xplained: IMF ने भारत की GDP को रॉकेट बनाया! 7% बढ़ोतरी से आदमी की जेब में क्या आया?
IMF ने FY 2026 और 2027 के लिए भारत की GDP ग्रोथ का अनुमान 7% लगाया है. यह दुनिया की किसी भी बड़ी इकोनॉमी से ज्यादा है, लेकिन आम आदमी की जेब तक यह पहुंचेगी या नहीं, यह इस स्टोरी का सबसे बड़ा सवाल है.

GDP बढ़ना और जेब भरना अलग कैसे?
Source : ABPLIVE
अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (IMF) ने 13 अक्टूबर 2026 को अपनी अक्टूबर वर्ल्ड इकोनॉमिक आउटलुक रिपोर्ट जारी की. इसमें भारत का GDP ग्रोथ अनुमान 2026-27 के लिए 6.4% से बढ़ाकर 7% कर दिया, यानी 60 बेसिस पॉइंट्स की बढ़ोतरी. IMF ने 2027-28 के लिए भी अनुमान 6.7% से बढ़ाकर 7% कर दिया. IMF ने कहा, ‘इंडिया स्टैंड्स आउट विद अपवर्ड रिवीजन्स.’ आखिर 7% का अनुमान कितनी बड़ी बात है और आपकी जेब को कैसे फायदा पहुंचाएगी…
IMF ने भारत के लिए 7% GDP वृद्धि का अनुमान लगाया है, लेकिन देश के 84% परिवार कह रहे हैं कि बजट पहले से ज्यादा तंग हो गया है. यही इस स्टोरी का सबसे बड़ा विरोधाभास है.
अमेरिका, चीन और रूस के आगे 7% कितनी बड़ी बात?
IMF ने 2026 के लिए वैश्विक वृद्धि दर 3.1% और 2027 के लिए 3.4% रहने का अनुमान लगाया है. यानी भारत की वृद्धि दर वैश्विक औसत से दोगुनी से भी ज्यादा है. चीन की वृद्धि 2026 में 4.5% और 2027 में 4% रहने का अनुमान है. अमेरिका और यूरोप जैसी उन्नत अर्थव्यवस्थाएं 2027 में सिर्फ 1.8% की दर से बढ़ेंगी. यानी भारत न सिर्फ चीन से तेज बढ़ रहा है, बल्कि पूरी दुनिया से कहीं आगे है.
IMF के मुताबिक, भारत की मजबूत वृद्धि की तीन बड़ी वजहें हैं:
- मजबूत घरेलू मांग
- सर्विस सेक्टर की ताकत
- युवा आबादी
साथ ही सरकार के ढांचागत सुधार भी इसमें योगदान दे रहे हैं.
वर्ल्ड बैंक ने FY27 के लिए अनुमान 7.1% कर दिया है. ऑर्गनाइजेशन फॉर इकोनॉमिक को-ऑपरेशन एंड डेवलपमेंट (OECD) ने 7.1% किया है. RBI ने 6.7% से बढ़ाकर 7.1% किया है. ADB, S&P और फिच ने भी अनुमान 7% के आसपास रखा है. मूडीज ने भी FY27 के लिए 7% का अनुमान लगाया है. यानी लगभग सभी बड़ी वित्तीय संस्थाएं एक ही बात कह रही हैं- भारत की अर्थव्यवस्था तेज रफ्तार से बढ़ रही है.
सरकारी आंकड़ों के मुताबिक, FY26 में भारत की वास्तविक GDP वृद्धि 7.8% रही थी. अप्रैल-जून 2026 की तिमाही में भी 7.8% की वृद्धि दर्ज हुई. ग्रॉस वैल्यू एडेड (GVA) में 8.2% की बढ़ोतरी हुई, जो GDP से भी ज्यादा है.
7% वृद्धि शानदार, लेकिन आम आदमी की जेब में क्या?
GDP बढ़ना और आम आदमी की जेब भरना दो अलग चीजें हैं. भारत की अर्थव्यवस्था तेजी से बढ़ रही है, लेकिन इसका फायदा अभी तक नौकरी, वेतन और बचत के रूप में आम घर तक नहीं पहुंच पाया है. गर्ग ने सबसे सटीक बात कही, ‘अगर वृद्धि असली है और बंटवारा व्यापक रूप से न्यायसंगत है, तो खपत भी उसी हिसाब से बढ़नी चाहिए. लेकिन PLFS और अन्य आंकड़े बताते हैं कि लोग परेशानी में हैं.’
पूर्व वित्त सचिव सुभाष चंद्र गर्ग का मानना है कि 7.8% GDP वृद्धि नीचे के 75-80% लोगों की आय में नहीं दिख रही है, जिनकी असली आय छह-सात साल से बढ़ी नहीं है.’ गर्ग ने यह भी कहा, ‘अगर पिछले साल का GDP आंकड़ा संशोधित न किया जाता, तो वृद्धि 2.6% होती.’ गर्ग ने बताया कि भारत का सेविंग पूल 45 साल के निचले स्तर पर है और घरेलू कर्ज अपने शिखर पर है, यानी लोग खपत के लिए कर्ज ले रहे हैं.
RBI के मुताबिक, मई 2026 में शहरी परिवारों में आय बढ़ने की शिकायत सिर्फ 0.9% नेट रिस्पॉन्स रही, यानी लगभग कोई नहीं. ग्रामीण परिवारों में नवंबर 2025 में 42.2% लोग आय बढ़ने की बात कह रहे थे, जो मई 2026 में घटकर 29.6% रह गए.
एक होम शेफ अनिता फर्नांडिस ने कहा, ‘पहले 1 लीटर दूध 92 रुपये में मिलता था, अब 111 रुपये का है. महीने का बजट बढ़ गया, लेकिन सैलरी वही है.’ मार्केटिंग मैनेजर शैलेश गायकवाड़ कहते हैं कि RBI की रेपो रेट बढ़ने के बाद होम लोन की ब्याज दर 7.90% से बढ़कर 8.15% हो गई.
भारत में 2026 में कॉर्पोरेट सैलरी में औसतन 9.1% की बढ़ोतरी का अनुमान है. 2025 के 8.9% से मामूली ज्यादा है. महंगाई घटाने के बाद असली वेतन वृद्धि सिर्फ 5.1% रह जाती है. यह भी पूरी तस्वीर नहीं है. वित्तीय विश्लेषक नितिन कौशिक के मुताबिक,’पिछले एक दशक में भारत में असली वेतन वृद्धि औसतन सिर्फ 0.4% सालाना रही है.’
कौशिक ने एक और चौंकाने वाला आंकड़ा देते हुए कहा, ‘आपकी सैलरी 2015 में 90 थी, आज 1.5 लाख रुपए है, यानी 66% की बढ़ोतरी. लेकिन जब किराया, स्कूल फीस और बीमा लगभग दोगुने हो चुके हैं, तो आपकी पर्चेसिंग पॉवर मुश्किल से हिली है’.
सैलरी बढ़ रही है, लेकिन खर्च उससे तेज भाग रहा है.
महंगाई और बेरोजगारी के आंकड़े क्या कहते हैं?
जून 2026 में CPI महंगाई 4.38% रही. RBI को उम्मीद है कि Q3 तक महंगाई 6% तक पहुंच सकती है. बेरोजगारी दर जून 2026 में 5.5% रही, लेकिन मूडीज का अनुमान है कि 2026 में बेरोजगारी दर 7% तक पहुंच सकती है.
कांग्रेस के ‘रियल स्टेट ऑफ इकोनॉमी’ दस्तावेज के मुताबिक, ‘7% से ऊपर की GDP वृद्धि से आमतौर पर लाखों नई नौकरियां बननी चाहिए, लेकिन ऐसा नहीं हुआ है.’ कॉर्पोरेट कंपनियों में वेतन वृद्धि 2026 की चौथी तिमाही में सिर्फ 6% रही. FMCG और बैंकिंग जैसे क्षेत्रों में छंटनी हुई है.
तो पैसा किसके पास जा रहा है?
वर्ल्ड इनइक्वलिटी रिपोर्ट 2026 के मुताबिक, भारत में सिर्फ 1% लोगों के पास देश की कुल संपत्ति का 40% हिस्सा है. टॉप 10% लोगों के पास 65% संपत्ति है. नीचे के 50% लोगों के पास सिर्फ 6.4% संपत्ति है. टॉप 10% लोग राष्ट्रीय आय का 58% हिस्सा ले रहे हैं, जबकि नीचे के 50% को सिर्फ 15% मिलता है.
GDP बढ़ रही है , लेकिन उसका सबसे बड़ा हिस्सा ऊपर के 10% के पास जा रहा है. नीचे के 50% तक जो पहुंच रहा है, वह महंगाई और कर्ज में घुल रहा है.
तो क्या यह वृद्धि नकली है?
एक्सपर्ट्स की मानें तो ऐसा नहीं है. भारत की अर्थव्यवस्था वाकई तेजी से बढ़ रही है, लेकिन इसका फायदा अभी तक आम आदमी तक नहीं पहुंच पाया है. इसकी तीन बड़ी वजहें हैं:
- यह वृद्धि मुख्य रूप से बड़े प्रोजेक्ट्स, निवेश और सेवा क्षेत्र से आ रही है, न कि खेती या छोटे उद्योगों से, जहां ज्यादातर लोग काम करते हैं.
- महंगाई और कर्ज की ब्याज दरें बढ़ रही हैं, जिससे लोगों की पर्चेसिंग पॉवर कम हो रही है.
- सरकार ने FY26 में टैक्स कलेक्शन में 2.4 लाख करोड़ रुपये की कमी को पूरा करने के लिए खर्च में कटौती की, जिससे निवेश और रोजगार पर असर पड़ा.
IMF का 7% अनुमान साबित करता है कि दुनिया की सबसे तेज बढ़ती बड़ी अर्थव्यवस्था भारत है. GDP के आंकड़े और आम आदमी की जेब के बीच की खाई अभी भी बड़ी है. सरकार के लिए असली परीक्षा यह है कि वह इस वृद्धि को रोजगार और आय में बदलकर दिखाए. जनता GDP नहीं, अपनी जेब देखती है.
