मौसम खराब होने से रुहेलखंड विश्वविद्यालय की कुलाधिपत आनंदीबेन पटेल जनभवन से ऑनलाइन जुड़ीं। सुबह 10 बजे से कार्यक्रम की शुरुआत हुई। सभागार के बाहर से शोभायात्रा शुरू हुई, जिसमें मुख्य अतिथि उत्तराखंड लोक सेवा आयोग के पूर्व अध्यक्ष डॉ. राकेश कुमार, अति विशिष्ट अतिथि सांसद छत्रपाल सिंह गंगवार, एसएस विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. पुष्पेंद्र बहादुर सिंह और कुलपति प्रो. कृष्ण पाल सिंह शामिल हुए।
महात्मा ज्योतिबाफुले रुहेलखंड विश्वविद्यालय के दीक्षा समारोह को राज्यपाल आनंदीबेन पटेल ने ऑनलाइन संबोधित किया।
राज्यपाल ने कहा, यह राष्ट्र में योगदान का नवीन आरंभ है। महात्मा ज्योतिबाफुले ने बाधाओं को पार करते हुए समाज को नई दिशा दी। उनसे सभी को प्रेरणा लेनी चाहिए। यही विकसित भारत के निर्माण में सार्थक योगदान होगा।
कुलााधिपति ने कहा कि आज 82 में 68 पदक छात्राओं के हैं। हमारी बेटियां शोध में आगे बढ़ रही हैं। हमारा उद्देश्य सभी को समान तरीके से मंच उपलब्ध कराना है। हमें यह भी जानना है कि मेधावियों में ग्रामीण और शहरी परिवेश से कितने विद्यार्थी हैं, कुलपति से इसका डाटा निकलने के लिए कहा।
राज्यपाल ने कहा विवि और कॉलेज का 2 बजे जब कार्य खत्म हो जाता है तो जिन बच्चों की पढ़ाई छूट गई है, उन्हें रोजगारपरक प्रशिक्षण दिया जाए। डिजिलॉकर पर डॉक्यूमेंट अपलोड करने में रुचि दूसरे नंबर पर है। कुलपति को बुलाकर समीक्षा की जाएगी और इस प्रणाली को अन्य विवि को भी अपनाने के लिए कहा जाएगा।
वंदे मातरम और कुलगीत संग कार्यक्रम शुरू हुआ। कुलपति ने विवि की प्रगति रिपोर्ट प्रस्तुत की, जिसमें ऑनलाइन शिक्षा, एआई, रैंकिंग और सुविधाओं के बारे में बताया।
राज्यपाल आनंदीबेन पटेल ने कहा कि विक्रम रॉकेट अंतरिक्ष यात्रा का प्रतीक बना। यह दिखाता है कि हौंसला है तो कामयाबी मिलती है। पीएम ने प्राइवेट सेक्टर को भी इसमें जोड़ा है, रॉकेट बनाने वालों में 26 से 30 वर्ष के युवा हैं। यह सब विश्व को भारत की प्रतिभा का परिचय दे रहे हैं। सफलता संयोग से नहीं, निर्णय से मिलती है। युवाओं से आग्रह किया कि बड़े सपने देखिय, भविष्य उनका होता है जो अवसर का निर्माण करते हैं। यही विश्वास के साथ भारत आगे बढ़ रहा है।