प्रेमानंद महाराज के सामने भक्त कुछ ना कुछ जिज्ञासा लेकर आते हैं। ऐसे ही एक भक्त ने प्रेमानंद महाराज जी से पूछा कि जब किसी भी व्यक्ति के साथ कुछ अनिष्ट हो जाता है, तो लोग ग्रहों को दोष देते हैं। क्या ग्रहों की दशा कर्मों के फल को प्रभावित करती हैं। या हमारे कर्म ग्रहों की दशा से बचा सकते हैं। चलिए जानते हैं कि प्रेमानंद महाराज ने क्या जवाब दिया।
महाराज जी कहते हैं कि दोनों बातें हैं। हमारे बुरे जब कर्म आने होते हैं, जो नक्षत्र हैं, वो उस बुरी दशा को ग्रहण करके हमारे ऊपर छोड़ते हैं। हमारे कर्म के अनुसार और अगर हमारा कर्म सही है, तो नक्षत्र भी हमारे सही हो जाएंगे। वो कर्म की परंपरा से चलते हैं। जैसे जब हमको बुरा समय व्यतीत करना है और बड़ा कष्ट भोगना है, तो नक्षत्र बुरी दशा में बैठ जाएंगे। क्योंकि कर्म के अनुसार भोग भोगना है।
महाराज जी कहते हैं कि अगर हमारा सही समय आ गया है, तो नक्षत्र अच्छी दिशा में बैठ जाएंगे। महाराज जी आगे कहते हैं कि एक दशा हम आपको बता देते हैं, अगर भगवान के शरण में हो, तो साढ़े साती शनिचर रोज लगा रहे, तो कुछ नहीं उखाड़ पाएगा। भगवान की शरण में यदि भजन करते हो, तो यह ग्रह नक्षत्र कुछ नहीं बिगाड़ सकते हैं। महाराज जी ने बताया कैसे ग्रह-नक्षत्रों की दशा से बच सकते हैं, तो नाम जप करो, इधर-उधर मन को ना भटकाएं।
महाराजी कहते हैं कि एक बार एक आदमी हित धाम में मिला, तो वो कई लोहे के छल्ले पहने हुए थे। हमने उससे कहा कि ये क्या है, तो उसने कहा कि घोड़े की नाल के हैं, हमने कहा कि इनसे क्या होता है, तो बोला कि शनिचर का प्रभाव नहीं चढ़ेगा, हमारे ऊपर। महाराज जी कहते हैं कि अरे वो घोड़ा तो बच नहीं पा रहा है, कुंतलो मनो लदकर रोड़ पर दौड़ रहा है और उसकी नाल तुम पहन लोगे, तो वो नाल तुम्हें कर्म बंधन से बचा लेगी? अरे राधा-राधा रटो।
महाराज जी कहते हैं कि भगवान के शरण में होकर अच्छे आचरण करो, जो ग्रह-नक्षत्र खराब हैं, सब अनुकूल हो जाएंगे। ये बुरी दशा में होने पर भी ये आपका मंगल करेंगे। जहां राधा वहां कोई बाधा नहीं। महाराज जी कहते हैं कि जिसको साढ़े साती चढ़ा हो, बस वो राधा-राधा रटना शुरू कर दें। अगर कुछ बिगड़ जाए तो हमें बता देना। महाराज जी कहते हैं कि ऐसे चाहे कुंतलों तेल चढ़ा दो, शनि भगवान बिल्कुल प्रसन्न नहीं होंगे। ये सब नक्षत्र देवता हैं, ये सब भगवान के पार्षद हैं, जब आप भगवान के सम्मुख हो जाओगे, तो ये सब कृपा करने लेगेंगे।
महाराज जी अंत में कहते हैं कि जब आप भगवान से विमुख आचरण करोगे, तो यही आपका विरोध करने लगेंगे। अशांति पैदा कर देंगे, विपत्ति पैदा कर देंगे। वैसे सिद्धांतिक ये है कि जब हमारा बुरी दशा आने को होती है, तो हमारे जो ग्रह नक्षत्र हैं, वो बुरी दशा में बैठ जाते हैं और हमें दंड देने लगते हैं। जब हमारी अच्छी दशा आनी होती है, तो ये अच्छी दशा में बैठ जाते हैं। लेकिन भगवान की शरणागति में ये अगर बुरी दशा में भी बैठे हो, तो भी हमारा मंगल होगा, अमंगल नहीं होगा।
डिस्क्लेमरः इस आलेख में दी गई जानकारियों पर हम यह दावा नहीं करते कि ये पूर्णतया सत्य एवं सटीक हैं। विस्तृत और अधिक जानकारी के लिए संबंधित क्षेत्र के विशेषज्ञ की सलाह जरूर लें।
