तमिलनाडु के मुख्यमंत्री सी. जोसेफ विजय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और बीजेपी को नाराज करने से बचते नजर आ रहे हैं। इसकी एक वजह उनकी सरकार का अल्पमत में होना है, तो दूसरी वजह AIADMK के विधायकों को अपने पाले में लाने की कोशिशों से जुड़े राजनीतिक आरोप हैं। इन परिस्थितियों के बीच गुरुवार को चेन्नई में हुए विपक्ष के प्रदर्शन में उनकी पार्टी की बेहद सीमित भागीदारी से भी यही संकेत मिला।
इस महीने की शुरुआत में कांग्रेस के नेतृत्व वाले INDIA गठबंधन में शामिल हुई तमिलगा वेत्री कड़गम (TVK) ने चुनावी मतदाता सूचियों के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) और मुख्य चुनाव आयुक्त के खिलाफ हुए प्रदर्शन में अपने स्कूल शिक्षा मंत्री ए. राजमोहन को भेजा। उनके अलावा TVK का कोई दूसरा नेता या पार्टी कार्यकर्ता वहां मौजूद नहीं था। यहां तक कि पार्टी के झंडे भी दिखाई नहीं दिए। जबकि प्रदर्शन में शामिल उसके सहयोगी दलों के झंडे और नारे पूरे माहौल में छाए हुए थे।
राजमोहन ने अपने भाषण में वोट देने के अधिकार का जोरदार बचाव किया। उन्होंने डॉ. बी. आर. आंबेडकर का भी जिक्र किया और भरोसा दिलाया कि टीवीके मतदाता सूची में बदलाव की इस प्रक्रिया का विरोध जारी रखेगी। लेकिन पूरे भाषण के दौरान उन्होंने एक बार भी बीजेपी का नाम नहीं लिया।
इस पूरे घटनाक्रम से परिचित नेताओं के मुताबिक, विजय का नेतृत्व चाहता था कि विपक्ष के इस अभियान में पार्टी की भागीदारी केवल औपचारिक रूप से बनी रहे। वह पार्टी को दिल्ली में चल रही ज्यादा टकराव वाली राजनीति में खुलकर उतारने से बचना चाहता था।
तमिलनाडु में INDIA गठबंधन के नेताओं ने इसके पीछे दो प्रमुख वजहें बताईं। पहली वजह यह है कि राज्य में विजय की सरकार अल्पमत में है और वह दिल्ली की बीजेपी सरकार को नाराज करने से बचना चाहती है। दूसरी वजह AIADMK के विधायकों को अपनी पार्टी में लाने की TVK की कथित कोशिशों को लेकर उठा विवाद है। AIADMK, बीजेपी के नेतृत्व वाले राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (NDA) का हिस्सा है।
हालांकि, विधायकों को राजनीतिक फायदे का लालच देकर अपने साथ लाने के इन आरोपों की स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं हुई है। फिर भी नेताओं का कहना था कि इन आरोपों ने बीजेपी के साथ व्यवहार करते समय विजय को और सतर्क बना दिया है।
इन नेताओं ने विजय की सावधानी के पीछे इन राजनीतिक वजहों को प्रमुख माना। उन्होंने करूर भगदड़ मामले से जुड़ी CBI की जारी कार्रवाई, TVK नेता आधव अर्जुन से जुड़े आरोपों और प्रवर्तन निदेशालय (ED) की जांच को गुरुवार के प्रदर्शन में पार्टी की सीमित भागीदारी की मुख्य वजह नहीं माना।
चेन्नई के एग्मोर इलाके में लैंग्स गार्डन रोड स्थित रामाडा सर्किल पर हुए इस प्रदर्शन में कांग्रेस के नेताओं के साथ विदुथलाई चिरुथैगल कच्ची (VCK), मरुमलार्ची द्रविड़ मुनेत्र कड़गम (MDMK), भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (मार्क्सवादी) (CPI-M), भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (CPI), भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (मार्क्सवादी-लेनिनवादी) (CPI-ML) और इंडियन यूनियन मुस्लिम लीग (IUML) के प्रतिनिधि भी शामिल हुए।
इस प्रदर्शन का नेतृत्व तमिलनाडु कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष बी. मणिक्कम टैगोर ने किया। यह मतदाता सूचियों में कथित गड़बड़ियों के खिलाफ विपक्ष के अभियान का हिस्सा था। 3 अक्टूबर को INDIA गठबंधन में शामिल होने के बाद टीवीके ने पहली बार इस तरह के किसी प्रदर्शन में हिस्सा लिया था। लेकिन उसकी मौजूदगी ने गठबंधन में शामिल होने और गठबंधन के आंदोलन में सक्रिय रूप से उतरने के बीच का अंतर साफ दिखा दिया।
सत्तारूढ़ पार्टी की ओर से प्रतिनिधित्व करने पहुंचे राजमोहन ने सबसे पहले वहां मौजूद नेताओं का अभिवादन किया। इनमें वाइको, थोल थिरुमावलवन और वामपंथी दलों के प्रतिनिधि शामिल थे। उन्होंने विजय का धन्यवाद भी किया कि उन्होंने पार्टी के एक साधारण कार्यकर्ता को इतने वरिष्ठ नेताओं के साथ मंच साझा करने का मौका दिया।
अपने भाषण में राजमोहन ने SIR की प्रक्रिया पर विस्तार से बात की। उन्होंने कहा, “विशेष गहन पुनरीक्षण की यह पूरी प्रक्रिया भारत पर थोप दी गई है।” राजमोहन ने कहा कि तमिलनाडु में सत्ता में आने से पहले ही TVK इस प्रक्रिया का विरोध कर रही थी। बिहार में इसे लागू किए जाने के समय से ही पार्टी इसके खिलाफ थी। उन्होंने कहा, “हम उन लोगों में से नहीं हैं जो विपक्ष में रहते हुए कुछ और बोलें और सरकार में आने के बाद कुछ और बोलने लगें।”
राजमोहन ने दावा किया कि इस प्रक्रिया के शुरुआती चरण में 97 लाख मतदाताओं के नाम हटाए जाने से TVK चिंतित हो गई थी। इसके बाद पार्टी ने सार्वजनिक रूप से अपनी आपत्ति जताई और सुप्रीम कोर्ट में भी कानूनी लड़ाई लड़ी। उन्होंने कहा कि TVK ने इस प्रक्रिया को चुनौती देने के लिए वरिष्ठ वकीलों की मदद ली।
मंत्री ने यह भी आरोप लगाया कि इस प्रक्रिया का सबसे ज्यादा असर महिलाओं, 30 साल से कम उम्र के युवाओं, वंचित समुदायों के लोगों, आर्थिक रूप से कमजोर मतदाताओं और पहली बार वोट देने वालों पर पड़ा है। उन्होंने संकेत दिया कि अगर इन मतदाताओं के नाम नहीं हटाए गए होते, तो तमिलनाडु में TVK को चुनाव में और भी बड़ा बहुमत मिल सकता था।
हालांकि, ये दावे मतदाता सूची के पुनरीक्षण की प्रक्रिया की आलोचना करते हुए मंत्री ने अपने भाषण में किए थे। उन्होंने अपने भाषण के दौरान विधानसभा क्षेत्रवार ऐसे कोई सबूत पेश नहीं किए, जिनसे यह साबित होता कि मतदाताओं के नाम हटाए जाने का चुनावी नतीजों पर क्या असर पड़ा।
डॉ. आंबेडकर के विचारों का हवाला देते हुए राजमोहन ने कहा कि आंबेडकर ने लोकतंत्र को लोगों के साथ मिल-जुलकर रहने के एक तरीके के रूप में समझाया था। उन्होंने कहा कि वोट देने का अधिकार आम नागरिक के सम्मान के साथ जीने के अधिकार से अलग नहीं किया जा सकता।
राजमोहन ने विपक्ष के वरिष्ठ नेताओं से TVK का मार्गदर्शन करने की अपील की और भरोसा दिलाया कि उनकी पार्टी लोकतांत्रिक अधिकारों की रक्षा के लिए आगे भी साथ खड़ी रहेगी। मंच पर मौजूद नेताओं से उन्होंने कहा, “अन्ना, हमारा मार्गदर्शन कीजिए। हम आपके रास्ते पर चलने के लिए तैयार हैं।”
राजमोहन ने TVK और कांग्रेस को एक ही राजनीतिक लड़ाई के साझेदार के रूप में पेश किया। उन्होंने कांग्रेस नेता टैगोर के साथ अपने रिश्ते की तुलना ऐसी दो नालियों वाली बंदूक से की, जो एक ही मकसद के लिए लड़ रही हो। उनका इशारा था कि दोनों दल एक साझा लक्ष्य के लिए साथ आए हैं।
राजमोहन की बातों में जितना जोश था, प्रदर्शन में TVK की वास्तविक मौजूदगी उतनी ही सीमित थी। प्रदर्शन में शामिल अलग-अलग दलों के झंडों की ओर देखते हुए राजमोहन ने कहा कि लोगों के अधिकारों की रक्षा के लिए अलग-अलग राजनीतिक संगठनों को एक साथ आया देखकर उनका मन भावुक हो गया। उन्होंने कहा, “लोगों के अधिकार वापस दिलाने के लिए जो एकता बनी है, उसे आगे भी कायम रहना चाहिए।”
यह प्रदर्शन तमिलनाडु की राजनीति के एक बेहद नाजुक दौर में हुआ। इससे पहले कांग्रेस की सबसे प्रमुख सहयोगी रही डीएमके ने 12 अक्टूबर को INDIA गठबंधन से अलग होने का ऐलान कर दिया था। डीएमके ने कांग्रेस नेताओं पर धोखा देने और द्रविड़ पार्टी पर बार-बार हमला करने का आरोप लगाया था।
इससे पांच दिन पहले राहुल गांधी दोपहर के भोजन पर विजय से मिलने उनके नीलंकरई स्थित आवास पहुंचे थे। इस मुलाकात से पहले दोनों खेमों में आखिरी समय तक अनिश्चितता बनी हुई थी।
इसके अगले ही दिन विजय ने चेन्नई में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का स्वागत किया। वह मेट्रो के एक हिस्से के उद्घाटन के दौरान मोदी के साथ यात्रा करते नजर आए। इसके बाद वह उनके साथ एक मंदिर भी गए और सरकार के एक आधिकारिक कार्यक्रम में उनके साथ मंच साझा किया।
इस तरह, एक ही सप्ताहांत में विजय का सामना देश की दो प्रमुख और एक-दूसरे की विरोधी राजनीतिक ताकतों के सबसे बड़े चेहरों से हुआ। राहुल गांधी और नरेंद्र मोदी के साथ उनकी मुलाकातों ने उन्हें दोनों राष्ट्रीय राजनीतिक खेमों के नेताओं के करीब दिखाया।
लेकिन गुरुवार के प्रदर्शन ने उनके सामने एक अलग सवाल खड़ा कर दिया। सवाल यह नहीं था कि मुख्यमंत्री विजय अलग-अलग राजनीतिक दलों के राष्ट्रीय नेताओं का स्वागत कर सकते हैं या नहीं। असली सवाल यह था कि दिल्ली में केंद्र सरकार का विरोध करने के मामले में उनकी पार्टी आखिर कितनी दूर तक जाने को तैयार है।
राजमोहन ने अपना भाषण खत्म करते हुए SIR का विरोध जारी रखने के TVK के संकल्प को दोहराया। साथ ही उन्होंने विजय के उस परिचित संदेश को भी दोहराया, जो वह अक्सर अपने समर्थकों से कहते हैं। उन्होंने कहा, “आत्मविश्वास रखिए। अच्छा होगा। जीत निश्चित है।”
मंत्री ने मतदाता सूची के पुनरीक्षण के खिलाफ मजबूती से अपनी बात रखी और विपक्षी एकता की जमकर तारीफ की। लेकिन उन्होंने बीजेपी का नाम नहीं लिया। जिस पार्टी का वह प्रतिनिधित्व कर रहे थे, उसकी मौजूदगी भी प्रदर्शन में लगभग न के बराबर रही। केंद्र सरकार के खिलाफ अपने अभियान को और तेज करने की तैयारी कर रहे विपक्षी गठबंधन के लिए गुरुवार को TVK ने अपनी मौजूदगी तो दर्ज करा दी। लेकिन विजय राजनीतिक टकराव के रास्ते पर इसके आगे कितनी दूर तक जाने के लिए तैयार हैं, यह सवाल अब भी साफ नहीं है।तमिलनाडु में कांग्रेस के सी. जोसेफ विजय के नेतृत्व वाली टीवीके के साथ मिलकर सरकार बनाने के कुछ महीनों बाद अब डीएमके विपक्ष के नेता राहुल गांधी को लेकर दोहरे रुख में नजर आ रही है। राहुल गांधी चुनाव आयोग के खिलाफ अभियान चला रहे हैं। इस मुद्दे पर डीएमके का एक धड़ा राहुल गांधी पर लगातार हमला कर रहा है, जबकि पार्टी का दूसरा धड़ा उनके विरोध-प्रदर्शन के अधिकार का समर्थन कर रहा है।