हंसना सेहत के लिए अच्छा है, खूब हंसिए, हमेशा हंसिए, लेकिन उस वक्त मत हंसिए जब पूरा देश दर्द में हो। ये हंसना सबकी तकलीफ और बढ़ा गया और ऐसा किया भारतीय कप्तान सूर्यकुमार यादव ने। साउथ अफ्रीका के खिलाफ सुपर 8 के मैच के बाद जब सूर्यकुमार यादव प्रजेंटेशन के लिए मैदान पर आए वो तब भी हंस रहे थे मानो कुछ हुआ ही ना हो। मानो उनके हाथ कोई खजाना लग गया है।

वहीं भारत को हराने के बाद जब साउथ अफ्रीका के कप्तान एडन मार्करम प्रजेंटेशन में आए तब उनके चेहरे पर गंभीरता थी। वो चाहते तो सूर्यकुमार से ज्यादा हंस सकते थे, लेकिन वो गंभीर नजर आए मानो कह रहे हों कि अभी मिशन कंप्लीट नहीं हुआ है। अभी आगे का सफर बाकी है और उसके बाद ही हमारे लिए खुशियां आएंगी।

अब बात सूर्यकुमार यादव की कर लेते हैं। याद करिए अहमदाबाद में मुकाबले से पहले जब सूर्यकुमार यादव प्रेस कांफ्रेंस में आए थे तब वो पत्रकारों के सवालों का इस तरह से जवाब दे रहे थे मानो उनकी टीम के सामने कोई कुछ है ही नहीं। सवाल जब संजू सैमसन को टीम में जगह देने की हुई तो हंसते हुए कहा कि तो क्या अभिषेक और तिलक वर्मा को टीम से बाहर कर दें तो साहब साउथ अफ्रीका के खिलाफ उन्होंने क्या कर लिया ये हम सबने देख लिया।

सूर्यकुमार यादव मैच से पहले भी प्रेस कांफ्रेंस में हंसते हुए नजर आ रहे थे और वो खुद काफी आत्मविश्वास में नजर आए और उन्होंने खिलाड़ियों का पक्ष भी लिया। उस वक्त ये हंसी अच्छी लगी क्योंकि टीम को साउथ अफ्रीका के खिलाफ मैच खेलना था, लेकिन जब मैच हुआ और भारत को टी20 वर्ल्ड कप की सबसे बड़ी हार (रन के लिहाज से) मिली तब सूर्यकुमार की हंसी चुभी। अरे हारने के बाद कुछ तो गंभीर रहते इस बात के प्रति की हमें भी ये हार बुरी लगी है और हमें इससे निराशा मिली है। आप हंस के क्या दिखाना चाह रहे थे कि अरे इस हार का कोई असर हम पर नहीं है, लेकिन ऐसा नहीं है। आप अब इस स्थिति में हैं कि सेमीफाइनल से बाहर हो सकते हैं।

मैच में हार और जीत होती है क्योंकि किसी एक टीम को इस मैच में भी जीत मिलनी थी, लेकिन आपने क्या किया। आप तो लड़े ही नहीं और पूरी तरह से हथियार डाल दिया। ऐसा लगा ही नहीं कि आप साउथ अफ्रीका के खिलाफ कोई होमवर्क करके आए हैं। वहीं प्रोटियाज को देखकर साफ तौर पर लगा कि उन्होंने भारत के हरेक खिलाड़ी के खिलाफ रणनीति बनाई है और उन्होंने अपने प्लैन को पूरी तरह से मैदान पर उतारा है। साउथ अफ्रीका ने अपने गेंदबाजों का इस्तेमाल इतने सटीक तरीके से किया कि भारतीय बल्लेबाज रन बनाने के लिए तरसते हुए नजर आए।

ओवरऑल भारतीय कप्तान सूर्यकुमार यादव को सबसे पहले अपने अति आत्मविश्वास का त्याग करना होगा और अपनी कप्तानी को भी पॉलिश करनी होगी कि आपको किस स्थिति में क्या करना है। साउथ अफ्रीका के खिलाफ जब भारतीय गेंदबाजो की पिटाई हो रही थी तब कप्तान को सूझ ही नहीं रहा था कि किसे गेंदबाजी के लिए लगाएं। अभी भारत की सेमीफाइनल में पहुंचने की संभावना पूरी तरह से समाप्त नहीं हुई है, लेकिन इसके लिए भारत को बेहद ठोस प्लान के साथ उतरना होगा क्योंकि जिम्बाब्वे और वेस्टइंडीज की टीम भी अच्छी क्रिकेट खेल रही है।

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