राम मंदिर चोरी केस की जांच के लिए एक बार फिर एसआईटी अयोध्या पहुंच चुकी है। गुरुवार को राम जन्मभूमि परिसर पहुंची टीम ने श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट द्वारा कम दाम की जमीन अधिक दाम में खरीदने के आरोपों की जांच शुरू की है। अधिकारियों ने 2021 से लेकर वर्तमान समय तक जितनी भी जमीन खरीदी गई है, उसके दस्तावेज और बैंक लेनदेन का रिकॉर्ड मांगा है। मामले में ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय ,सदस्य डॉ. अनिल मिश्र और गोपाल राव से पूछताछ की है।
आम आदमी पार्टी के सांसद संजय सिंह ने 2021 में ही जमीन खरीद के मामले को उठाया था। अब राम मंदिर चढ़ावा चोरी का मामला सामने आया तो दोबारा संजय सिंह ने ट्रस्ट पर हमले तेज कर दिए। कुछ दिन पहले एसआईटी को जमीनों से जुड़े कागजात सौंपे और दावा किया था कि ट्रस्ट ने कम दाम की जमीनों को अधिक में खरीद कर राम भक्तों द्वारा दिए गए दान के रुपयों का दुरुपयोग किया है। संजय सिंह का सीधे निशाना महासचिव चंपत राय और डॉ. अनिल मिश्र था। जो कागजात एसआईटी को उपलब्ध कराए गए उन पर चंपत राय और अनिल मिश्रा के ही हस्ताक्षर थे।
सूत्र बताते हैं कि एसआईटी के अधिकारी पहले संजय सिंह द्वारा दिए गए कागजात की जांच लखनऊ से ही अयोध्या कैंट (फैजाबाद) के संबंधित विभाग से कराई है। गुरुवार को दोपहर बाद यहां पहुंचने के कारण ट्रस्ट कई कागजात अधिकारियों को उपलब्ध नहीं करा सका है। सूत्र बताते हैं कि शुक्रवार को राजस्व विभाग के कुछ अधिकारियों से जानकारियां हासिल की जा सकती हैं। अधिकारी खतौनी, खसरा दाखिल-खारिज जमीन की नाप और कब्जा विवाद आदि विषयों पर मंथन कर रहे हैं।
सूत्र बताते हैं कि इस बार जांच में राम मंदिर ट्रस्ट के पदाधिकारी ही नहीं, कुछ प्रमुख बाहरी लोग भी शामिल हो सकते हैं। जमीन खरीदने और बेचने में सांसद संजय सिंह ने जिन लोगों पर आरोप लगाया है वह भी पूछताछ की जद में बताए जा रहे हैं। सूत्र यह भी बताते हैं कि 2021 के बाद खरीदी गई जमीनों के अभिलेख भी खंगाले जा रहे हैं। जिसमें ट्रस्ट के सदस्य गोपाल राव की भूमिका अधिक बताई जा रही है। कुछ वर्ष पहले खरीदी गई जमीन में कौन-कौन लोग शामिल थे यह भी जांच का विषय बताया जा रहा है।
चार साल पहले अगर सरकार अयोध्या में श्रीराम मंदिर का निर्माण शुरू होने से पहले हुए जमीन घोटाले के मामले में कड़ी कार्रवाई कर देती तो शायद करोड़ों रुपये की चढ़ावा चोरी का प्रकरण यूं सिरदर्द न बनता और न ट्रस्ट से लेकर शासन-प्रशासन की विपक्ष फजीहत ही कर पाता।
अयोध्या में श्रीराम मंदिर का निर्माण शुरू होने से पहले ही आर्थिक गतिविधियां भी बढ़नी शुरू हो गई थीं। रामनगरी के विकास पर उद्यमियों की ही नहीं, नेताओं, बिल्डरों के करीबी अफसरों, प्रापर्टी डीलरों, बिल्डरों तक सबकी निगाहें थीं। इनमें खासकर अपने आर्थिक लाभ की दूरदर्शिता रखने वालों ने जमीनों पर नजरें गड़ा दी थीं और खूब खेल भी किए।
अयोध्या में प्रशासन व पुलिस के वरिष्ठ अधिकारियों के साथ ही अन्य रसूखदारों के जमीनों की धड़ल्ले से खरीद किए जाने का मामला दिसंबर 2021 में उठा था। आरोप था कि श्रीराम जन्मभूमि मामले में सुप्रीम कोर्ट का फैसला आने के बाद अयोध्या में अधिकारियों व सफेदपोशों की मिलीभगत से जमीनों की खरीद-फरोख्त की गई थी। विपक्ष ने भी मामले को लेकर सरकार को घेरा था और रामनगरी में बड़े खेल होने के गंभीर आरोप लगाए थे। कई ट्रस्ट की जमीनों को कम दरों पर बेचे जाने के आरोप भी थे।
खासकर अयोध्या में तैनात रहे अधिकारियों पर इस खेल में शामिल होने की बात कही गई थी। कई अधिकारियों व सफेदपोशों के रिश्तेदारों के नाम जमीन खरीदे जाने के कुछ दस्तावेज भी सामने आए थे। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने इस हाईप्रोफाइल मामले की जांच तत्कालीन अपर मुख्य सचिव, राजस्व की अगुवाई में गठित टीम को सौंपी थी।
सूत्रों के अनुसार तब जांच में जमीनों की खरीद-फरोख्त में कोई कानूनी पेंच तो सामने नहीं आया था पर अधिकारियों की भूमिका को लेकर जांच रिपोर्ट में उनकी नैतिकता और कर्तव्यनिष्ठा पर सवाल किया गया था। हालांकि जांच का दायरा सीमित रहा था, जिसे बढ़ाया नहीं गया था। अब सवाल यह उठ रहा है कि तब अगर अयोध्या में तब जमीनों की सिलसिलेवार गहनता से वृहद जांच कराई गई होती तो धांधली उजागर होती। विभिन्न ट्रस्ट की जमीनों को खरीदने वालों की आय-व्यय की जांच में रसूखदारों की बेनामी संपत्तियां भी बेनकाब होतीं। नजूल की जमीनों को लेकर किए गए खेल भी सामने आते। इस कार्रवाई का भय कायम होता तो शायद ट्रस्ट की व्यवस्था को भी चुस्त-दुरुस्त कर दिया गया होता ताकि कोई चोरी आदि की संभावना न रह जाए।
दूसरी बार राम मंदिर पहुंची एसआईटी ने सबसे पहले रामलला के दर्शन के साथ उनके आभूषणों और चढ़ावे की बहुमूल्य वस्तुओं के रखरखाव एवं व्यवस्था के बारे में प्रभारी केडी बाबू से पूछताछ की है। उनके द्वारा तैयार अभिलेखों और अन्य रिकार्डों के साथ भारत सरकार के वित्त मंत्रालय के उपक्रम प्रिंटिंग एंड मिटिंग कारपोरेशन आफ इंडिया (मिंट) से हुए लेन-देन के बारे में भी विस्तृत जानकारी ली।
एसआईटी के जांच अफसरों ने बैंकों में भेजे जाने वाली धातुओं के बारे में भी पूछताछ के साथ अब तक का पूरा ब्योरा तलब किया है। उसी की गहराई से पूरे दिन जांच चलती रही। मिली जानकारी के अनुसार देर रात तक एसआईटी अधिकारियों की टीम राम मंदिर परिसर स्थित कैंप कार्यालय में ही जमी रही। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ द्वारा एसआईटी का कार्यकाल बढ़ाए जाने के बाद गुरुवार को उम्मीद के मुताबिक जांच टीम समय से यहां पहुंच गई थी। जांच अधिकारियों ने अपना शिविर कार्यालय तीर्थ यात्री सुविधा केंद्र में ही बनाया है।
पहले चरण में जांच टीम का शिविर कार्यालय ग्रीन हाउस में राम मंदिर के उत्तर तरफ था मगर 19 जून को अयोध्या पहुंचे मुख्यमंत्री योगी के आगमन के दौरान प्रोटोकाल में अधिकारियों ने ग्रीन हाउस खाली कर पूरा नेटवर्किंग सेट अप तीर्थ यात्री सुविधा केंद्र (पीएफसी) में ट्रांसफर कर लिया। तब से शासन को प्रारम्भिक रिपोर्ट सौंपने तक यहीं कार्य चल रहा था।
दूसरे चरण में गुरुवार को जांच टीम ने यहां पहुंचने के बाद पीएफसी के शिविर कार्यालय को यथावत रखा और दिन भर सारा कामकाज भी यहीं निपटाया। इस दौरान गोपनीयता बरतने के लिए ट्रस्ट कार्यालय के कर्मचारियों को दूसरी तरफ शिफ्ट कर दिया गया और सुरक्षा गार्ड तैनात कर आवागमन को रोक दिया गया, जिससे जांच निर्बाध रूप से हो और अनावश्यक बातें परिसर के बाहर न फैलें।
