वीर बहादुर सिंह पूर्वांचल विश्वविद्यालय के इंक्यूबेशन सेंटर को उत्तर प्रदेश सरकार की मान्यता मिल गई है।लखनऊ में आयोजित प्रदेश स्तरीय कार्यक्रम में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने विश्वविद्यालय के नवनियुक्त कुलपति प्रो. राकेश कुमार सिंह एवं इंक्यूबेशन सेंटर के कार्यकारी निदेशक प्रो. अविनाश पाथर्डीकर को मान्यता प्रमाणपत्र प्रदान किया।
खास बात यह रही कि प्रो. राकेश कुमार सिंह के कुलपति पद का कार्यभार ग्रहण करने के तीसरे दिन ही विश्वविद्यालय को यह महत्वपूर्ण उपलब्धि मिली। कार्यक्रम के दौरान कुलपति ने मुख्यमंत्री से अपना औपचारिक परिचय कराते हुए विश्वविद्यालय की ओर से प्रमाणपत्र ग्रहण किया।इंक्यूबेशन सेंटर को शासन की मान्यता मिलने से विश्वविद्यालय से जुड़े स्टार्टअप और इनक्यूबेटीज को प्रदेश सरकार की विभिन्न योजनाओं का लाभ प्राप्त करने में सहूलियत होगी।
सीड फंडिंग, प्रोत्साहन राशि और स्टार्टअप विकास से संबंधित सरकारी सुविधाओं तक उनकी पहुंच आसान होगी। इससे विद्यार्थियों और शोधार्थियों के नवाचार आधारित विचारों को स्टार्टअप में परिवर्तित करने के साथ विश्वविद्यालय में उद्यमिता की संस्कृति को मजबूत करने का अवसर मिलेगा।
कुलपति प्रो. राकेश कुमार सिंह ने कहा कि यह मान्यता विश्वविद्यालय के लिए महत्वपूर्ण उपलब्धि है। इससे नवाचार और उद्यमिता के प्रयासों को संस्थागत मजबूती मिलेगी और विद्यार्थियों, शोधार्थियों तथा नवोदित उद्यमियों को अपने विचारों को उद्यम का स्वरूप देने के बेहतर अवसर मिलेंगे।
कार्यकारी निदेशक प्रो. अविनाश पाथर्डीकर ने बताया कि मान्यता से पूर्वांचल के युवाओं को स्टार्टअप के लिए मार्गदर्शन और सरकारी योजनाओं से जुड़ने का बेहतर मंच उपलब्ध होगा।
कार्यक्रम में उत्तर प्रदेश स्टार्टअप नीति-2026 पुस्तिका का विमोचन और उत्तर प्रदेश स्टार्टअप मिशन पोर्टल का शुभारंभ भी किया गया। बताया गया कि स्टार्टअप नीति के तहत 107 स्टार्टअप को 3.42 करोड़ रुपये से अधिक तथा नौ इनक्यूबेटीज को 1.79 करोड़ रुपये की प्रोत्साहन राशि वितरित की गई।
कार्यक्रम में मुख्यमंत्री ने प्रदेश में नवाचार एवं उद्यमिता को बढ़ावा देने तथा स्टार्टअप पारिस्थितिकी तंत्र को मजबूत करने पर जोर दिया। वित्त एवं संसदीय कार्य मंत्री सुरेश कुमार खन्ना, इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्री सुनील कुमार शर्मा सहित अन्य अधिकारी मौजूद रहे।
इंक्यूबेशन सेंटर की मान्यता से विद्यार्थियों, शोधार्थियों और नवोदित उद्यमियों को अपने नवाचार आधारित विचारों को स्टार्टअप के रूप में विकसित करने तथा सरकारी सहायता और प्रोत्साहन योजनाओं से जुड़ने का अवसर मिलेगा।
