मानसून के आगमन के बाद से वर्षा का क्रम जारी है, लेकिन मंडल के पीलीभीत और बरेली की धरा अब तक प्यासी है। यहां वर्षा सामान्य स्तर तक नहीं पहुंच सकी है। एक जून से छह अगस्त तक पीलीभीत में सामान्य से 74 प्रतिशत कम वर्षा हुई, जिसे येलो श्रेणी में रखा गया है। वहीं बरेली में 22 प्रतिशत वर्षा की कमी दर्ज हुई है, जिसे रेड श्रेणी में शामिल किया गया है।

सबसे अधिक चिंताजनक स्थिति पीलीभीत की बनी हुई है, जहां लगातार कम वर्षा से खेती और जल स्रोतों पर असर पड़ने की आशंका है। दूसरी ओर शाहजहांपुर में 19 प्रतिशत की कमी के बावजूद स्थिति ग्रीन श्रेणी में है, जबकि बदायूं में सामान्य से चाद प्रतिशत अधिक वर्षा दर्ज होने से स्तर सामान्य माना गया है।

मौसम विभाग की ओर से गुरुवार को प्रादेशिक आंकड़े जारी किए गए, जिसमें बरेली और पीलीभीत में सामान्य से कम वर्षा दर्ज की गई। एकीकृत मौसम पूर्वानुमान केंद्र के विशेषज्ञ अतुल कुमार सिंह के अनुसार, मानसूनी द्रोणी अपनी सामान्य स्थिति के निकट सक्रिय बनी हुई है। इसके साथ ही विभिन्न स्तरों पर बने चक्रवाती परिसंचरणों के प्रभाव से प्रदेश में मानसूनी गतिविधियां जारी रहने की संभावना है।

आगामी चार दिनों तक मौसम में बदलाव बना रहेगा। विशेष रूप से प्रदेश के दक्षिणी हिस्सों में कहीं-कहीं भारी वर्षा होने के आसार हैं, जबकि उत्तरी एवं उससे सटे मध्य क्षेत्रों में वर्षा की गतिविधियां अपेक्षाकृत कम रह सकती हैं। आंशिक रूप से बादल छाए रहने और समय-समय पर हल्की से मध्यम वर्षा होने की संभावना जताई गई है।

बरेली में गुरुवार को मौसम का मिजाज पूरी तरह बदला हुआ नजर आया। सुबह से ही तेज हवाएं चलने लगीं और आसमान में बादलों और धूप के बीच पूरे दिन लुकाछिपी का दौर चलता रहा। मौसम के अनुकूल होते ही कई हिस्सों में झमाझाम वर्षा दर्ज की गई, जिससे लोगों को उमस और गर्मी से काफी राहत मिली।

अधिकतम तापमान 31.4 डिग्री और न्यूनतम तापमान 25.6 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया। सबसे अधिक वर्षा मीरगंज क्षेत्र में 25.5 मिलीमीटर दर्ज की गई। इसके अलावा नवाबगंज में 11 मिलीमीटर, बहेड़ी में 5.6 मिलीमीटर और फरीदपुर में 2 मिलीमीटर रिकार्ड की गई। पूरे जिले में औसतन .7 मिलीमीटर वर्षा हुई।

 

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