला था और अगली नियुक्ति की प्रक्रिया शुरू होने की जानकारी मिलने के कारण अधिकरण ने तत्काल नियुक्ति रद्द नहीं की।
फैसले में यह भी निर्देश दिया गया कि डॉ. जोशी की इस विवादित नियुक्ति के दौरान निदेशक के रूप में अर्जित अनुभव को भविष्य में इसी पद या किसी उच्च पद की पात्रता के लिए आवश्यक अनुभव अथवा आयु में छूट के आधार के रूप में नहीं गिना जाएगा। अगली नियमित नियुक्ति लागू नियमों के अनुसार होनी चाहिए और सभी पात्र अधिकारियों पर वरिष्ठता को ध्यान में रखते हुए निष्पक्ष विचार किया जाना चाहिए। तब तक वरिष्ठतम पात्र अधिकारी को निदेशक का अंतरिम प्रभार देने का निर्देश दिया गया।
तथाकथित वित्तीय अनियमितताओं के आरोप भी चर्चा में
नियुक्ति विवाद के अलावा डॉ. दीपक जोशी से जुड़े कुछ तथाकथित वित्तीय अनियमितताओं के आरोप भी सामने आए हैं। आरोपों के अनुसार, अगस्त 2025 में एक सम्मेलन से जुड़ी धनराशि को कथित रूप से एक निजी कंपनी के माध्यम से हस्तांतरित किए जाने को लेकर सवाल उठाए गए थे। इस संबंध में मंत्रालय को शिकायत भेजे जाने की बात भी कही गई है। हालांकि, इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि और दस्तावेजों का सत्यापन आवश्यक है। CAT के इस फैसले में इन वित्तीय आरोपों पर कोई निष्कर्ष नहीं दिया गया है।
यह फैसला उन वरिष्ठ डॉक्टरों की याचिका पर आया है, जिन्होंने निदेशक पद की नियुक्ति में पारदर्शिता, समान अवसर और निष्पक्ष चयन की मांग उठाई थी।