अयोध्या राम मंदिर में दान चोरी मामले की जांच अब चोरी की घटनाओं के साथ गोपनीय सूचनाओं के लीक होने की कड़ी तक पहुंच गई है। जांच एजेंसियों ने मामले से जुड़े पूर्व और वर्तमान कर्मचारियों के बयान दर्ज किए हैं। सूत्रों के अनुसार, पूछताछ के दौरान दो कर्मचारियों से मिली जानकारियों के आधार पर पुलिस उस व्यक्ति तक पहुंची है, जिस पर दान चोरी से जुड़ी संवेदनशील जानकारी एक प्रमुख राजनीतिक नेता तक पहुंचाने का शक है।
जांच का दायरा उस समय इस दिशा में बढ़ा था, जब चढ़ावा चोरी की घटना के करीब एक महीने बाद ट्रस्ट पदाधिकारियों की आपसी बातचीत की जानकारी सामने आई थी। इसमें ट्रस्ट के भीतर की गोपनीय जानकारी मीडिया और एक प्रमुख राजनीतिक नेता तक पहुंचने को लेकर चिंता जताई गई थी। इसके बाद पुलिस ने यह पता लगाने की कोशिश शुरू की कि अंदर की जानकारी किसके जरिए बाहर पहुंची।
सूत्रों के अनुसार, जांच का शिकंजा कसने के बीच संदिग्ध ने जुलाई के बाद अपने फेसबुक अकाउंट से कई पोस्ट डिलीट कर दिए। 28 जुलाई के बाद उसके फेसबुक अकाउंट पर कोई नई पोस्ट भी नहीं की गई। पुलिस ने डिलीट पोस्ट का डेटा हासिल करने के लिए साइबर सेल की मदद ली है। जांच एजेंसियां सोशल मीडिया गतिविधियों और चढ़ावा चोरी के बाद संबंधित लोगों के बीच हुए संपर्क की भी पड़ताल कर रही हैं।
एसबीआई के सभी संबंधित कर्मचारियों के बयान पुलिस दर्ज कर चुकी है। सूत्रों के अनुसार, इनमें तीन कर्मचारियों से व्यापक स्तर पर पूछताछ हुई। इनमें से दो कर्मचारियों से मिली जानकारियों को विवेचना में अहम माना जा रहा है। पुलिस इन बयानों और उपलब्ध साक्ष्यों का आपस में मिलान कर रही है।
